कानपुर। गेमिंग ऐप के जरिए करीब ₹100 करोड़ की साइबर ठगी के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे देशभर में फैले एक संगठित नेटवर्क की परतें खुलती जा रही हैं। बर्रा थाना पुलिस ने इस मामले में चार बैंक अधिकारियों समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि गिरोह के दो मुख्य सरगना अब भी फरार हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि ठगी की रकम को ट्रस्टों और फर्जी फर्मों के जरिए घुमाकर हवाला नेटवर्क में भेजा जा रहा था।
पुलिस जांच के दौरान सामने आया कि कर्नाटक के अफजलपुर स्थित एक ट्रस्ट के खाते में ₹30 करोड़ की बड़ी रकम ट्रांसफर की गई थी। यह रकम ठगी की तीसरी परत के रूप में पहुंची थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अपराधियों ने मनी ट्रेल को छिपाने के लिए मल्टी-लेयर ट्रांजेक्शन सिस्टम अपनाया था। ट्रस्ट इस रकम को अपनी लेखा पुस्तिका में ‘डोनेशन’ के रूप में दर्ज करता था और करीब 30 प्रतिशत कमीशन काटने के बाद शेष राशि हवाला के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में भेज दी जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह ट्रस्टों का इस्तेमाल केवल बड़ी रकम के लिए करता था। जब ठगी की रकम ₹20 करोड़ से अधिक होती थी, तभी उसे ट्रस्ट के खाते में भेजा जाता था। इससे कम रकम को ठग फर्जी जीएसटी फर्मों के नाम पर खोले गए खातों में ट्रांसफर करते थे, जबकि छोटी रकम को म्यूल खातों के जरिए इधर-उधर किया जाता था। इस तरह से रकम को कई स्तरों में घुमाकर उसका स्रोत छिपाने की कोशिश की जाती थी।
कर्नाटक के इस ट्रस्ट के अलावा अब पांच और ट्रस्टों की पहचान हुई है, जो महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक में संचालित हो रहे हैं। इन सभी पर आरोप है कि वे ठगी की रकम को अपने खातों में मंगवाकर हवाला चैनल के जरिए आगे भेजते थे। इसके अलावा सात फर्जी कंपनियों का भी पता चला है, जिनके खातों का इस्तेमाल धन के लेनदेन में किया गया।
पुलिस ने एक अलर्ट मिलने के बाद कार्रवाई करते हुए आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें विभिन्न बैंकों से जुड़े अधिकारी भी शामिल हैं, जिन पर खातों के संचालन और ट्रांजेक्शन में भूमिका निभाने का आरोप है। गिरफ्तार आरोपियों में धर्मेंद्र सिंह, अमित सिंह, आशीष कुमार, सोनू शर्मा, सतीश पांडेय, तनिष्क गुप्ता और साहिल विश्वकर्मा शामिल हैं। सभी को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
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इस पूरे गिरोह का मुख्य सरगना राजवीर सिंह यादव उर्फ ओमकार और आगरा का अंचित गोयल बताया जा रहा है, जो फिलहाल फरार हैं। पुलिस इनके खिलाफ ₹25-25 हजार का इनाम घोषित करने की तैयारी कर रही है। बताया गया है कि अंचित गोयल का सही पता अभी तक नहीं मिल सका है, जिसके चलते इनाम की औपचारिक घोषणा में देरी हो रही है। पुलिस टीमें आगरा समेत विभिन्न स्थानों पर दबिश देकर उनकी तलाश में जुटी हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के बैंक खातों में आने वाली रकम पहले दूसरी परत के खातों में जाती थी और फिर वहां से तीसरी परत में ट्रस्टों के खातों में ट्रांसफर की जाती थी। इसके बाद ट्रस्ट खातों से भी रकम को तेजी से निकाल लिया जाता था, ताकि कोई ठोस सबूत न बच सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब हवाला नेटवर्क और संभावित आतंकी फंडिंग के एंगल से भी जांच कर रही है। संबंधित बैंक खातों का विस्तृत ब्योरा मांगा गया है और लेनदेन की पूरी श्रृंखला को खंगाला जा रहा है।
साइबर अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में अपराधी ‘सोशल इंजीनियरिंग’ और वित्तीय सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर बड़े स्तर पर ठगी को अंजाम देते हैं। ट्रस्ट और फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल कर रकम को वैध दिखाने और उसकी ट्रेसिंग को कठिन बनाने की कोशिश की जाती है।
फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने और फरार सरगनाओं को पकड़ने के प्रयास में जुटी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि इस साइबर ठगी का नेटवर्क देश के किन-किन हिस्सों तक फैला हुआ है।
