फिंगरप्रिंट मिसमैच से सामने आया भर्ती घोटाला, 563 आरोपियों पर दर्ज केस; परीक्षा पास कराने के लिए प्रतिरूपण और संगठित नेटवर्क का इस्तेमाल

बिहार कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा: अरवल-मुंगेर से 10 गिरफ्तार, बायोमेट्रिक जांच में खुली सॉल्वर गैंग की पोल

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By Roopa
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पटना। बिहार कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में कथित धांधली और प्रतिरूपण (इम्पर्सोनेशन) के एक बड़े मामले में पुलिस ने अरवल और मुंगेर जिलों से 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती), बिहार द्वारा आयोजित भर्ती प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं की जांच के बाद की गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि प्रारंभिक पड़ताल में एक सुनियोजित नेटवर्क के जरिए अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा में अवैध रूप से सफल कराने की साजिश के संकेत मिले हैं।

मामले का खुलासा उस समय हुआ जब भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण, यानी शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) के दौरान बायोमेट्रिक सत्यापन किया गया। जांच के दौरान कई अभ्यर्थियों के फिंगरप्रिंट और पहचान संबंधी रिकॉर्ड में विसंगतियां पाई गईं। बायोमेट्रिक डेटा में मिले अंतर ने अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया, जिसके बाद पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू की गई।

जांच में सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों की ओर से कथित तौर पर दूसरे व्यक्तियों को लिखित परीक्षा में बैठाया गया था। ऐसे मामलों में तथाकथित “सॉल्वर” या “स्कॉलर” गिरोह की भूमिका की आशंका जताई जा रही है, जो पैसे लेकर उम्मीदवारों की जगह परीक्षा देने का काम करते हैं। पुलिस को संदेह है कि परीक्षा में सफलता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिरूपण और अन्य धोखाधड़ी के तरीकों का इस्तेमाल किया गया।

जांच के आधार पर सचिवालय थाना में 563 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। चूंकि संदिग्ध विभिन्न जिलों से संबंधित हैं, इसलिए पुलिस ने विशेष टीमों का गठन कर राज्य के अलग-अलग हिस्सों में छापेमारी अभियान शुरू किया। इसी क्रम में अरवल और मुंगेर से 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में कुछ अभ्यर्थी बताए जा रहे हैं, जबकि अन्य पर उनके स्थान पर परीक्षा देने या फर्जीवाड़े में सहयोग करने का आरोप है।

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पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार किए गए सभी व्यक्तियों की भूमिका की विस्तृत जांच की जा रही है। जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि भर्ती परीक्षा में धांधली का नेटवर्क कितना व्यापक था और इसमें किन-किन लोगों की संलिप्तता रही। अब तक की कार्रवाई में कुल 88 लोगों के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जा चुके हैं, जबकि शेष आरोपियों की तलाश जारी है।

सूत्रों के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया में तकनीकी सत्यापन प्रणाली ने इस फर्जीवाड़े को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लिखित परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान दर्ज बायोमेट्रिक रिकॉर्ड का मिलान किए जाने पर कई मामलों में पहचान संबंधी गड़बड़ियां सामने आईं। इसके बाद अभ्यर्थियों के दस्तावेजों, परीक्षा रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की गहन जांच की गई, जिससे कथित धोखाधड़ी के कई सुराग मिले।

भर्ती परीक्षाओं में इस तरह की घटनाएं प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय मानी जा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी नौकरियों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का फायदा उठाकर संगठित गिरोह अभ्यर्थियों को शॉर्टकट का लालच देते हैं और भारी रकम लेकर परीक्षा प्रणाली को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं। हालांकि बायोमेट्रिक सत्यापन, डिजिटल निगरानी और डेटा विश्लेषण जैसी आधुनिक तकनीकों ने ऐसे नेटवर्क की पहचान करना पहले की तुलना में अधिक आसान बना दिया है।

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन, संपर्क सूत्रों और कथित सॉल्वर नेटवर्क के अन्य सदस्यों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि पूरे नेटवर्क का खुलासा होने के बाद भर्ती परीक्षा में धांधली के इस मामले से जुड़े कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल गिरफ्तार सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

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