कोलकाता। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) को कथित रूप से ₹191 करोड़ के नुकसान से जुड़े बैंक फ्रॉड मामलों में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में 8 स्थानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई तीन अलग-अलग कंपनियों से जुड़े मामलों में की गई है, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं और बैंक लोन के दुरुपयोग की जांच की जा रही है।
सीबीआई के अनुसार, यह तलाशी अभियान 17 जून को चलाया गया और इसका संबंध तीन कंपनियों—तांतिया कंस्ट्रक्शन लिमिटेड, ब्रह्म अलॉयज लिमिटेड और अमृत फीड्स लिमिटेड—से है। एजेंसी ने इन कंपनियों से जुड़े निदेशकों के आवासीय परिसरों को भी जांच के दायरे में लिया।
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छापेमारी के दौरान सीबीआई टीमों ने कई अहम दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए हैं, जिन्हें अब जांच के लिए खंगाला जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि ये दस्तावेज फंड के प्रवाह, लोन की मंजूरी प्रक्रिया और उसके बाद हुए लेन-देन को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इन मामलों में करीब ₹191 करोड़ की कथित वित्तीय हानि पंजाब नेशनल बैंक को हुई है, जो देश के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से एक है। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि क्या लोन राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के बजाय किसी अन्य दिशा में किया गया या फिर उसमें किसी तरह की हेराफेरी हुई।
सूत्रों के मुताबिक, तीनों मामले अलग-अलग दर्ज किए गए हैं, लेकिन इनमें कुछ समान पैटर्न और संभावित वित्तीय लिंक की भी जांच की जा रही है। सीबीआई यह भी देख रही है कि क्या कंपनियों द्वारा बैंक को गलत वित्तीय जानकारी देकर लोन प्राप्त किया गया था या वित्तीय स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था।
एजेंसी वर्तमान में वित्तीय रिकॉर्ड, लोन दस्तावेज और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री की गहन जांच कर रही है, ताकि फंड के वास्तविक उपयोग और संभावित डायवर्जन का पता लगाया जा सके। इसके लिए फॉरेंसिक ऑडिट और डिजिटल रिकॉर्ड की भी मदद ली जा रही है।
हालांकि, अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच शुरुआती चरण में है और आगे की कार्रवाई जब्त दस्तावेजों के विश्लेषण और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ के आधार पर की जाएगी।
बैंक फ्रॉड मामलों में आमतौर पर क्रेडिट अप्रेज़ल, लोन स्वीकृति प्रक्रिया और लोन के बाद निगरानी तंत्र की विस्तृत जांच की जाती है। जांच एजेंसियां यह भी देखती हैं कि क्या लोन मंजूरी के दौरान उचित ड्यू डिलिजेंस किया गया था या नहीं।
सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि फॉरेंसिक विशेषज्ञों और वित्तीय जांच टीमों की मदद से पूरे मामले की बारीकी से जांच की जा रही है। डिजिटल डेटा का विश्लेषण भी किया जाएगा ताकि किसी तरह की हेराफेरी या छिपी हुई वित्तीय देनदारियों का पता लगाया जा सके।
पंजाब नेशनल बैंक, जो पहले भी कई बड़े बैंक घोटालों से जुड़ा रहा है, इस जांच में एजेंसी के साथ पूरा सहयोग कर रहा है। बैंक की ओर से आवश्यक दस्तावेज और आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट भी जांच टीम को उपलब्ध कराई जा सकती है।
अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और भी ठिकानों पर छापेमारी हो सकती है। फिलहाल एजेंसी का पूरा ध्यान कोलकाता में हुई छापेमारी से मिले सबूतों के विश्लेषण पर केंद्रित है।
यह मामला देश में बड़े बैंकिंग घोटालों की बढ़ती जांचों की कड़ी में एक और उदाहरण माना जा रहा है, जो कॉरपोरेट लोन सिस्टम में जोखिम और अनुपालन से जुड़ी चुनौतियों को फिर उजागर करता है।
