नई दिल्ली: देश में तेजी से फैलते साइबर अपराध के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसने डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने कहा है कि सरकारी एजेंसियों ने साइबर ठगों द्वारा हड़पे गए करीब ₹20,000 करोड़ में से ₹8,000 करोड़ से अधिक की राशि को बचाने या फ्रीज करने में सफलता हासिल की है। यह दावा ऐसे समय में आया है जब देश में साइबर अपराध अब संगठित और संस्थागत स्वरूप ले चुका है।
नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने बताया कि 30 नवंबर 2025 तक देशभर में लगभग 82 लाख साइबर अपराध शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से करीब 1.84 लाख मामलों को एफआईआर में परिवर्तित किया गया, जो यह दर्शाता है कि साइबर ठगी का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार अब साइबर अपराध के खिलाफ अपनी कार्रवाई को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी में है।
https://fcrf.academy/ciso-certified-chief-information-security-officer
यह सम्मेलन Central Bureau of Investigation और Indian Cyber Crime Coordination Centre के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से 500 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में साइबर अपराध के बदलते स्वरूप, नई तकनीकी चुनौतियों और उनसे निपटने के उपायों पर गहन चर्चा की गई।
गृह मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि अब साइबर अपराधी पारंपरिक अपराधियों की तरह अलग-थलग नहीं हैं, बल्कि वे संगठित नेटवर्क के रूप में काम कर रहे हैं। ये गिरोह आधुनिक तकनीक का उपयोग कर कानून प्रवर्तन एजेंसियों से “दो कदम आगे” रहने की कोशिश करते हैं। ऐसे में इनसे निपटने के लिए तकनीकी क्षमता बढ़ाने, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करने और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता है।
सरकार ने वर्ष 2020 के बाद से साइबर अपराध से निपटने के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार किया है। इसके तहत I4C के माध्यम से रियल-टाइम रिपोर्टिंग सिस्टम विकसित किया गया है, जिससे पीड़ित तुरंत शिकायत दर्ज करा सकते हैं और ठगी की रकम को समय रहते फ्रीज कराया जा सकता है। इस व्यवस्था ने अब तक बड़ी मात्रा में धनराशि को बचाने में अहम भूमिका निभाई है।
गृह मंत्री ने बताया कि फिलहाल 62 बैंक और वित्तीय संस्थान इस सुरक्षित नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि 31 दिसंबर तक सभी सहकारी बैंकों को भी इस प्रणाली में शामिल कर लिया जाए, जिससे साइबर ठगी के मामलों में और तेज एवं प्रभावी कार्रवाई संभव हो सके।
सम्मेलन के दौरान साइबर अपराध के तीन प्रमुख स्तंभों—वित्तीय, टेलीकॉम और मानव नेटवर्क—पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। वित्तीय पहलू में म्यूल अकाउंट और मनी लॉन्ड्रिंग शामिल हैं, जबकि टेलीकॉम क्षेत्र में सिम कार्ड और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के दुरुपयोग की समस्या सामने आई है। वहीं, मानव नेटवर्क के अंतर्गत साइबर गुलामी और लोगों को जबरन धोखाधड़ी के काम में झोंकने जैसे गंभीर मुद्दों पर चिंता जताई गई।
विशेषज्ञों ने इस दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग को बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े पैमाने पर जांच को प्रभावी बनाया जा सके। साथ ही, धोखाधड़ी की शीघ्र पहचान, फंड ट्रैकिंग, साक्ष्य संरक्षण और पीड़ितों की सुरक्षा के उपायों को और मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।
इस सम्मेलन का एक अहम उद्देश्य विभिन्न हितधारकों—जैसे कानून प्रवर्तन एजेंसियों, बैंकों, टेलीकॉम कंपनियों, नियामक संस्थाओं और तकनीकी प्लेटफॉर्म्स—के बीच सहयोग को मजबूत करना भी था। अधिकारियों का मानना है कि जब तक सभी संबंधित पक्ष मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक साइबर अपराध के इस जटिल जाल को तोड़ना कठिन रहेगा।
भारत में डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार ने जहां आम लोगों की जिंदगी को आसान बनाया है, वहीं इससे नए प्रकार के जोखिम भी उत्पन्न हुए हैं। इन जोखिमों का फायदा उठाकर संगठित साइबर गिरोह बड़े पैमाने पर ठगी को अंजाम दे रहे हैं।
गृह मंत्री ने अंत में कहा कि सरकार नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इसके लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में साइबर अपराध के खिलाफ और कड़े उपाय लागू किए जाएंगे, जिनमें उन्नत तकनीक, सख्त कानूनी प्रावधान और बेहतर समन्वय शामिल होगा।
