Dehradun में डेबिट कार्ड बदलकर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का खुलासा हुआ है। वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस ने एक कार से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 66 अलग-अलग बैंकों के एटीएम कार्ड, तीन मोबाइल फोन और एक कार बरामद की है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह गिरोह लंबे समय से विभिन्न शहरों में लोगों को निशाना बना रहा था।
घटना 20 अप्रैल 2026 की बताई जा रही है, जब स्थानीय टीम क्षेत्र में नियमित जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि एक सफेद कार में सवार कुछ लोग एटीएम कार्ड बदलकर ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं और सेलाकुई की ओर से शहर में प्रवेश करने वाले हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए टीम ने घेराबंदी की और संदिग्ध वाहन को रोक लिया।
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तलाशी के दौरान कार में बैठे तीनों व्यक्तियों के पास से कुल 66 एटीएम कार्ड बरामद हुए, जो अलग-अलग बैंकों के बताए जा रहे हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इमरान अली (गाजियाबाद), नसीरुद्दीन (दिल्ली) और मोहम्मद खालिद (गाजियाबाद) के रूप में हुई है। पूछताछ में सामने आया कि तीनों मिलकर सुनियोजित तरीके से एटीएम बूथों पर लोगों को निशाना बनाते थे।
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी खासतौर पर बुजुर्गों और ऐसे लोगों को टारगेट करते थे, जिन्हें डिजिटल बैंकिंग की सीमित जानकारी होती है। ये लोग एटीएम बूथ पर खड़े होकर मदद का प्रस्ताव देते थे और पिन डालने की प्रक्रिया में चालाकी से कार्ड बदल लेते थे। इसके बाद असली कार्ड अपने पास रखकर पीड़ित के खाते से पैसे निकाल लेते थे। कई मामलों में वे पिन भी चुपके से देख लेते थे, जिससे खातों से रकम निकालना उनके लिए आसान हो जाता था।
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने यह भी संकेत दिया है कि वे अकेले काम नहीं कर रहे थे, बल्कि एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं। इस नेटवर्क में अलग-अलग शहरों में सक्रिय सदस्य शामिल होने की आशंका जताई जा रही है, जो इसी तरह की वारदातों को अंजाम देते हैं। बरामद मोबाइल फोन की जांच के जरिए संपर्कों और लेन-देन की जानकारी जुटाई जा रही है।
मामले में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बरामद किए गए सभी कार्ड और अन्य सामान को सील कर लिया गया है और आरोपियों को न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया चल रही है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपियों ने किन-किन राज्यों और शहरों में इस तरह की ठगी को अंजाम दिया और उनके गिरोह में और कौन-कौन शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एटीएम कार्ड स्वैपिंग जैसे अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और इनका शिकार अक्सर वे लोग बनते हैं, जो जल्दबाजी या भरोसे में आकर किसी अनजान व्यक्ति से मदद ले लेते हैं। प्रख्यात साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी Prof. Triveni Singh का कहना है, “ऐसे अपराधों में तकनीक से ज्यादा इंसानी व्यवहार का फायदा उठाया जाता है। अपराधी पहले भरोसा जीतते हैं और फिर मौके का फायदा उठाकर धोखाधड़ी करते हैं। एटीएम का उपयोग करते समय किसी भी अनजान व्यक्ति से मदद लेना जोखिम भरा हो सकता है।”
यह घटना एक बार फिर यह संकेत देती है कि डिजिटल और बैंकिंग सुरक्षा को लेकर सतर्कता बेहद जरूरी है। एटीएम का उपयोग करते समय सावधानी बरतना, पिन गोपनीय रखना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत बैंक या संबंधित हेल्पलाइन को सूचित करना ही ऐसे अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका माना जा रहा है।
