बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में पहचान संबंधी धोखाधड़ी और बैंकिंग प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं का एक गंभीर मामला सामने आया है। एक निजी बैंक के प्रबंधक और कुछ कर्मचारियों के खिलाफ उस समय मामला दर्ज किया गया, जब एक व्यवसायी ने आरोप लगाया कि उसके आधार और पैन कार्ड की जानकारी का दुरुपयोग कर उसके नाम पर ₹12 लाख का ऋण स्वीकृत कर लिया गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी, पहचान की चोरी, आपराधिक विश्वासघात और साजिश जैसी धाराओं के तहत जांच शुरू कर दी है।
मामले के अनुसार, 45 वर्षीय व्यवसायी मुनिराजू जे. ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि वह जनवरी 2025 में अपनी बेटी के लिए शिक्षा ऋण लेने के उद्देश्य से बैंक की बीटीएम लेआउट शाखा पहुंचे थे। ऋण आवेदन की प्रक्रिया के दौरान बैंक अधिकारियों ने उन्हें बताया कि उनके नाम पर पहले से ही ₹12 लाख का एक ऋण स्वीकृत है, जो कथित रूप से एक क्रेडिट कार्ड से जुड़े खाते के माध्यम से जारी किया गया था। बैंक रिकॉर्ड के अनुसार इस खाते पर ₹1,09,291 की बकाया राशि भी दर्ज थी।
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यह जानकारी सुनकर व्यवसायी हैरान रह गए। उन्होंने बैंक अधिकारियों से उस व्यक्ति का विवरण और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, जिसके आधार पर ऋण स्वीकृत किया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनके आधार और पैन कार्ड की जानकारी का दुरुपयोग करते हुए उनकी जानकारी और सहमति के बिना ऋण प्राप्त कर लिया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि उन्होंने कई बार बैंक प्रबंधन से इस मामले में विस्तृत जानकारी मांगी, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। बाद में उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से 28 अप्रैल 2025 को बैंक को कानूनी नोटिस भी भेजा। इसके बावजूद बैंक प्रबंधन कथित रूप से ऋण लेने वाले व्यक्ति की पूरी जानकारी, आवेदन प्रक्रिया और लेनदेन से जुड़े आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने में विफल रहा।
व्यवसायी ने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी राशि का ऋण बैंक अधिकारियों की लापरवाही या संभावित मिलीभगत के बिना स्वीकृत नहीं किया जा सकता था। उनका कहना है कि यदि पहचान सत्यापन और दस्तावेजों की जांच निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप की गई होती, तो इस प्रकार की धोखाधड़ी संभव नहीं होती। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बैंक ने मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा करने में अनावश्यक देरी की, जिससे संदेह और गहरा हो गया।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने बैंक प्रबंधक और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित ऋण किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत किया गया, दस्तावेजों का सत्यापन कैसे किया गया और क्या बैंक के किसी कर्मचारी ने जानबूझकर नियमों की अनदेखी की। अधिकारियों के अनुसार, बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल दस्तावेज, आवेदन फॉर्म और संबंधित इलेक्ट्रॉनिक डेटा की भी जांच की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि पहचान की चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी के मामले लगातार जटिल होते जा रहे हैं। आधार, पैन और अन्य व्यक्तिगत दस्तावेजों का दुरुपयोग कर ऋण या वित्तीय उत्पाद हासिल करने के मामले डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। ऐसे मामलों में ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग कर वित्तीय संस्थानों को भी नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन ऋण प्रक्रियाओं के विस्तार के साथ पहचान सत्यापन की विश्वसनीयता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे मामलों से न केवल ग्राहकों को आर्थिक और कानूनी परेशानी का सामना करना पड़ता है, बल्कि वित्तीय संस्थानों की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ता है।
फिलहाल पुलिस मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान बैंक अधिकारियों, तकनीकी रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भूमिका का विश्लेषण किया जाएगा। अभी तक किसी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है, लेकिन जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
