पटना साइबर ठगी: जामताड़ा गिरोह पकड़ा

साइबर ठगों पर पुलिस का बड़ा प्रहार: एक हजार बैंक खाते रडार पर, 100 से अधिक पीओएस एजेंट्स की जांच

Team The420
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जिले में बढ़ती साइबर ठगी की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए पुलिस ने व्यापक और बहुस्तरीय अभियान शुरू किया है। साइबर अपराधियों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के उद्देश्य से एक हजार से अधिक संदिग्ध ‘म्यूल’ बैंक खातों को जांच के दायरे में लिया गया है। आशंका है कि इन खातों के माध्यम से ठगी की रकम को आगे खपाया जा रहा था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार पिछले डेढ़ माह में साइबर ठगी से जुड़े 24 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। अन्य मामलों में भी तेजी से कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अब पुलिस का ध्यान केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे नेटवर्क और वित्तीय प्रवाह को रोकने पर केंद्रित रहेगा।

जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि कई बैंक खातों और सिम कार्डों का इस्तेमाल फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किया जा रहा था। इसी सिलसिले में 100 से अधिक पीओएस एजेंट्स को भी चिन्हित किया गया है, जिन पर आरोप है कि वे ठगों को खाते और मोबाइल सिम उपलब्ध कराने में सहयोग कर रहे थे। थाना स्तर पर इन एजेंट्स का सत्यापन कराया जा रहा है और संदिग्ध पाए जाने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। अकराबाद क्षेत्र में दो जनसेवा केंद्र संचालकों पर कार्रवाई के साथ अभियान की शुरुआत की गई है।

पुलिस ने कुछ बैंक शाखाओं और एटीएम को भी चिन्हित किया है, जहां से ठगी की रकम निकाले जाने के संकेत मिले हैं। इसके अलावा कुछ गांवों को भी चिह्नित किया गया है, जहां साइबर ठगों की गतिविधियों का नेटवर्क होने की आशंका जताई जा रही है। साइबर अपराधियों की पहचान अक्सर फर्जी नाम, गलत पते, नकली मोबाइल नंबर और फर्जी बैंक खातों के जरिए होती है, जिससे उनकी गिरफ्तारी मुश्किल हो जाती है।

जिले में साइबर अपराध दर्ज करने की प्रक्रिया को भी तेज किया गया है। पहले साइबर अपराध की एफआईआर दर्ज करने में औसतन लगभग 20 घंटे लगते थे, लेकिन अब इसे घटाकर करीब आधा घंटा कर दिया गया है। सभी मामलों में सीधे मुकदमा दर्ज कर त्वरित गिरफ्तारी के निर्देश दिए गए हैं। हाल ही में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया था और करीब 600 व्हॉट्सएप ग्रुप बंद कराकर लगभग डेढ़ लाख लोगों को संभावित ठगी से बचाया गया था।

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साइबर अपराध की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान भी शुरू किया गया है। लीड बैंक मैनेजर को पत्र लिखकर ऐसे खाताधारकों की सूची मांगी गई है जिनके खातों में अधिक धनराशि रहती है और जो साइबर ठगों के निशाने पर हो सकते हैं। इन सूचियों के आधार पर थाना-वार साइबर सुरक्षा समितियां गठित की जाएंगी, जिनका नेतृत्व सेवानिवृत्त व्यक्तियों को दिया जाएगा। अलग-अलग वर्गों के व्हॉट्सएप ग्रुप बनाकर लोगों को साइबर ठगी के तरीकों और बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी जाएगी।

साइबर क्राइम के नोडल अधिकारी ने सभी थाना प्रभारियों के लिए 20 बिंदुओं पर आधारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी की है। इसमें बैंक खातों के सत्यापन, दस्तावेजों की जांच और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी जैसे स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। किसी भी स्तर पर खामी मिलने पर तत्काल मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया गया है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध रोकने की रणनीति केवल अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं होगी, बल्कि उनके नेटवर्क और फंड फ्लो को भी पूरी तरह बाधित किया जाएगा। साथ ही जिन वर्गों को ठगों द्वारा निशाना बनाया जा रहा है, उन्हें सीधे जागरूक कर सुरक्षा प्रदान करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इस व्यापक अभियान से जिले में साइबर ठगी की घटनाओं में प्रभावी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

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