अमेरिका में भारतीय मूल के एक वकील पर कथित शरण (Asylum) धोखाधड़ी मामले में ₹2.2 करोड़ से अधिक के जुर्माने की कार्रवाई शुरू की गई है। अमेरिकी संघीय अधिकारियों का आरोप है कि वकील ने भारतीय नागरिकों की ओर से फर्जी दस्तावेज और गलत तथ्यों पर आधारित शरण आवेदन दाखिल किए।
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) के अनुसार, विनोद डोड्डामानी नामक वकील देशभर में कानूनी सेवाएं प्रदान करते हैं और मुख्य रूप से भारतीय नागरिकों के आव्रजन तथा शरण संबंधी मामलों का प्रतिनिधित्व करते हैं। अधिकारियों का आरोप है कि उन्होंने कई मामलों में कथित तौर पर गलत और भ्रामक दस्तावेज दाखिल किए, जिसके बाद जांच एजेंसियों ने कार्रवाई शुरू की।
मामले की जांच अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (ICE) की होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशंस (HSI) इकाई कर रही है। एजेंसी ने वकील के खिलाफ पांच “नोटिस ऑफ इंटेंट टू फाइन” जारी किए हैं, जिनमें शरण आवेदनों के समर्थन में कथित फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है।
जांच एजेंसियों का दावा है कि कई मामलों में दाखिल किए गए “एलियन डिक्लेरेशन” भाषा, तथ्यों और कथित उत्पीड़न से जुड़ी कहानियों के लिहाज से लगभग एक जैसे थे। अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न मामलों में जमा किए गए दस्तावेजों में असामान्य समानताएं पाई गईं, जिससे उनकी प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
DHS के अनुसार, आरोप 32 अलग-अलग आव्रजन मामलों से जुड़े हैं, जिनमें कुल 64 कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कर दाखिल किए गए। इन्हीं आरोपों के आधार पर ICE ने अधिकतम उपलब्ध नागरिक दंड के रूप में 255,232 अमेरिकी डॉलर, यानी लगभग ₹2.2 करोड़ के जुर्माने की मांग की है।
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने सार्वजनिक बयान में कहा है कि आव्रजन व्यवस्था का दुरुपयोग करने वाले कानूनी पेशेवरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया कि यदि कोई वकील धोखाधड़ी या फर्जीवाड़े में शामिल पाया जाता है, तो उसे कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जाएगा।
यह मामला अमेरिकी आव्रजन अधिकारियों द्वारा शरण संबंधी आवेदनों और उनके समर्थन में जमा दस्तावेजों की बढ़ती जांच को भी दर्शाता है। हाल के वर्षों में संघीय एजेंसियों ने कथित फर्जी आव्रजन दावों, बनावटी दस्तावेजों और पेशेवर कदाचार के मामलों पर निगरानी और कार्रवाई तेज की है।
अमेरिका में शरण प्राप्त करने के लिए आवेदकों को उत्पीड़न या खतरे का विश्वसनीय आधार प्रस्तुत करना होता है। ऐसे मामलों में वकीलों द्वारा दाखिल किए गए शपथपत्र, घोषणाएं और अन्य दस्तावेज महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए उनकी सत्यता और विश्वसनीयता जांच एजेंसियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
फिलहाल यह मामला प्रशासनिक प्रवर्तन प्रक्रिया के तहत विचाराधीन है और जुर्माने का प्रस्ताव संघीय एजेंसियों के आरोपों पर आधारित है। अंतिम जिम्मेदारी और दंड का निर्धारण आगे की कानूनी एवं प्रशासनिक कार्यवाही पूरी होने के बाद ही होगा।
यह मामला आव्रजन कानून से जुड़े पेशेवरों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है कि शरण और आव्रजन प्रक्रियाओं में गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप गंभीर कानूनी परिणाम ला सकते हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि आव्रजन धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
