“₹1.5 लाख निवेशकों के साथ कथित ठगी पर फूटा गुस्सा; संपत्ति नीलामी के बावजूद पूरी रकम लौटाने की मांग, प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की अपील”

“बेंगलुरु में बड़ा वित्तीय घोटाला: Green Birds Agro Farm मामले में निवेशकों का हल्ला बोल”

Roopa
By Roopa
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बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में मंगलवार को उस समय बड़ा जन आक्रोश देखने को मिला जब Green Birds Agro Farm Limited से जुड़े कथित निवेश घोटाले के पीड़ितों ने फ्रीडम पार्क में जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों की संख्या में पहुंचे निवेशकों ने अपनी पूरी जमा पूंजी वापस दिलाने की मांग करते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की।

प्रदर्शन में किसान, छोटे व्यापारी, महिलाएं और निम्न आय वर्ग के लोग शामिल रहे, जिन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने सुरक्षित और उच्च रिटर्न वाले निवेश का लालच देकर उनसे बड़ी रकम जुटाई और बाद में भुगतान बंद कर दिया। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, यह मामला केवल कुछ व्यक्तियों का नहीं बल्कि एक व्यापक वित्तीय धोखाधड़ी का हिस्सा है, जिससे हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं।

प्रदर्शन का नेतृत्व राज्य गन्ना उत्पादक संघ के अध्यक्ष कुरुबुरु शांताकुमार ने किया। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों की संख्या राज्यभर में लगभग 1.5 लाख तक पहुंच चुकी है, जिनमें कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपनी जीवन भर की बचत, खेती से कमाई और यहां तक कि कर्ज लेकर भी निवेश किया था।

जानकारी के अनुसार, इस मामले में राज्य सरकार ने वर्ष 2013 में शुरुआती शिकायतों के बाद सीआईडी जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद कंपनी के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हुए और उसकी कई संपत्तियों की नीलामी भी की गई। हालांकि, निवेशकों का आरोप है कि इसके बावजूद अब तक उन्हें उचित और पारदर्शी तरीके से मुआवजा नहीं मिला है।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कंपनी की लगभग 90 प्रतिशत संपत्तियां पहले ही नीलाम हो चुकी हैं, लेकिन उससे प्राप्त धनराशि का वितरण प्रभावित निवेशकों के बीच सही ढंग से नहीं किया गया। उनका कहना है कि शेष 10 प्रतिशत संपत्तियों की नीलामी भी जल्द पूरी की जानी चाहिए ताकि बकाया राशि की वसूली संभव हो सके।

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इस दौरान यह भी आरोप लगाए गए कि कंपनी से जुड़े कुछ आरोपी जमानत पर बाहर आकर पीड़ितों को फिर से भ्रमित कर रहे हैं और झूठे आश्वासन देकर मामले को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे निवेशकों में गहरी नाराजगी देखी गई।

प्रदर्शन के दौरान मांग की गई कि एक विशेष समिति का गठन किया जाए, जिसमें कुरुबुरु शांताकुमार और पीड़ित निवेशकों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए, ताकि नीलामी और धन वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। साथ ही यह भी मांग की गई कि नीलामी से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से तालुक और जिला प्रशासन कार्यालयों में प्रदर्शित की जाए।

इस घोटाले ने एक बार फिर उन वित्तीय योजनाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो आकर्षक रिटर्न और सुरक्षित निवेश का दावा करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में शुरुआत में नियमित भुगतान कर भरोसा बनाया जाता है, लेकिन बाद में अचानक भुगतान रोककर पूरा नेटवर्क बंद कर दिया जाता है।

साइबर और आर्थिक अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि अब ऐसे घोटालों में डिजिटल प्लेटफॉर्म और नेटवर्किंग का भी इस्तेमाल बढ़ रहा है, जिससे जांच और धन ट्रैकिंग और अधिक जटिल हो जाती है। कई मामलों में संपत्ति की पहचान और रिकवरी सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है।

प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की जांच जारी है और प्रभावित निवेशकों को न्याय दिलाने के लिए सभी कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, शेष संपत्तियों की नीलामी और फंड वितरण प्रक्रिया की समीक्षा भी की जा रही है।

फिलहाल प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन निवेशकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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