नई दिल्ली। छह महीने तक के शिशुओं के भोजन में अतिरिक्त चीनी के इस्तेमाल को लेकर खाद्य सुरक्षा नियमों में बड़ा बदलाव हो सकता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने शिशुओं के पोषण से जुड़े नियमों में संशोधन का मसौदा जारी करते हुए इस आयु वर्ग के लिए बनाए जाने वाले खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज मिलाने पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। इसका उद्देश्य जीवन के शुरुआती महीनों में शिशुओं को अतिरिक्त शुगर के सेवन से बचाना और उनके बेहतर पोषण तथा स्वस्थ विकास को बढ़ावा देना है।
प्रस्तावित बदलाव के तहत छह महीने तक के शिशुओं के लिए तैयार किए जाने वाले खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज मिलाने की अनुमति समाप्त करने की योजना है। फिलहाल, मौजूदा नियमों में निर्धारित सीमाओं के भीतर इन दोनों प्रकार की शुगर को शामिल करने की अनुमति है। नए मसौदे में इसी प्रावधान को बदलने का प्रस्ताव रखा गया है।
एफएसएसएआई ने इसके लिए शिशु पोषण संबंधी नियमों में संशोधन का मसौदा तैयार किया है। यह मसौदा 16 अक्टूबर को राजपत्र में प्रकाशित किया गया। हालांकि, प्रस्तावित बदलाव अभी अंतिम नियम नहीं बने हैं। प्राधिकरण ने संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। इन पर विचार करने के बाद ही संशोधित प्रावधानों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
शिशुओं के खाद्य उत्पादों पर पड़ेगा सीधा असर
प्रस्तावित संशोधन का प्रमुख पहलू छह महीने तक के बच्चों के लिए बनाए जाने वाले खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज के इस्तेमाल से संबंधित है। सुक्रोज और फ्रक्टोज दोनों शर्करा के प्रकार हैं, जिनका उपयोग खाद्य उत्पादों में मिठास बढ़ाने के लिए किया जाता है। वर्तमान नियमों के तहत निर्धारित सीमा के भीतर इनके इस्तेमाल की अनुमति है, लेकिन नए प्रस्ताव में इस छूट को समाप्त करने की बात कही गई है।
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यदि यह प्रस्ताव अंतिम नियमों में शामिल हो जाता है, तो संबंधित खाद्य उत्पादों के निर्माताओं को छह महीने तक के शिशुओं के लिए बनाए जाने वाले उत्पादों में इन दोनों शर्कराओं के इस्तेमाल से जुड़े नियमों का पालन करना होगा। इससे इस आयु वर्ग के लिए तैयार किए जाने वाले खाद्य उत्पादों की संरचना और उनमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर असर पड़ सकता है।
यह प्रस्ताव विशेष रूप से छह महीने तक के शिशुओं के खाद्य उत्पादों से संबंधित है। इसे सभी आयु वर्ग के बच्चों के खाद्य पदार्थों पर लागू होने वाली सामान्य चीनी संबंधी रोक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मसौदे में जिन उत्पादों और प्रावधानों का उल्लेख है, अंतिम नियमों का दायरा भी उसी के अनुरूप स्पष्ट होगा।
जीवन के शुरुआती महीनों में पोषण पर जोर
एफएसएसएआई के इस प्रस्ताव का उद्देश्य शिशुओं को जीवन के शुरुआती छह महीनों में अतिरिक्त शुगर के सेवन से बचाना है। इस अवधि में पोषण को विशेष महत्व दिया जाता है, क्योंकि बच्चे का शारीरिक विकास तेजी से होता है और उसके पोषण से जुड़ी जरूरतें उम्र के अनुसार निर्धारित होती हैं।
प्राधिकरण का प्रस्ताव शिशु आहार में इस्तेमाल होने वाली सामग्री से जुड़े मानकों को संशोधित करने की दिशा में एक कदम है। इसके जरिए छह महीने तक के बच्चों के लिए तैयार खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज के इस्तेमाल को लेकर मौजूदा व्यवस्था में बदलाव करने की योजना है।
हालांकि, मसौदे में प्रस्तावित बदलावों को अंतिम नियमों के रूप में लागू मानना अभी उचित नहीं होगा। इस प्रक्रिया में संबंधित पक्षों की राय और आपत्तियों पर विचार किया जाना बाकी है। अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संशोधित नियम किस रूप में लागू होंगे और संबंधित उत्पादों के लिए अनुपालन की क्या शर्तें निर्धारित की जाएंगी।
60 दिन में दे सकेंगे सुझाव और आपत्तियां
एफएसएसएआई ने मसौदे पर 60 दिन के भीतर सुझाव और आपत्तियां देने का अवसर दिया है। संबंधित पक्ष इस अवधि में प्रस्तावित संशोधनों पर अपनी राय प्राधिकरण के समक्ष रख सकते हैं। सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा के बाद प्राधिकरण नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।
इसका मतलब है कि फिलहाल छह महीने तक के शिशुओं के खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज के इस्तेमाल पर प्रस्तावित रोक नियामकीय प्रक्रिया के चरण में है। मौजूदा नियमों के तहत निर्धारित सीमा के भीतर इन शर्कराओं के इस्तेमाल की अनुमति बनी हुई है। प्रस्ताव को अंतिम रूप दिए जाने और नए प्रावधान लागू होने के बाद ही इस व्यवस्था में बदलाव होगा।
यह संशोधन शिशु पोषण से जुड़े खाद्य सुरक्षा मानकों में संभावित बदलाव के लिहाज से महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में मसौदे पर मिलने वाली प्रतिक्रियाओं और अंतिम अधिसूचना से तय होगा कि छह महीने तक के शिशुओं के खाद्य उत्पादों में इन दोनों शर्कराओं के इस्तेमाल को लेकर नई व्यवस्था किस तरह लागू की जाएगी।
