केंद्र सरकार ने सोमवार को देश की पहली व्यापक राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति जारी की, जिसे ‘प्रहार’ नाम दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी इस नीति का उद्देश्य आतंकवाद, कट्टरपंथ और उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए एक समन्वित, खुफिया-आधारित और सख्त ढांचा तैयार करना है।
हाल के वर्षों में बढ़ती आतंकी गतिविधियों और पहलगाम में हुए हमले जैसे मामलों के संदर्भ में सरकार ने स्पष्ट किया है कि आतंकवाद के प्रति उसकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति जारी रहेगी। पहलगाम हमले में 26 लोगों की जान गई थी। इसके अलावा हजारों संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट भी ब्लॉक किए गए हैं, जिनके जरिए कथित तौर पर कट्टरपंथी सामग्री प्रसारित की जा रही थी।
ड्रोन और साइबर खतरों पर विशेष फोकस
नीति दस्तावेज में सीमा पार आतंकवाद के साथ-साथ ड्रोन के जरिए हथियार, नकदी और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे खतरों का उल्लेख किया गया है। सरकार ने माना है कि तकनीक का दुरुपयोग आतंकवादी संगठनों के लिए एक बड़ा हथियार बनता जा रहा है।
साइबर स्पेस के माध्यम से भर्ती, प्रचार और जिहाद के महिमामंडन को भी गंभीर चुनौती बताया गया है। नीति में कहा गया है कि इंटरनेट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल आतंकी नेटवर्क आपसी संपर्क और ब्रेनवॉशिंग के लिए कर रहे हैं, जिसे रोकने के लिए डिजिटल निगरानी और त्वरित कार्रवाई जरूरी है।
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आतंकवाद को धर्म से जोड़ने से इनकार
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत आतंकवाद को किसी विशेष धर्म, जाति, देश या सभ्यता से जोड़कर नहीं देखता। हालांकि नीति में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ पड़ोसी देश आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति के औजार के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं।
नीति में हर प्रकार के आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए कहा गया है कि इसे किसी भी धार्मिक, वैचारिक या जातीय आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता।
एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल
‘प्रहार’ नीति का एक प्रमुख लक्ष्य विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। इसमें खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, संयुक्त ऑपरेशन और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
सरकार का कहना है कि आतंकवाद से निपटने के लिए अलग-अलग विभागों की ताकत को एकीकृत कर काम करना होगा। इसके तहत राज्य और केंद्र एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी सुदृढ़ किया जाएगा।
समाज की भागीदारी पर जोर
नीति में ‘होल-ऑफ-सोसायटी अप्रोच’ यानी पूरे समाज की भागीदारी की बात कही गई है। सरकार का मानना है कि केवल सुरक्षा बलों की कार्रवाई से आतंकवाद पर पूरी तरह अंकुश नहीं लगाया जा सकता, बल्कि समाज में फैल रहे कट्टरपंथी विचारों को जड़ से समाप्त करना भी जरूरी है।
युवाओं को भटकाव से बचाने, ऑनलाइन कट्टरपंथी सामग्री पर रोक लगाने और जागरूकता कार्यक्रम चलाने जैसे कदमों को भी रणनीति का हिस्सा बनाया गया है।
मुख्य उद्देश्य: हमलों की रोकथाम
नीति का मूल उद्देश्य भारतीय नागरिकों और देश के हितों की रक्षा करना है। इसके लिए आतंकी हमलों को पहले ही रोकने, खतरे के अनुसार संतुलित और त्वरित जवाब देने तथा दीर्घकालिक सुरक्षा ढांचा विकसित करने की बात कही गई है।
गृह मंत्रालय के अनुसार, ‘प्रहार’ केवल प्रतिक्रिया आधारित नीति नहीं है, बल्कि यह रोकथाम, खुफिया सुदृढ़ीकरण और वैश्विक सहयोग पर आधारित व्यापक रणनीति है।
सरकार का कहना है कि इस नीति के जरिए आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ निर्णायक और समन्वित ‘प्रहार’ सुनिश्चित किया जाएगा।
