बहराइच: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में वस्तु एवं सेवा कर (GST) चोरी का एक बड़ा और संगठित मामला सामने आया है, जिसमें फर्जी फर्मों और कूटरचित बिलों के जरिए करीब ₹10.23 करोड़ की कर चोरी का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों ने इस मामले में दो आरोपियों—शुभम गुप्ता और नेक आलम—को गिरफ्तार किया है, जिन पर फर्जी कंपनियां बनाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का अवैध लाभ उठाने का आरोप है।
प्रारंभिक जांच के मुताबिक, आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से कई बोगस फर्मों का पंजीकरण कराया और इनके माध्यम से कागजों में कारोबार दिखाया। वास्तविक लेनदेन के बिना ही फर्जी बिल तैयार कर GST पोर्टल पर रिटर्न दाखिल किए गए, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा। इस पूरी प्रक्रिया में काल्पनिक व्यापार दिखाकर ITC का लाभ उठाया गया और आगे अन्य कंपनियों को भी इसका फायदा पहुंचाया गया।
फर्जी बिलिंग के जरिए करोड़ों की हेराफेरी
जांच में सामने आया है कि ‘मीना इंटरप्राइजेज’, ‘छैल ट्रेडर्स’ और ‘रतन इंटरप्राइजेज’ जैसी फर्मों के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जी बिल तैयार किए गए। इन बिलों के आधार पर न केवल टैक्स चोरी की गई, बल्कि सिस्टम को धोखा देकर वैध व्यापार का भ्रम भी पैदा किया गया। अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा था, जिसमें कई स्तरों पर कागजी लेनदेन को वास्तविक दिखाने की कोशिश की गई।
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इस घोटाले में इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों में फर्जी पते, नकली पहचान पत्र और बैंक खातों का उपयोग किया गया। आरोपियों ने विभिन्न कंपनियों के बीच काल्पनिक खरीद-बिक्री दिखाकर टैक्स क्रेडिट को आगे पास ऑन किया, जिससे राजस्व को लगातार नुकसान होता रहा।
जांच में सामने आए संगठित नेटवर्क के संकेत
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने जानबूझकर फर्जी कंपनियां बनाईं और उनके जरिए कागजी कारोबार दिखाया। इस नेटवर्क में और भी लोगों के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है, जिनकी पहचान के लिए जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, यह कोई साधारण कर चोरी का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह का हिस्सा है, जो अलग-अलग जिलों में इसी तरह के फर्जी कारोबार के जरिए टैक्स चोरी करता रहा है। जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि इस नेटवर्क का विस्तार कितने राज्यों तक फैला हुआ है और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही है।
गिरफ्तारी के दौरान अहम दस्तावेज बरामद
गिरफ्तारी के समय आरोपियों के पास से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और उपकरण बरामद किए गए हैं, जिनमें फर्जी बिल, लैपटॉप, मोबाइल फोन, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और कई एटीएम कार्ड शामिल हैं। इसके अलावा एक बाइक भी जब्त की गई है, जिसका उपयोग संभवतः नेटवर्क के संचालन में किया जा रहा था।
बरामद किए गए डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है। जांच एजेंसियां इन दस्तावेजों की तकनीकी जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन शामिल हैं।
सरकारी राजस्व को भारी नुकसान
अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरे घोटाले से सरकारी खजाने को ₹10,23,66,540 का नुकसान हुआ है। यह रकम केवल प्रारंभिक जांच में सामने आई है और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, नुकसान का आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की फर्जी बिलिंग और शेल कंपनियों के जरिए टैक्स चोरी करना एक गंभीर आर्थिक अपराध है, जो न केवल सरकारी राजस्व को प्रभावित करता है, बल्कि पूरे टैक्स सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है।
जांच जारी, और गिरफ्तारी की संभावना
फिलहाल मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
यह मामला कर चोरी के बढ़ते जटिल तरीकों और संगठित आर्थिक अपराधों की गंभीरता को उजागर करता है। आने वाले दिनों में इस केस से जुड़े और बड़े खुलासे होने की संभावना है, जिससे पूरे नेटवर्क का पूरी तरह पर्दाफाश हो सकता है।
