कंपनी खातों के दुरुपयोग, फर्जी लोन और अवैध प्रॉपर्टी बिक्री का खुलासा; आर्थिक अपराध शाखा ने शुरू की विस्तृत जांच

“अहमदाबाद में ₹11.3 करोड़ का रियल एस्टेट घोटाला उजागर: बिजनेस पार्टनर्स पर फंड डाइवर्जन और फर्जी फ्लैट बिक्री के आरोप”

Roopa
By Roopa
5 Min Read

अहमदाबाद। शहर में एक बड़े रियल एस्टेट घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें करीब ₹11.3 करोड़ की कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले ने व्यापारिक जगत में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले में दो मैनेजिंग पार्टनर्स के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है और जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंप दी गई है।

यह मामला एक साझेदारी फर्म से जुड़ा है, जो वर्ष 2021 में स्थापित हुई थी और अहमदाबाद के सोल क्षेत्र में आवासीय परियोजनाओं पर काम कर रही थी। शिकायतकर्ता, जो फर्म में अल्पांश हिस्सेदार है, ने आरोप लगाया है कि दोनों मैनेजिंग पार्टनर्स ने कंपनी के वित्तीय और प्रशासनिक नियंत्रण का दुरुपयोग कर निजी लाभ के लिए बड़ी रकम हड़प ली।

आरोपों के अनुसार, वर्ष 2021 से मार्च 2025 के बीच एक पार्टनर ने कंपनी के बैंक खातों से लगभग ₹2.25 करोड़ अपने निजी खाते में ट्रांसफर किए, जिसकी जानकारी अन्य साझेदारों को नहीं दी गई। आगे की जांच में यह भी सामने आया कि ₹5.5 करोड़ की अतिरिक्त रकम ऐसे खातों में भेजी गई, जिनका कंपनी से कोई वैध संबंध नहीं था। इन ट्रांजैक्शंस को कथित रूप से “लोन और एडवांस” के रूप में कंपनी की पुस्तकों में दर्ज किया गया।

जांचकर्ताओं को प्रॉपर्टी लेनदेन में भी गंभीर अनियमितताएं मिली हैं। शिकायत के अनुसार, कंपनी की आवासीय परियोजना से जुड़े नौ फ्लैट्स, जिनकी कुल कीमत लगभग ₹3.5 करोड़ बताई जा रही है, एक मैनेजिंग पार्टनर और उसके भाई के नाम पर दर्ज किए गए थे। बाद में इन फ्लैट्स को तीसरे पक्ष को बेच दिया गया, लेकिन बिक्री से प्राप्त धन कंपनी के खाते में जमा नहीं कराया गया।

इसके अलावा आरोप है कि दोनों पार्टनर्स ने कंपनी के लेटरहेड और प्रोजेक्ट डॉक्यूमेंट्स का दुरुपयोग कर ग्राहकों को गुमराह किया। कुछ मामलों में पहले से बिक चुके फ्लैट्स को उपलब्ध बताकर नए खरीदारों से पैसे वसूले गए, जिससे धोखाधड़ी की गंभीर आशंका पैदा हुई है।

कुल मिलाकर इस पूरे मामले में ₹11.3 करोड़ की वित्तीय हेराफेरी का आरोप लगाया गया है। अन्य साझेदारों को मामले में गवाह बनाया गया है, जबकि जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इसमें और लोग भी शामिल थे या किसी तरह की मदद की गई थी।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है और जांच आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, जांच का फोकस फंड फ्लो को ट्रेस करना, बैंक रिकॉर्ड की जांच करना और लाभार्थियों की पहचान करना होगा।

प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि आरोपियों ने लेखा पुस्तकों में हेरफेर कर लेनदेन को वैध दिखाने की कोशिश की। इसमें फर्जी खर्च, नकली लोन एंट्री और संबंधित खातों के जरिए फंड डायवर्जन जैसे तरीके शामिल हो सकते हैं।

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि रियल एस्टेट सेक्टर में इस तरह के घोटालों में अक्सर जटिल लेयरिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पैसे की असली दिशा को ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है। खासकर साझेदारी आधारित फर्मों में निगरानी की कमी इसका बड़ा कारण मानी जाती है।

फिलहाल जांच एजेंसियां बैंक स्टेटमेंट, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन डॉक्यूमेंट्स और कंपनी के आंतरिक रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही हैं। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर अन्य संबंधित लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।

इस मामले ने स्थानीय व्यापारिक समुदाय में चिंता बढ़ा दी है, खासकर रियल एस्टेट सेक्टर में जहां पारदर्शिता और नियामक अनुपालन को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि जैसे-जैसे फॉरेंसिक ऑडिट आगे बढ़ेगा, इस घोटाले की पूरी परतें सामने आ सकती हैं।

फिलहाल किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई संभव है। पूरा ध्यान अब फंड ट्रेल को समझने और सार्वजनिक धन की रिकवरी पर है।

यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि साझेदारी आधारित व्यवसायों में मजबूत ऑडिट और सख्त निगरानी प्रणाली की कितनी जरूरत है।

हमसे जुड़ें

Share This Article