हैदराबाद। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) के सिकंदराबाद आयुक्तालय ने हैदराबाद में ₹32.28 करोड़ के कथित फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) मामले का खुलासा करते हुए एक कंपनी के निदेशक को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी पर फर्जी बिलों के जरिए ऐसी कंपनियों से आईटीसी लेने का आरोप है, जो या तो अस्तित्व में नहीं थीं, कारोबार नहीं कर रही थीं या जिनका जीएसटी पंजीकरण रद्द हो चुका था। मामले में जांच आगे जारी है।
सीजीएसटी और सीमा शुल्क क्षेत्र, हैदराबाद के तहत सिकंदराबाद आयुक्तालय की एंटी-इवेजन शाखा ने फर्जी आईटीसी दावों के खिलाफ चल रहे प्रवर्तन अभियान के दौरान यह कार्रवाई की। अधिकारियों के अनुसार, जांच में मुसहराबाद क्षेत्र में स्थित कंपनी से जुड़े वित्तीय लेनदेन और जीएसटी दस्तावेजों की पड़ताल की गई। कंपनी टीएमटी सरिया, स्टील पाइप और ट्यूब के कारोबार में लगी हुई थी।
जांच के दौरान अधिकारियों को ऐसे चालान मिले, जिनके आधार पर कंपनी द्वारा बड़ी मात्रा में आईटीसी का दावा किए जाने की बात सामने आई। जांच एजेंसी के अनुसार, जिन आपूर्तिकर्ता कंपनियों के नाम पर ये चालान जारी किए गए थे, उनमें कई कंपनियां वास्तविक रूप से मौजूद नहीं थीं। कुछ कंपनियां कथित तौर पर कारोबार नहीं कर रही थीं, जबकि कुछ के जीएसटी पंजीकरण पहले ही रद्द हो चुके थे।
क्षेत्रीय अधिकारियों की ओर से किए गए भौतिक सत्यापन में भी इन कथित आपूर्तिकर्ता कंपनियों की गतिविधियों पर सवाल सामने आए। सत्यापन के दौरान घोषित कारोबारी पतों पर वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियां नहीं मिलने की बात कही गई। अधिकारियों के मुताबिक, इससे यह संदेह मजबूत हुआ कि संबंधित कंपनियों का इस्तेमाल वास्तविक वस्तुओं की आपूर्ति किए बिना फर्जी चालान तैयार करने और आईटीसी का लाभ पहुंचाने के लिए किया गया।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया कि कंपनी ने जिन चालानों के आधार पर ₹32.28 करोड़ का आईटीसी लिया, उनके अनुरूप वास्तविक रूप से माल प्राप्त नहीं किया गया था। इसके बावजूद कथित तौर पर इस आईटीसी का इस्तेमाल कंपनी की जीएसटी देनदारी चुकाने के लिए किया गया। अधिकारियों ने इसे केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 के प्रावधानों का उल्लंघन बताया है।
मामले में जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों और दर्ज किए गए बयानों के आधार पर आरोपी निदेशक को 24 सितंबर को सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 69 के तहत गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
अधिकारियों के मुताबिक, मामले में अभी आगे की जांच की जा रही है। जांच का एक प्रमुख पहलू यह पता लगाना है कि फर्जी चालान जारी करने वाली कंपनियों का नेटवर्क किस तरह काम करता था और संबंधित लेनदेन में अन्य कारोबारी या व्यक्ति भी शामिल थे या नहीं। इसके अलावा, आईटीसी के कथित गलत दावे से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।
जीएसटी व्यवस्था में इनपुट टैक्स क्रेडिट का इस्तेमाल कारोबारी खरीद पर चुकाए गए पात्र कर को अपनी कर देनदारी के विरुद्ध समायोजित करने के लिए किया जाता है। जांच एजेंसियां लंबे समय से फर्जी कंपनियों और बिना वास्तविक माल आपूर्ति के तैयार किए गए चालानों के जरिए आईटीसी हासिल करने के मामलों पर कार्रवाई कर रही हैं। ऐसे मामलों में कागजी लेनदेन के जरिये कर देनदारी कम करने या गलत तरीके से क्रेडिट हासिल करने का आरोप लगाया जाता है।
इस मामले में सीजीएसटी अधिकारियों की जांच अब यह निर्धारित करेगी कि कथित फर्जी चालानों के पीछे कौन-कौन से कारोबारी और संस्थाएं सक्रिय थीं तथा आईटीसी के दावे से जुड़ी पूरी धनराशि और कर देनदारी का वास्तविक स्वरूप क्या था। जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
