बिलासपुर में चोरी की SUV को फर्जी RC और गलत दस्तावेजों के साथ बेचकर ₹14 लाख की ठगी करने के आरोप में व्यापारी जांच के घेरे में

₹14 लाख की ठगी: चोरी की SUV को फर्जी RC के साथ बेचकर व्यापारी ने रचा बड़ा खेल

Team The420
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बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में सेकेंड-हैंड कार खरीदने के नाम पर ₹14 लाख की ठगी का मामला सामने आया है, जहां एक स्थानीय वाहन व्यापारी पर चोरी की गाड़ी को फर्जी दस्तावेजों के साथ बेचने का आरोप लगा है। मामले ने इलाके में वाहन खरीद-फरोख्त के कारोबार पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर उन सौदों पर जो बिना पर्याप्त सत्यापन के किए जाते हैं।

शिकायत के मुताबिक, घुमारवीं निवासी अशोक कुमार ने दिसंबर 2025 में एक काले रंग की SUV खरीदने के लिए आरोपी अराफात हुसैन से संपर्क किया। आरोपी सेकेंड-हैंड वाहनों की खरीद-बिक्री का कारोबार करता है और स्थानीय स्तर पर सक्रिय था। दोनों के बीच ₹14 लाख में सौदा तय हुआ, जिसके बाद खरीदार ने किस्तों में भुगतान की प्रक्रिया शुरू की।

कैसे रचा गया फर्जीवाड़े का पूरा जाल

शिकायत में बताया गया है कि 28 दिसंबर 2025 को अशोक कुमार ने अपने एक परिचित की मौजूदगी में आरोपी को ₹3 लाख नकद दिए। इसके बाद शेष राशि के लिए उसने बैंक से वाहन ऋण लिया। खरीदार ने ₹11.50 लाख का लोन लिया, जिसमें से ₹10.50 लाख आरोपी द्वारा दिए गए बैंक खाते में 13 जनवरी 2026 को ट्रांसफर किए गए।

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आरोप है कि वाहन सौंपते समय आरोपी ने गाड़ी के साथ फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC), गलत चेसिस नंबर और इंजन नंबर दिए। साथ ही वाहन पर लगा नंबर प्लेट भी असली नहीं था। पहली नजर में दस्तावेज वैध प्रतीत होते थे, जिससे खरीदार को किसी तरह का संदेह नहीं हुआ।

जांच में खुला बड़ा राज, निकली चोरी की गाड़ी

मामले का खुलासा तब हुआ जब वाहन से संबंधित जानकारी की जांच की गई। जांच में सामने आया कि जिस SUV को बेचा गया था, वह पहले से ही चोरी की थी और उसका मामला पंजाब के अमृतसर में दर्ज है। यह जानकारी सामने आते ही पूरे सौदे पर सवाल खड़े हो गए और खरीदार को ठगी का एहसास हुआ।

जैसे ही सच्चाई सामने आई, पीड़ित ने स्थानीय पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है।

संगठित गिरोह की आशंका, जांच जारी

प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस तरह की धोखाधड़ी किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकती। सेकेंड-हैंड वाहन बाजार में फर्जी दस्तावेजों के जरिए चोरी की गाड़ियां बेचने का यह तरीका पहले भी सामने आता रहा है, जिससे संगठित नेटवर्क की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपी ने वाहन कहां से हासिल किया और क्या इसमें अन्य लोगों की भी संलिप्तता है। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने के पीछे कोई बड़ा रैकेट तो सक्रिय नहीं है।

खरीदारों के लिए चेतावनी, बरतें सावधानी

इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि सेकेंड-हैंड वाहन खरीदते समय पूरी सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी वाहन को खरीदने से पहले उसके दस्तावेजों की आधिकारिक पोर्टल पर जांच करनी चाहिए और चेसिस व इंजन नंबर का भौतिक सत्यापन भी जरूरी है।

बैंक लोन के जरिए खरीदारी करने पर भी केवल दस्तावेजों के आधार पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है, जैसा कि इस मामले में देखा गया। खरीदारों को सलाह दी जाती है कि वे अधिकृत डीलरों या विश्वसनीय स्रोतों से ही वाहन खरीदें।

स्थानीय बाजार में बढ़ी चिंता

इस घटना के बाद बिलासपुर के सेकेंड-हैंड वाहन बाजार में चिंता का माहौल है। कई खरीदार अब पुराने सौदों की भी दोबारा जांच करने की सोच रहे हैं। व्यापारियों के बीच भी भरोसे का संकट गहराता नजर आ रहा है।

मौजूदा मामला यह दिखाता है कि डिजिटल और दस्तावेजी धोखाधड़ी अब पारंपरिक बाजारों में भी तेजी से फैल रही है। ऐसे में जागरूकता और सख्त जांच ही इस तरह के अपराधों से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।

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