वाराणसी में फर्जी APK फाइल इंस्टॉल कराकर साइबर अपराधियों ने मोबाइल फोन का एक्सेस हासिल किया और क्रेडिट कार्ड से ₹6.31 लाख की ठगी की।

भदोही में ₹50 करोड़ साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश: फर्जी फर्म और म्यूल अकाउंट नेटवर्क से देशभर में ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार

Team The420
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जिले में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने लगभग ₹50 करोड़ की ठगी करने वाले एक संगठित साइबर फ्रॉड रैकेट का खुलासा किया है। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्य अभी फरार बताए जा रहे हैं। जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, शेल कंपनियों और म्यूल बैंक खातों के जरिए देशभर में लोगों से ठगी कर रहा था।

जानकारी के अनुसार, भदोही पुलिस ने नंदापुर निवासी मन्नू सिंह और चकसिखारी निवासी ओमप्रकाश गौतम को बनकट छनौरा क्षेत्र से गिरफ्तार किया। दोनों पर आरोप है कि वे एक संगठित साइबर गिरोह का हिस्सा थे, जो फर्जी निवेश वेबसाइट और सोशल मीडिया ग्रुप के माध्यम से लोगों को कम समय में अधिक मुनाफे का लालच देकर धोखाधड़ी करता था।

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पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों का नेटवर्क केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि देशभर में फैला हुआ था। एनसीआरपी (National Cyber Crime Reporting Portal) पर इस गिरोह के खिलाफ 100 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं, जो विभिन्न राज्यों से संबंधित हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि गिरोह का संबंध बिहार में सामने आए ₹32 करोड़ के एनएचएआई घोटाले से भी जुड़ सकता है, जिसकी जांच ईडी पटना कर रही है।

अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह “FISD PRO” नाम की एक फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट के जरिए निवेशकों को आकर्षित करता था। व्हाट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप बनाकर लोगों को उच्च रिटर्न का भरोसा दिलाया जाता था। इसके बाद निवेश के नाम पर धनराशि म्यूल खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी और बाद में उसे अलग-अलग खातों में घुमा दिया जाता था ताकि पैसों का स्रोत छुपाया जा सके।

पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने 50 से अधिक फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल किया, जिनके माध्यम से ठगी की रकम को देशभर में ट्रांसफर किया गया। इन खातों से जुड़े लगभग ₹30 लाख की रकम को फिलहाल फ्रीज कर दिया गया है। वहीं, कई बैंक खातों में छह दिनों के भीतर ही लाखों रुपये का लेन-देन हुआ, जिससे पूरे नेटवर्क की सक्रियता का अंदाजा लगाया जा रहा है।

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से पांच मोबाइल फोन, सात सिम कार्ड, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और फर्जी पहचान पत्र बरामद किए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अन्य व्यक्तियों के आधार कार्ड पर अपनी तस्वीर लगाकर फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे और इन्हीं के आधार पर बैंक खाते खुलवाते थे।

पुलिस ने बताया कि यह गिरोह बैंकिंग सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर फर्जी कंपनियों के नाम पर करंट और कॉरपोरेट अकाउंट खुलवाता था। इसके बाद इन खातों का उपयोग साइबर ठगी की रकम को घुमाने के लिए किया जाता था।

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी ओमप्रकाश पहले मजदूरी करता था, जबकि मन्नू सिंह की बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान थी। धीरे-धीरे दोनों इस साइबर नेटवर्क से जुड़ गए और ठगी के बड़े ऑपरेशन में शामिल हो गए।

पुलिस ने बताया कि इस नेटवर्क के जरिए प्राप्त धनराशि को विभिन्न राज्यों जैसे बिहार, दिल्ली, हरियाणा, तेलंगाना और केरल में ट्रांसफर किया गया था। कई खातों से जुड़े लेन-देन अब भी जांच के दायरे में हैं।

साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म और म्यूल अकाउंट नेटवर्क का तेजी से फैलना चिंता का विषय है। प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह, पूर्व आईपीएस और प्रसिद्ध साइबर विशेषज्ञ के अनुसार, साइबर ठग सोशल इंजीनियरिंग और उच्च रिटर्न के लालच का इस्तेमाल कर आम लोगों को फंसाते हैं। उनके मुताबिक, जब तक बैंकिंग सत्यापन और डिजिटल निगरानी मजबूत नहीं होगी, तब तक ऐसे नेटवर्क पूरी तरह खत्म करना मुश्किल रहेगा।

पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन निवेश योजना में बिना जांच के पैसा न लगाएं और संदिग्ध लिंक से सतर्क रहें।

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