फर्जी फर्म बनाकर विदेशी कंपनियों को निशाना बनाने वाले एक संगठित ठगी गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। पिछले करीब 12 वर्षों से सक्रिय इस गिरोह के सदस्य पहली बार गिरफ्तार किए गए हैं। जांच में अब तक 57 बैंक खातों का पता चला है, जिनके जरिए लगभग 600 करोड़ रुपये की ठगी की आशंका जताई जा रही है।
क्राइम ब्रांच के अनुसार गिरोह के सदस्य विदेशी कंपनियों की बुनियादी जानकारी जैसे उत्पादन क्षमता, कारोबार और टर्नओवर का अध्ययन करने के बाद फर्जी वेबसाइट और फर्म तैयार करते थे। इसके बाद बड़ी डील का झांसा देकर टोकन मनी के रूप में छोटी रकम वसूल ली जाती थी।
जांच अधिकारियों का कहना है कि ठगी के बाद विदेशी कंपनियां अधिकतर मामलों में ईमेल के जरिए ही शिकायत करती थीं। भारत आकर शिकायत दर्ज कराने वाला कोई कर्मचारी नहीं होता था, जिसका फायदा आरोपित लंबे समय तक उठाते रहे।
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दिसंबर 2025 की ठगी से खुला राज
गिरोह का खुलासा चेक गणराज्य की स्टील कंपनी से हुई ठगी के बाद शुरू हुई जांच से हुआ। दिसंबर 2025 में कंपनी से करीब दो करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई थी। कंपनी ने 13 जनवरी 2026 को पुलिस कमिश्नर कार्यालय में ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजी थी।
मामले की जांच डीसीपी पश्चिम को सौंपी गई, जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई शुरू की। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पनकी अपट्रान स्टेट क्षेत्र में वर्धमान इंडस्ट्रीज नाम से फर्जी फर्म बनाकर स्टील आपूर्ति के नाम पर टोकन मनी ली गई थी। रकम लेने के बाद आरोपितों ने मोबाइल नंबर बंद कर दिए और सभी ईमेल तथा संपर्क माध्यम डिलीट कर दिए।
चार आरोपी गिरफ्तार, कई फर्जी दस्तावेज बरामद
जांच के दौरान झांसी के अमित ओम प्रकाश शर्मा और नौबस्ता के आकाश कुमार का नाम सामने आया। दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। उनके पास से कई फर्जी फर्म की मोहर, आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक दस्तावेज बरामद हुए हैं।
इसके अलावा मुंबई के कांदीवली स्थित अपार्टमेंट से रोहित विजय चांचड़ और नौबस्ता पशुपति नगर के अरविंद महंत यादव को गिरफ्तार किया गया। दोनों को भी जेल भेज दिया गया है। बताया गया है कि अरविंद मुंबई में ऑटो चलाता था।
बिहार से गिरफ्तार किए गए रामकुमार राय के खाते में ठगी के करीब दो लाख डॉलर ट्रांसफर होने की जानकारी भी सामने आई है।
2014 से सक्रिय था गिरोह
क्राइम ब्रांच की जांच में पता चला है कि अमित शर्मा और रोहित चांचड़ वर्ष 2014 से इस तरह की ठगी में शामिल थे। पुलिस को अमित के नाम पर 15 खाते और रोहित के नाम पर 42 बैंक खाते मिले हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि इनमें से अधिकांश खातों का संचालन आरोपित स्वयं करते थे, जबकि कई खाते अन्य लोगों के नाम पर खोले गए थे। क्राइम ब्रांच ने बताया कि 57 संदिग्ध खातों में से 41 खातों की बैंक डिटेल प्राप्त कर ली गई है, जबकि बाकी खातों की जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।
विदेशी कंपनियां शिकायत के बाद रुक जाती थीं
पुलिस के अनुसार गिरोह खासतौर पर विदेशी कंपनियों को निशाना बनाता था। ठगी के बाद कई कंपनियां ईमेल के जरिए शिकायत भेजकर आगे की कार्रवाई से दूर हो जाती थीं, जिससे गिरोह के सदस्य लंबे समय तक बचते रहे।
अब पुलिस क्राइम नेटवर्क की पूरी जांच कर रही है और अन्य संदिग्ध खातों तथा आरोपितों की तलाश जारी है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।
