बेंगलुरु। ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों के बीच एक बार फिर साइबर अपराधियों ने सुनियोजित तरीके से एक वरिष्ठ नागरिक को निशाना बनाया। माधव नगर क्षेत्र की 61 वर्षीय महिला से करीब ₹31.78 लाख की ठगी का मामला सामने आया है, जहां ठगों ने फर्जी इंश्योरेंस क्लेम के नाम पर विश्वास जीतकर बड़ी रकम हड़प ली।
पीड़िता के अनुसार, 27 मार्च की सुबह करीब 11 बजे उन्हें एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को एक बीमा कंपनी से जुड़ा अधिकारी बताया। कॉलर ने दावा किया कि उनके दिवंगत पति के नाम पर ₹63 लाख का एक बीमा क्लेम लंबित है, जिसे जारी कराने के लिए कुछ आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
शुरुआती बातचीत के बाद ठगों ने धीरे-धीरे अपना जाल फैलाया। महिला को अलग-अलग मोबाइल नंबरों से लगातार कॉल आने लगे, जिनमें खुद को कभी कंपनी प्रतिनिधि तो कभी सरकारी अधिकारी बताकर बातचीत की गई। इसके साथ ही, विभिन्न ईमेल आईडी से कथित दस्तावेज भी भेजे गए, जिनमें क्लेम से जुड़े कागजात और आधिकारिक दिखने वाले लेटर शामिल थे।
FCRF Academy Launches Premier Anti-Money Laundering Certification Program
इन दस्तावेजों और लगातार संपर्क के कारण महिला को पूरा मामला वास्तविक प्रतीत हुआ। ठगों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि क्लेम राशि जारी करने के लिए प्रोसेसिंग फीस, टैक्स और अन्य शुल्क जमा करना जरूरी है। इसी बहाने उनसे कई बार अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए गए।
कुल मिलाकर महिला ने ₹31,78,915 की राशि ऑनलाइन माध्यम से ट्रांसफर कर दी। लेकिन जैसे ही पैसे ट्रांसफर हुए, ठगों ने संपर्क तोड़ दिया और सभी नंबर बंद हो गए। खुद को ठगा हुआ महसूस करने के बाद महिला ने संबंधित साइबर अपराध थाने में शिकायत दर्ज कराई।
मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और प्रतिरूपण (इम्पर्सनेशन) की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां बैंक खातों और कॉल डिटेल्स के जरिए आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। साथ ही, ट्रांसफर की गई राशि को ट्रैक कर उसे वापस दिलाने के प्रयास भी जारी हैं।
साइबर अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में ठग बेहद पेशेवर तरीके अपनाते हैं। वे पहले पीड़ित का भरोसा जीतते हैं, फिर चरणबद्ध तरीके से आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं। खासतौर पर वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाना इन गिरोहों की आम रणनीति बनती जा रही है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह कहते हैं, “साइबर ठग अब सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर लोगों की भावनाओं और भरोसे को हथियार बना रहे हैं। वे ऐसी कहानियां गढ़ते हैं, जिनसे व्यक्ति को आर्थिक लाभ की उम्मीद बंधती है, और इसी लालच में लोग सावधानी भूल जाते हैं।”
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि किसी भी अनजान कॉल, ईमेल या संदेश के आधार पर पैसे ट्रांसफर करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। “किसी भी वित्तीय लेन-देन से पहले संबंधित कंपनी या संस्था की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन के जरिए जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है,” उन्होंने कहा।
इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल युग में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। खासतौर पर इंश्योरेंस, लॉटरी, इनाम या सरकारी योजना के नाम पर आने वाले कॉल्स और ईमेल से सावधान रहने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि कोई व्यक्ति इस तरह के झांसे में फंस जाता है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें और निकटतम साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं। समय रहते की गई कार्रवाई से नुकसान की भरपाई की संभावना बढ़ सकती है।
