बैंक ट्रांजैक्शन के लिए अब दोहरी वेरिफिकेशन अनिवार्य; डिजिटल सुरक्षा मजबूत करने के लिए जागरूकता अभियान भी शुरू

हरियाणा के 4 जिलों में लॉन्च हुआ ‘डुअल OTP सिस्टम’: साइबर फ्रॉड से बचेंगे वरिष्ठ नागरिक

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By Roopa
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साइबर अपराधों से बढ़ते खतरे को देखते हुए हरियाणा में एक नया सुरक्षा मॉडल लागू किया गया है, जिसके तहत गुरुग्राम, नूंह, फरीदाबाद और पलवल जिलों में ‘डुअल OTP सिस्टम’ शुरू किया गया है। इस सिस्टम का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल फ्रॉड, निवेश धोखाधड़ी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों से सुरक्षित रखना है।

इस नई सुविधा के तहत अब बैंक ट्रांजैक्शन तभी पूरा होगा जब दो अलग-अलग OTP का सफल सत्यापन किया जाएगा। पहला OTP वरिष्ठ नागरिक के मोबाइल नंबर पर आएगा, जबकि दूसरा OTP उनके द्वारा पहले से लिंक किए गए किसी भरोसेमंद परिवार सदस्य के मोबाइल पर भेजा जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, यह सिस्टम विशेष रूप से उन मामलों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिनमें साइबर अपराधी वरिष्ठ नागरिकों को डराकर या भ्रमित कर उनकी जीवनभर की बचत को निशाना बनाते हैं।

यह सुविधा कई निजी बैंकों के सहयोग से लागू की गई है, जिसमें HDFC Bank प्रमुख रूप से शामिल है। इसे पहले गुरुग्राम और पंचकूला में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में परीक्षण किया गया था, जिसके बाद अब इसे अन्य जिलों में विस्तारित किया गया है।

HDFC Bank के नोडल अधिकारी विपिन गुप्ता ने बताया कि इस परियोजना पर काम 14 अप्रैल से शुरू हुआ था और अब 50 से अधिक शाखाओं में यह सुविधा सक्रिय हो चुकी है। बैंक अधिकारियों के अनुसार, सिस्टम के बैकएंड में तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं ताकि यह सुविधा अधिक सुरक्षित और सुचारू रूप से काम कर सके।

नूंह के पुलिस अधीक्षक अर्पित जैन ने बताया कि यह सिस्टम विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल धोखाधड़ी से बचाने के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में अपराधी निवेश योजनाओं या फर्जी कॉल के जरिए लोगों की पूरी बचत हड़प लेते हैं, जिसे यह डबल वेरिफिकेशन सिस्टम काफी हद तक रोक सकता है।

इस मॉडल में एक अतिरिक्त ‘सेफ्टी पॉज’ भी शामिल है, जिससे यदि किसी ट्रांजैक्शन में संदेह होता है तो परिवार का दूसरा सदस्य हस्तक्षेप कर सकता है और संभावित धोखाधड़ी को रोका जा सकता है।

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अधिकारियों ने बताया कि इस सिस्टम के साथ-साथ जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, जिसमें रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), कॉलेज, कॉरपोरेट ऑफिस और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को साइबर सुरक्षा के बारे में जानकारी दी जा रही है।

इसके अलावा हरियाणा पुलिस ने एक अलग डिजिटल सुरक्षा ऐप ‘Abhedya’ भी लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य व्यापारियों और प्रमुख व्यक्तियों को गैंगस्टरों द्वारा की जा रही धमकी और वसूली कॉल से बचाना है।

गुरुग्राम पुलिस के डीसीपी (वेस्ट) करण गोयल ने बताया कि यह ऐप एंड्रॉयड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर काम करता है और संदिग्ध कॉल तथा वॉइस मैसेज को ब्लॉक कर देता है। यह ऐप उन कॉल्स को सीधे सिस्टम से हटाने में सक्षम है, जिससे उपयोगकर्ता को मानसिक तनाव से राहत मिलती है।

फरीदाबाद पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी यशपाल यादव ने बताया कि अब तक कम से कम 21 व्यापारियों को इस सुरक्षा ऐप से जोड़ा जा चुका है, जिनमें से कई को विदेशों से धमकी भरे कॉल मिल रहे थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे डिजिटल लेनदेन बढ़ रहा है, वैसे-वैसे साइबर अपराध भी नए रूप ले रहे हैं। ऐसे में डुअल OTP सिस्टम और सुरक्षा ऐप्स जैसे उपाय डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम हैं।

फिलहाल हरियाणा पुलिस और बैंकिंग संस्थान मिलकर इस मॉडल को और व्यापक स्तर पर लागू करने की योजना पर काम कर रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोगों को साइबर फ्रॉड से बचाया जा सके।

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