सेना में भर्ती कराने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले आरोपी Alok Tiwari को स्पेशल टास्क फोर्स ने मंगलवार को कैंट के सदर इलाके से गिरफ्तार कर लिया। वह मेडिकल परीक्षण में रिजेक्ट हुए अभ्यर्थियों को निशाना बनाकर उनसे मोटी रकम वसूलता था।
सूत्रों के मुताबिक आरोपी लंबे समय से सेना भर्ती मुख्यालय के आसपास सक्रिय रहता था और भर्ती प्रक्रिया में शामिल युवाओं की गतिविधियों पर नजर रखता था। मेडिकल में असफल घोषित किए गए अभ्यर्थियों को वह भरोसा दिलाता कि अगली भर्ती में उनका चयन पक्का करवा देगा। इसी विश्वास में आकर कई युवाओं ने उसे अपनी शैक्षिक प्रमाणपत्रों की प्रतियां और नकद रकम सौंप दी।
FCRF Launches Flagship Certified Fraud Investigator (CFI) Program
जांच में सामने आया है कि आरोपी युवाओं को दोबारा मेडिकल परीक्षण से पहले ‘ड्यूराबोलिन’ नामक इंजेक्शन लगवाता था। दावा किया जाता था कि इससे शारीरिक मानकों में अस्थायी सुधार हो जाएगा और वे मेडिकल में पास हो जाएंगे। प्रति अभ्यर्थी वह ₹1.5 लाख से ₹2 लाख तक वसूलता था। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि उसने इस तरीके से करोड़ों रुपये की ठगी की।
आरोपी ने अपनी असली पहचान छिपाने के लिए फर्जी नाम और पता भी इस्तेमाल किया। वह खुद को ‘आकाश कुमार’ निवासी कन्नौज बताता था और इसी नाम से पहचान पत्र तैयार करा रखा था। अभ्यर्थियों से बातचीत और लेनदेन भी इसी नाम से करता था।
पुलिस जांच में पता चला कि उसका वास्तविक नाम आलोक तिवारी है और वह कन्नौज जिले के छिबरामऊ क्षेत्र के विशुनगढ़ भोगपुर निगोहां का रहने वाला है। भर्ती प्रक्रिया के दौरान वह जानबूझकर उन युवाओं के संपर्क में आता था, जो मेडिकल परीक्षण में अयोग्य घोषित हो चुके होते थे और मानसिक रूप से निराश रहते थे। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर वह उन्हें दोबारा चयन का सपना दिखाता था।
सूत्रों के अनुसार, आरोपी कई बार भर्ती कार्यालयों के आसपास घूमता दिखाई देता था और अभ्यर्थियों से अनौपचारिक बातचीत कर उनका भरोसा जीतता था। इसके बाद उन्हें अलग से मिलकर पूरी योजना समझाता और पैसे की मांग करता।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोग भी हो सकते हैं, जो भर्ती प्रक्रिया की आंतरिक जानकारी जुटाकर युवाओं को गुमराह करते थे। आरोपी से घंटों पूछताछ की गई है और उसके मोबाइल फोन, दस्तावेज और बैंक खातों की पड़ताल की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में युवाओं को अस्थायी रूप से मेडिकल में पास होने का अनुभव हुआ, जिससे उसके दावे को विश्वसनीयता मिली और अधिक लोग उसके जाल में फंसते गए। हालांकि अंतिम चयन प्रक्रिया में अधिकांश अभ्यर्थी सफल नहीं हो सके।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी की कुल रकम कितनी है और कितने अभ्यर्थी इस धोखाधड़ी का शिकार हुए। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं आरोपी का संपर्क भर्ती प्रक्रिया से जुड़े किसी अंदरूनी व्यक्ति से तो नहीं था।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले की जांच जारी है।
