नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अब साइबर अपराधियों ने समुद्री व्यापार को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। Strait of Hormuz—जहां से दुनिया के करीब 20% तेल और एलएनजी की सप्लाई गुजरती है—अब सिर्फ सैन्य टकराव का केंद्र नहीं, बल्कि डिजिटल ठगी का नया अड्डा भी बनता जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का फायदा उठाकर साइबर ठग जहाजों को “सुरक्षित मार्ग” दिलाने के नाम पर क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान मांग रहे हैं।
मामले ने तब गंभीर रूप लिया जब समुद्री जोखिम प्रबंधन से जुड़ी एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी ने चेतावनी जारी करते हुए बताया कि कई शिपिंग कंपनियों को फर्जी संदेश भेजे जा रहे हैं। इन संदेशों में खुद को ईरानी अधिकारियों का प्रतिनिधि बताकर कहा जा रहा है कि अगर जहाज सुरक्षित तरीके से जलडमरूमध्य पार करना चाहते हैं, तो उन्हें बिटकॉइन या टेदर जैसी क्रिप्टोकरेंसी में फीस देनी होगी।
तनाव के बीच ‘डिजिटल जाल’ का विस्तार
United States और Iran के बीच जारी तनाव ने हालात को और जटिल बना दिया है। एक ओर जहां अमेरिकी पक्ष ने ईरानी बंदरगाहों पर दबाव बढ़ाया है, वहीं ईरान समय-समय पर इस जलमार्ग पर नियंत्रण के संकेत देता रहा है। इसी अनिश्चित माहौल में ठगों ने अवसर तलाश लिया है।
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फर्जी संदेशों में दावा किया जा रहा है कि “ईरानी सुरक्षा एजेंसियां” पहले जहाज का मूल्यांकन करेंगी और फिर एक निश्चित क्रिप्टो शुल्क लेने के बाद उसे बिना किसी बाधा के आगे बढ़ने दिया जाएगा। यह पूरा प्रक्रिया आधिकारिक दिखाने की कोशिश की जा रही है, जिससे कंपनियां भ्रमित हो जाएं।
जहाजों और नाविकों पर बढ़ता खतरा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र में सैकड़ों जहाज फंसे हुए हैं और करीब 20,000 नाविक अनिश्चितता के माहौल में काम कर रहे हैं। ऐसे में जब वैध और सत्यापित संचार चैनल सीमित हो जाते हैं, तो इस तरह के फर्जी संदेश अधिक प्रभावी हो जाते हैं।
कुछ मामलों में आशंका जताई गई है कि जहाजों ने इन फर्जी निर्देशों पर भरोसा कर रास्ता बदलने की कोशिश की, जिससे वे और ज्यादा जोखिम में आ गए। हाल ही में एक जहाज पर हमले की घटना के पीछे भी ऐसे भ्रमित करने वाले संदेशों की भूमिका होने की संभावना जताई जा रही है।
साइबर ठगी और जियो-पॉलिटिक्स का खतरनाक संगम
यह घटना इस बात का उदाहरण है कि कैसे पारंपरिक युद्ध और साइबर अपराध अब एक-दूसरे से जुड़ते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संघर्ष वाले क्षेत्रों में सूचना की कमी और अफवाहों का माहौल साइबर अपराधियों के लिए सबसे बड़ा हथियार बन जाता है।
एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ के अनुसार, “ऐसे मामलों में ठग सोशल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, जहां वे भय और अनिश्चितता का फायदा उठाकर लोगों को जल्दी निर्णय लेने पर मजबूर करते हैं। क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि इसे ट्रैक करना मुश्किल होता है।”
सत्यापन की चुनौती और बढ़ती चिंता
हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किन-किन कंपनियों को ये फर्जी संदेश मिले हैं, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आधिकारिक स्तर पर भी इस तरह की किसी फीस या “सेफ पासेज” व्यवस्था की पुष्टि नहीं की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियों को केवल आधिकारिक और प्रमाणित चैनलों पर ही भरोसा करना चाहिए। साथ ही, किसी भी अनजान स्रोत से मिले निर्देशों पर अमल करने से पहले उसकी कई स्तरों पर जांच जरूरी है।
वैश्विक व्यापार पर असर की आशंका
होरमुज़ जलडमरूमध्य का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि यहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। अगर इस तरह की ठगी और असुरक्षा बढ़ती है, तो शिपिंग कंपनियां अतिरिक्त जोखिम लेने से बचेंगी, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
मौजूदा घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि भविष्य के संघर्ष सिर्फ जमीन या समुद्र तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी उनकी गूंज उतनी ही खतरनाक होगी।
