नई दिल्ली। देश में बढ़ते साइबर अपराध के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने अब तक के सबसे बड़े अभियानों में से एक को अंजाम देते हुए ‘ऑपरेशन CyHawk 5.0’ के तहत 916 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दो दिनों तक चले इस व्यापक अभियान में पुलिस ने लगभग ₹700 करोड़ की कथित साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार कार्रवाई का उद्देश्य केवल आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं बल्कि उन संगठित साइबर अपराधी ढांचों को ध्वस्त करना भी था, जो देशभर में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, फ़िशिंग, डिजिटल ठगी और सोशल इंजीनियरिंग आधारित अपराधों को संचालित कर रहे थे।
दिल्ली पुलिस के अनुसार यह अभियान 16 और 17 जून को चलाया गया। इसके लिए सभी जिला पुलिस इकाइयों और साइबर पुलिस स्टेशनों को एक साथ सक्रिय किया गया। कुल 715 से अधिक पुलिस टीमों और 2,500 से अधिक पुलिसकर्मियों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई में भाग लिया। जांच के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 2,500 से अधिक शिकायतों का विश्लेषण किया गया, जिनमें करोड़ों रुपये की ठगी की जानकारी सामने आई थी।
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प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इन शिकायतों से जुड़ी कुल कथित धोखाधड़ी राशि लगभग ₹700 करोड़ तक पहुंचती है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार किए गए कई आरोपियों के तार झारखंड के जामताड़ा और हरियाणा के नूंह जैसे उन क्षेत्रों से जुड़े मिले हैं, जो लंबे समय से साइबर अपराध गतिविधियों के लिए चर्चित रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार इन नेटवर्कों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल संचार और बैंकिंग प्रणालियों का दुरुपयोग कर देशभर में हजारों लोगों को निशाना बनाया।
अभियान के दौरान पुलिस ने कई अवैध कॉल सेंटरों का भी भंडाफोड़ किया, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर लोगों को बैंक अधिकारी, ग्राहक सेवा प्रतिनिधि या अन्य अधिकृत संस्थाओं का प्रतिनिधि बनकर फोन करने के लिए किया जाता था। छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में लैपटॉप, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए। जांचकर्ताओं का मानना है कि इन उपकरणों का उपयोग साइबर अपराधों के संचालन और धन के अवैध हस्तांतरण में किया जाता था।
दिल्ली पुलिस की टीमों ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए 21 राज्यों में अभियान चलाया। इस कार्रवाई से यह भी स्पष्ट हुआ कि साइबर अपराध अब किसी एक शहर या राज्य तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संगठित गिरोह बहु-राज्यीय नेटवर्क के माध्यम से कार्य कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार अभियान के दौरान लगभग 7,000 लोगों को सत्यापन और पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। इसके अलावा करीब 600 लोगों को एहतियाती कार्रवाई के तहत पाबंद किया गया, जबकि लगभग 2,000 लोगों को नोटिस जारी किए गए।
अभियान के दौरान एक चर्चित साइबर धोखाधड़ी मामले की भी जानकारी साझा की गई, जिसमें पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल से जुड़े एक कारोबारी संस्थान को निशाना बनाया गया था। जांच में सामने आया कि कंपनी को भेजी गई एक ZIP फाइल खोलने के बाद उसके सिस्टम में कथित रूप से साइबर घुसपैठ हो गई। इसके बाद अपराधियों ने कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज संपर्क विवरण बदल दिया और खुद को अधिकृत व्यक्ति बताकर कर्मचारियों को धन हस्तांतरित करने के निर्देश दिए। इस धोखाधड़ी में ₹7.86 करोड़ चार अलग-अलग लेनदेन के माध्यम से स्थानांतरित कर दिए गए। पुलिस अब तक लगभग ₹4 करोड़ की राशि फ्रीज करने में सफल रही है।
महत्वपूर्ण साइबर अपराध मामले पर टिप्पणी करते हुए प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि आज के साइबर अपराधी केवल तकनीकी कमजोरियों का ही नहीं बल्कि मानव व्यवहार और भरोसे का भी दुरुपयोग करते हैं। उनके अनुसार ZIP फाइल, मालवेयर, फर्जी पहचान और सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का संयोजन साइबर ठगी को अधिक खतरनाक बनाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी संदिग्ध फाइल, लिंक या भुगतान निर्देश की स्वतंत्र पुष्टि करना अत्यंत आवश्यक है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ऑपरेशन CyHawk 5.0 ने देशभर में सक्रिय कई साइबर अपराध नेटवर्कों को बड़ा झटका दिया है। हालांकि जांच अभी जारी है और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के साथ कई अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों तथा नए खुलासों की संभावना जताई जा रही है। साइबर अपराध के तेजी से बदलते स्वरूप को देखते हुए यह अभियान देश में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
