नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली की साइबर पुलिस ने फर्जी जासूसी एजेंसी के नाम पर कथित ठगी करने वाले मां-बेटे को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, दोनों ‘SleuthIndia.com’ नाम की वेबसाइट संचालित कर लोगों को जासूसी सेवा उपलब्ध कराने का झांसा देते थे। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान गाजियाबाद की मिगसन रूफ सोसायटी निवासी पूनम सिंह और उसके बेटे अर्नव सिंह के रूप में हुई है। पुलिस ने उनके कब्जे से एक लैपटॉप और दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
मामला उस समय सामने आया जब भानू प्रताप सिंह ने साइबर थाने में ऑनलाइन ठगी की शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता के अनुसार, वह ऑनलाइन जासूसी सेवा की तलाश कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें ‘SleuthIndia.com’ नाम की वेबसाइट मिली। वेबसाइट पर उपलब्ध मोबाइल नंबर के जरिए संपर्क करने पर कथित तौर पर उन्हें जासूसी सेवा उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया।
शिकायत के अनुसार, सेवा उपलब्ध कराने के नाम पर उनसे करीब ₹1.15 लाख का ऑनलाइन भुगतान कराया गया। भुगतान के बाद कथित तौर पर जासूसी सेवा उपलब्ध नहीं कराई गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और भुगतान से जुड़े बैंक खातों समेत वेबसाइट के तकनीकी ढांचे की पड़ताल की।
जांच में पुलिस को पता चला कि शिकायत से संबंधित रकम कथित तौर पर पूनम सिंह के बैंक खाते में पहुंची थी। इसके बाद रकम अलग-अलग खातों में स्थानांतरित किए जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने के लिए संबंधित बैंक खातों और धन के हस्तांतरण की जानकारी का विश्लेषण किया।
जांच के दौरान पुलिस ने वेबसाइट से जुड़े तकनीकी विवरण भी खंगाले। इसमें वेबसाइट का तकनीकी ढांचा, उससे जुड़े मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी और संचार से संबंधित जानकारी शामिल थी। पुलिस ने इन डिजिटल और वित्तीय सुरागों को आपस में जोड़कर आरोपितों तक पहुंचने का प्रयास किया।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
पुलिस के मुताबिक, तकनीकी और वित्तीय जांच के आधार पर आरोपितों की लोकेशन गाजियाबाद स्थित मिगसन रूफ सोसायटी में मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने वहां कार्रवाई कर अर्नव सिंह को गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि अर्नव से पूछताछ के बाद उसकी निशानदेही पर उसकी मां पूनम सिंह को भी गिरफ्तार किया गया।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित फर्जी जासूसी एजेंसी के जरिए कितने लोगों से संपर्क किया गया और कितने लोगों से रकम ली गई। पुलिस वेबसाइट पर उपलब्ध संपर्क विवरण, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल संचार के जरिए संभावित अन्य पीड़ितों की जानकारी जुटा रही है।
मामले में यह भी जांच की जा रही है कि वेबसाइट कब से संचालित थी और इसके जरिए जासूसी सेवाओं के नाम पर किस तरह के प्रस्ताव लोगों को दिए जाते थे। पुलिस वित्तीय लेनदेन की कड़ियों के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि शिकायतकर्ता से प्राप्त रकम के अलावा और कितनी धनराशि कथित तौर पर अलग-अलग खातों में भेजी गई।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, पूनम सिंह के खिलाफ वर्ष 2023 में भी धोखाधड़ी का एक मामला दर्ज हुआ था और उस मामले में उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। मौजूदा मामले की जांच में पुलिस उसके पुराने मामले और वर्तमान आरोपों के बीच किसी संभावित संबंध की भी पड़ताल कर रही है।
फिलहाल पुलिस बरामद लैपटॉप और दोनों मोबाइल फोन से डिजिटल साक्ष्य जुटा रही है। इन उपकरणों में वेबसाइट के संचालन, संभावित पीड़ितों से बातचीत, भुगतान और रकम के हस्तांतरण से संबंधित जानकारी मिलने की उम्मीद है। पुलिस का कहना है कि विस्तृत जांच के बाद ही कथित ठगी के कुल मामलों और रकम का पता चल सकेगा।
