अहमदनगर/नासिक: महाराष्ट्र में स्वयंभू बाबा के रूप में पहचान बना चुके अशोक खरात की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उनके खिलाफ ₹1 करोड़ की ठगी का एक और मामला दर्ज किया गया है, जिसके बाद विभिन्न धोखाधड़ी और शोषण से जुड़े मामलों में कुल FIR की संख्या 12 तक पहुंच गई है। ताजा शिकायत नासिक के एक प्याज व्यापारी ने दर्ज कराई है, जिसमें कई वर्षों तक चले कथित धोखे, आर्थिक शोषण और धमकी का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, पूरे घटनाक्रम की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई, जब अशोक खरात ने वृद्धाश्रम बनाने के नाम पर उसे एक जमीन सौदे में शामिल होने के लिए राजी किया। आरोप है कि लगभग ₹22.25 लाख में खरीदी गई इस जमीन की वास्तविक बाजार कीमत ₹60 लाख से अधिक थी, लेकिन इस पर कोई निर्माण नहीं किया गया। बाद में यह जमीन कथित तौर पर खरात की बेटी के नाम पर ट्रांसफर कर दी गई, जिससे सौदे की मंशा पर गंभीर सवाल उठते हैं।
आरोपों के अनुसार, खरात ने शिकायतकर्ता को खेती और अन्य कार्यों के लिए करीब 30 मजदूरों की व्यवस्था करने को कहा और समय पर भुगतान का आश्वासन दिया। हालांकि, मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया, जिससे पीड़ित को लगभग ₹2.5 लाख का नुकसान उठाना पड़ा। इसके अलावा, ₹15,000 में इमली के बीज बेचकर अधिक मुनाफे का लालच दिया गया, जो बाद में पूरी तरह गलत साबित हुआ।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2023 से 2025 के बीच शिकायतकर्ता ने किश्तों में लगभग ₹85 लाख का भुगतान किया। यह रकम नासिक के पाथर्डी-गौलाने रोड स्थित एक अन्य जमीन के लिए दी गई थी। हालांकि, कई बार आग्रह करने के बावजूद जमीन का स्वामित्व उसके नाम नहीं किया गया, जिससे धोखाधड़ी की आशंका और गहरी हो गई।
मामले का सबसे गंभीर पहलू धमकी और दबाव के आरोप हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब उसने बार-बार जमीन या पैसे वापस करने की मांग की, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। उसके व्यवसाय को नुकसान पहुंचाने और “बुरा प्रभाव” डालने जैसी चेतावनियां दी गईं, जिनमें कथित रूप से अंधविश्वास और तांत्रिक भय का इस्तेमाल किया गया।
यह नया मामला पहले से चल रहे गंभीर आरोपों में और इजाफा करता है। अशोक खरात पहले ही एक महिला से जुड़े दुष्कर्म और जबरन गर्भपात के मामले में हिरासत में हैं। उस मामले की जांच जारी है, जिसमें आर्थिक लेनदेन और प्रभाव के दुरुपयोग सहित कई पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
अब तक दर्ज 12 FIR में से 11 एक ही थाने में दर्ज हैं, जबकि एक अन्य मामला शिर्डी क्षेत्र में दर्ज किया गया है। जांच में यह सामने आ रहा है कि अधिकांश मामलों में एक समान पैटर्न अपनाया गया—पहले विश्वास जीतना, फिर धार्मिक या सामाजिक कार्यों के नाम पर निवेश के लिए प्रेरित करना और अंत में धोखाधड़ी या धमकी के जरिए आर्थिक लाभ उठाना।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पीड़ित अक्सर सामाजिक दबाव और भय के कारण शिकायत दर्ज कराने से हिचकिचाते हैं, खासकर जब आरोपी धार्मिक या सामाजिक प्रभाव रखता हो। इस मामले में लगातार सामने आ रही शिकायतें संकेत देती हैं कि पीड़ितों की संख्या और भी अधिक हो सकती है।
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि समय पर शिकायत दर्ज करना, वित्तीय लेनदेन का सही रिकॉर्ड रखना और जागरूकता बढ़ाना ऐसे अपराधों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साथ ही, धार्मिक या सामाजिक कार्यों के नाम पर काम करने वाले व्यक्तियों की सख्त निगरानी की जरूरत भी बताई जा रही है।
फिलहाल, मामला जांच के अधीन है और आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। बढ़ती शिकायतों ने यह संकेत दिया है कि यह मामला अलग-अलग घटनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर सकता है।
जांच के नतीजे और सबूतों के आधार पर ही सच्चाई सामने आएगी, लेकिन यह मामला पहले ही अंधविश्वास और आर्थिक अपराधों के खतरनाक गठजोड़ की ओर ध्यान आकर्षित कर चुका है।
