दिल्ली क्राइम ब्रांच ने भागीरथ पैलेस सप्लाई चेन से 513 किलो प्रतिबंधित दवाओं की ₹5 करोड़ खेप जब्त; मनोज व तौहीद गिरफ्तार।

₹5 करोड़ की प्रतिबंधित दवाओं के साथ सप्लाई चेन का भंडाफोड़, दो गिरफ्तार

Team The420
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राजधानी में प्रतिबंधित नशीली दवाओं की तस्करी के एक संगठित नेटवर्क का खुलासा करते हुए क्राइम ब्रांच ने 513 किलो से अधिक प्रतिबंधित दवाएं जब्त कर दो सप्लायरों को गिरफ्तार किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बरामद दवाओं की कीमत करीब ₹5 करोड़ आंकी गई है। मामले में रोहतक निवासी मनोज कुमार उर्फ मनु और बिहार के किशनगंज निवासी तौहीद आलम उर्फ अयान को गिरफ्तार किया गया है, जबकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, जब्त दवाओं में ट्रामाडोल, नाइट्रोज़ेप, अल्प्राज़ोलम और ज़ोलपिडेम शामिल हैं, जिन्हें नशीली श्रेणी की दवाओं में रखा गया है और इनके भंडारण, परिवहन व बिक्री के लिए विशेष लाइसेंस अनिवार्य होता है। पुलिस का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में इन दवाओं की बरामदगी राजधानी में अवैध फार्मास्यूटिकल तस्करी के एक बड़े चैनल की ओर इशारा करती है।

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कार्रवाई खुफिया सूचना के आधार पर की गई। पुलिस को पता चला था कि चांदनी चौक क्षेत्र के भागीरथ पैलेस मार्केट से प्रतिबंधित दवाओं की सप्लाई हो रही है। इसके बाद टीम ने जाल बिछाया और डिस्पेंसरी के पास एक संदिग्ध को उस समय दबोच लिया, जब वह अल्प्राज़ोलम की खेप लेकर सप्लाई के लिए जा रहा था। तलाशी के दौरान उसके बैग से 19,200 अल्प्राज़ोलम टैबलेट बरामद हुईं। पूछताछ में उसकी पहचान मनोज कुमार उर्फ मनु के रूप में हुई।

जांच में मनोज ने खुलासा किया कि वह पिछले करीब तीन वर्षों से प्रतिबंधित दवाओं की सप्लाई कर रहा था और माल उसे तौहीद आलम उपलब्ध कराता था। इसके आधार पर पुलिस ने दरियागंज इलाके में छापा मारकर तौहीद को गिरफ्तार किया। उसके किराए के मकान से भी अल्प्राज़ोलम की बड़ी खेप बरामद हुई। बाद में दोनों की निशानदेही पर अलग-अलग स्थानों से कुल 513 किलो प्रतिबंधित दवाएं जब्त की गईं।

नेटवर्क का विस्तार व जांच

पुलिस सूत्रों के अनुसार, मनोज पहले एक मेडिकल स्टोर पर काम करता था, जहां से उसे फार्मास्यूटिकल सप्लाई चेन, स्टॉक मैनेजमेंट और दवाओं की अवैध निकासी के तरीकों की जानकारी मिली। इसी अनुभव का इस्तेमाल करते हुए उसने प्रतिबंधित दवाओं की तस्करी शुरू की और बाद में तौहीद के साथ मिलकर एक स्थायी सप्लाई नेटवर्क खड़ा कर लिया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि भागीरथ पैलेस से दवाएं लेकर इन्हें रोहतक और आसपास के इलाकों में सप्लाई किया जाता था, जबकि कुछ खेप अन्य राज्यों में भेजने की भी तैयारी थी। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि दवाएं मूल रूप से किन लाइसेंसधारी थोक विक्रेताओं या फार्मा डिस्ट्रीब्यूटर्स से अवैध तरीके से हासिल की गईं।

मामले में संबंधित ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। जब्त दवाओं के सैंपल फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं, ताकि उनकी संरचना, बैच नंबर और निर्माण स्रोत की पुष्टि की जा सके। इससे सप्लाई चेन में शामिल अन्य कड़ियों तक पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है।

जांच एजेंसियां अब भागीरथ पैलेस मार्केट में संचालित कुछ संदिग्ध फार्मा दुकानों और गोदामों की भूमिका भी खंगाल रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि लाइसेंसधारी स्टॉक की आड़ में प्रतिबंधित दवाओं की अवैध निकासी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

पुलिस का दावा है कि इस कार्रवाई से प्रतिबंधित फार्मास्यूटिकल तस्करी के एक बड़े नेटवर्क को झटका लगा है। हालांकि, सप्लाई चेन के अंतिम खरीदारों, वित्तीय लेनदेन और संभावित अंतरराज्यीय लिंक की जांच अभी जारी है। आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है।

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