अमेरिकी एजेंसियों ने भारतीय मूल के वकील पर कथित शरण आवेदन धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप में जुर्माने की कार्रवाई शुरू की है।

कनाडा वर्क परमिट के नाम पर ₹26.86 लाख की कथित ठगी: इंस्टाग्राम विज्ञापन से शुरू हुआ सपना बना धोखाधड़ी का मामला, चार पर FIR

Roopa
By Roopa
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अहमदाबाद। कनाडा में नौकरी और वर्क परमिट दिलाने का झांसा देकर ₹26.86 लाख की कथित ठगी का मामला गुजरात के अहमदाबाद में सामने आया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने एक इमिग्रेशन कंसल्टेंसी फर्म से जुड़े चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि विदेश में रोजगार और वर्क परमिट का भरोसा दिलाकर शिकायतकर्ता से चरणबद्ध तरीके से बड़ी रकम वसूली गई, लेकिन न तो वीजा मिला और न ही वादा किया गया रोजगार।

पुलिस के अनुसार, शिकायत गांधीनगर के रायसन क्षेत्र निवासी 33 वर्षीय जिगरभाई प्रवीणकुमार पटेल ने दर्ज कराई है, जो एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। शिकायतकर्ता ने बताया कि जुलाई 2024 में विदेश में नौकरी की तलाश के दौरान उनकी नजर इंस्टाग्राम पर एक इमिग्रेशन कंसल्टेंसी के विज्ञापन पर पड़ी। इसके बाद उन्होंने थलतेज स्थित कंपनी के कार्यालय का दौरा किया।

शिकायत के मुताबिक, कार्यालय में उन्हें आश्वासन दिया गया कि छह से सात महीनों के भीतर कनाडा का वर्क परमिट और नौकरी की व्यवस्था कर दी जाएगी। इसके लिए शुरुआत में ₹56,000 का पंजीकरण शुल्क जमा कराया गया और पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाणपत्र तथा कार्य अनुभव से जुड़े दस्तावेज लिए गए।

मामले में जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है उनमें कंपनी के निदेशक आकाश पंचाल, जो वर्तमान में कनाडा में रह रहे हैं, के अलावा दर्शन महेंद्रभाई पंचाल, हर्ष मिस्त्री और भार्गव पंचाल शामिल हैं। पुलिस अन्य संबंधित व्यक्तियों की संभावित भूमिका की भी जांच कर रही है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में उनसे एक समझौते पर हस्ताक्षर करवाए गए और कनाडा स्थित कंपनी से जुड़े खाते में कनाडाई डॉलर में भुगतान करने को कहा गया। उन्होंने प्रारंभिक 500 कनाडाई डॉलर जमा किए। इसके बाद वर्क परमिट प्रक्रिया के लिए 9,510 कनाडाई डॉलर और अतिरिक्त वीजा प्रक्रिया शुल्क के रूप में ₹11,430 का भुगतान भी किया।

जिगरभाई पटेल के अनुसार, IELTS परीक्षा में कुल 6 बैंड स्कोर प्राप्त करने के बाद उन्हें बताया गया कि उनका वर्क परमिट आवेदन जल्द दाखिल किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि प्रक्रिया को जानबूझकर इतना विलंबित किया गया कि संबंधित लेबर मार्केट इम्पैक्ट असेसमेंट (LMIA) की वैधता ही समाप्त हो गई।

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जब उन्होंने नया LMIA उपलब्ध कराने की मांग की तो कथित तौर पर उनसे अतिरिक्त भुगतान की मांग की गई। शिकायत में कहा गया है कि 31 मार्च 2025 को कंसल्टेंसी के प्रतिनिधियों ने उन्हें एक कथित वीजा स्वीकृति वीडियो दिखाया और पासपोर्ट रिक्वेस्ट (PPR) पत्र जारी करने से पहले लगभग ₹30 लाख और जमा कराने की मांग की।

इन दावों पर विश्वास करते हुए शिकायतकर्ता ने पारिवारिक संपत्ति गिरवी रखी और विसनगर स्थित एक सहकारी बैंक से ₹20 लाख का ऋण लिया। इसके बाद 4 और 5 अप्रैल 2025 को उन्होंने अपने और अपनी मां के बैंक खातों से ₹5-₹5 लाख की कई किश्तों में रकम आरोपियों द्वारा बताए गए खातों में स्थानांतरित की।

शिकायतकर्ता का कहना है कि इतनी बड़ी राशि देने के बावजूद उन्हें न तो पासपोर्ट रिक्वेस्ट पत्र मिला और न ही कनाडा का वर्क परमिट। बाद में जब उन्होंने पैसे वापस मांगे तो कथित तौर पर पूरी राशि लौटाने का आश्वासन दिया गया।

जुलाई 2025 में उन्हें ₹20 लाख के दो पोस्ट-डेटेड चेक दिए गए, लेकिन शिकायत के अनुसार दोनों चेक सम्मानित नहीं हुए। इसके बाद कई बार संपर्क करने के बावजूद धनवापसी नहीं की गई।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर चारों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और संबंधित अपराधों का मामला दर्ज किया है। जांच अधिकारी वित्तीय लेनदेन, बैंक रिकॉर्ड, विदेशी भुगतान, दस्तावेजी साक्ष्य और कथित इमिग्रेशन प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या इसी प्रकार के तरीकों से अन्य लोगों को भी कथित तौर पर निशाना बनाया गया था। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है।

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