हैदराबाद। हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने एक कथित हाई-रिटर्न निवेश और ट्रेडिंग धोखाधड़ी मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरफ्तार व्यक्तियों ने साइबर ठगों को अपने बैंक खाते उपलब्ध कराए, जिनका उपयोग पीड़ितों से ठगी गई रकम को विभिन्न खातों में स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, मामले का खुलासा तब हुआ जब शहर के एक निवासी ने शिकायत दर्ज कराई कि उसे ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश पर अधिक लाभ का लालच देकर ₹1.22 करोड़ की ठगी का शिकार बनाया गया। शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान अधिकारियों ने वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की और उन बैंक खातों की पहचान की जिनमें कथित तौर पर ठगी की रकम भेजी गई थी। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार किए गए छह लोगों ने अपने बैंक खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए थे, जिनका उपयोग अवैध धन के प्रवाह और वितरण के लिए किया गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी देश के विभिन्न हिस्सों से संबंध रखते हैं। पुलिस के मुताबिक, वे कथित तौर पर प्रत्येक लेनदेन या खाते के उपयोग के बदले कमीशन प्राप्त करते थे। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि आरोपियों की भूमिका केवल बैंक खाते उपलब्ध कराने तक सीमित थी या वे पूरे साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क की गतिविधियों से भी परिचित थे।
साइबर अपराधों की जांच से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में ठगी करने वाले गिरोह तथाकथित “म्यूल अकाउंट्स” का व्यापक उपयोग कर रहे हैं। ऐसे खातों का इस्तेमाल अवैध रूप से प्राप्त धन को तेजी से एक खाते से दूसरे खाते में भेजने और जांच एजेंसियों से बचने के लिए किया जाता है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कई मामलों में चेतावनी दी है कि निवेश पर असामान्य और अत्यधिक रिटर्न का दावा करने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अक्सर सोशल इंजीनियरिंग और वित्तीय प्रलोभन का उपयोग कर लोगों को जाल में फंसाते हैं। उनका कहना है कि किसी भी निवेश से पहले प्लेटफॉर्म की वैधता और नियामकीय स्थिति की जांच करना आवश्यक है।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस नेटवर्क के माध्यम से कितनी राशि का लेनदेन हुआ और क्या अन्य राज्यों के पीड़ित भी इस कथित गिरोह का शिकार बने हैं। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच की जा रही है।
साइबर क्राइम अधिकारियों ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप या अनजान वेबसाइटों के माध्यम से मिलने वाले निवेश प्रस्तावों पर आंख बंद करके भरोसा न करें। विशेष रूप से ऐसे प्रस्ताव जिनमें कम समय में अत्यधिक लाभ का दावा किया जाता हो, उनकी स्वतंत्र रूप से जांच अवश्य करनी चाहिए।
फिलहाल सभी छह आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
