नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम। नागरिकों तक आपदा और आपातकालीन चेतावनियां तुरंत पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई केंद्र सरकार की सेल ब्रॉडकास्ट सेवा (CBS) को फिलहाल अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। 12 जून से प्रभावी इस निर्णय के पीछे तकनीकी और परिचालन संबंधी कुछ चिंताएं बताई जा रही हैं, जिनके सामने आने के बाद सरकार ने पूरे तंत्र की समीक्षा शुरू कर दी है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा जारी एक आदेश में कहा गया कि सक्षम प्राधिकरणों द्वारा कुछ मुद्दे चिन्हित किए गए हैं, जिसके चलते सेल ब्रॉडकास्ट सेवा को अगले आदेश तक स्थगित रखा जाएगा। हालांकि आदेश में इन समस्याओं का विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया, लेकिन सूत्रों के अनुसार आधी रात को एक आपदा अलर्ट कथित रूप से प्रधानमंत्री के संपर्क नंबर तक पहुंचने की घटना ने इस प्रणाली की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े कर दिए।
सूत्रों का कहना है कि यह अलर्ट आपदा प्रबंधन इकाइयों की ओर से जारी हुआ था और इसके कारण मोबाइल फोन में तेज चेतावनी ध्वनि सक्रिय हो गई। सेल ब्रॉडकास्ट प्रणाली को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह कई सामान्य मोबाइल सेटिंग्स को दरकिनार करते हुए आपातकालीन संदेश सीधे उपयोगकर्ताओं तक पहुंचा सके। बताया जा रहा है कि उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों से जारी चेतावनी संदेश ऐसे संपर्क नंबरों तक भी पहुंच गए, जिन्हें सामान्यतः इस तरह की सेवाओं से बाहर रखा जाता है। इससे संदेशों की रूटिंग और नियंत्रण व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गईं।
केंद्र सरकार ने 2 मई को इस आधुनिक आपदा संचार प्रणाली की शुरुआत की थी। दूरसंचार विभाग और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से विकसित इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, अत्यधिक मौसम संबंधी घटनाओं और अन्य आपात स्थितियों के दौरान नागरिकों तक वास्तविक समय के करीब चेतावनियां पहुंचाना था।
पारंपरिक एसएमएस प्रणाली के विपरीत, सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में मौजूद सभी संगत मोबाइल उपकरणों तक एक साथ संदेश पहुंचाती है। इससे लाखों लोगों तक कुछ ही सेकंड में चेतावनी पहुंचाई जा सकती है और नेटवर्क पर अत्यधिक दबाव पड़ने की स्थिति में भी संदेश वितरण प्रभावित नहीं होता। इसी कारण इसे सार्वजनिक सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्रगति माना जा रहा है।
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सेवा शुरू होने के बाद इसका उपयोग विभिन्न राज्यों में व्यापक रूप से किया गया। आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने 19 से अधिक भारतीय भाषाओं में चेतावनी संदेश प्रसारित किए, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक स्थानीय भाषा में महत्वपूर्ण जानकारी पहुंच सकी। बहुभाषी क्षमता को इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक माना गया।
केरल में यह सेवा 6 जून से शुरू हुई थी और इसके माध्यम से मलयालम भाषा में स्थान-आधारित चेतावनियां सीधे मोबाइल फोन पर भेजी गई थीं। राज्य में रेड अलर्ट और लगातार ऑरेंज अलर्ट जैसी परिस्थितियों के दौरान भी इस प्रणाली का उपयोग किया गया। स्थानीय अधिकारियों ने इसे आपदा तैयारी और जनसुरक्षा के लिए एक प्रभावी उपकरण बताया था।
विशेषज्ञों के अनुसार सेल ब्रॉडकास्ट प्रणाली पारंपरिक मैसेजिंग सेवाओं से अलग है क्योंकि यह मोबाइल नेटवर्क के स्तर पर काम करती है और अधिकांश नए स्मार्टफोन में डिफॉल्ट रूप से सक्रिय रहती है। इसके कारण उपयोगकर्ताओं को किसी अतिरिक्त ऐप या सदस्यता की आवश्यकता नहीं होती। दुनिया के कई देशों में यह तकनीक आपदा चेतावनी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
हालांकि सेवा के अस्थायी निलंबन ने आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों के बीच चिंता पैदा कर दी है। उनका मानना है कि जब लोग किसी चेतावनी प्रणाली पर भरोसा करने लगते हैं, तब उसका अचानक बंद होना भविष्य की आपात स्थितियों में भ्रम और अनिश्चितता पैदा कर सकता है।
फिलहाल सरकार इस पूरे तंत्र के तकनीकी और परिचालन पहलुओं की समीक्षा कर रही है। माना जा रहा है कि संदेश प्रमाणीकरण, रूटिंग नियंत्रण और संवेदनशील संपर्कों के लिए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। समीक्षा पूरी होने के बाद ही सेवा को दोबारा शुरू करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
