₹80 हजार की डिमांड, ₹50 हजार लेते ड्राइवर पकड़ा गया; CBI ट्रैप में फंसी अधिकारी, घर से कैश और ज्वेलरी बरामद, 14 दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी

“ट्रांसफर के बदले ‘रेट फिक्स’: सीजीएचएस की एडिशनल डायरेक्टर रिश्वत लेते गिरफ्तार, पद से हटाई गईं”

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By Roopa
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मेरठ/गाजियाबाद। सरकारी हेल्थ सर्विस से जुड़े CGHS ऑफिस में बड़ा करप्शन केस सामने आया है, जहां ट्रांसफर के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में एडिशनल डायरेक्टर डॉ. नताशा वर्मा और उनके ड्राइवर-कम-पर्सनल असिस्टेंट सनी को गिरफ्तार कर लिया गया। कार्रवाई के बाद सरकार ने तुरंत उन्हें उनके पद से हटा दिया और डॉ. मनीषा मित्तल को नया इंचार्ज एडिशनल डायरेक्टर नियुक्त किया गया है।

यह मामला तब शुरू हुआ जब जूनियर हेल्थ एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट तरुण कुमार ने शिकायत दर्ज कराई कि उनका मुरादाबाद से मेरठ ट्रांसफर कराने के लिए ₹80 हजार की रिश्वत मांगी गई। तरुण ने अपनी फैमिली प्रॉब्लम का हवाला देते हुए मेरठ पोस्टिंग की रिक्वेस्ट की थी। आरोप है कि यह डिमांड डॉ. नताशा के कहने पर उनके ड्राइवर सनी के जरिए रखी गई।

शिकायत मिलने के बाद जांच एजेंसी ने 30 अप्रैल को केस दर्ज कर ट्रैप प्लान किया। गुरुवार रात मेरठ के सूरजकुंड ऑफिस के पास टीम ने जाल बिछाया, जहां सनी को ₹50 हजार रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया गया। इसके बाद टीम ने तुरंत एक्शन लेते हुए डॉ. नताशा को भी अरेस्ट कर लिया।

इसके बाद जांच टीम ने गंगानगर स्थित उनके घर पर सर्च ऑपरेशन किया। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी की गई। घर से लाखों रुपये कैश और ज्वेलरी बरामद हुई। साथ ही कई जरूरी डॉक्यूमेंट्स और फाइलें भी जब्त की गईं, जिनकी जांच की जा रही है।

शुक्रवार को दोनों आरोपियों को गाजियाबाद की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में जेल भेज दिया गया। परिवार को गिरफ्तारी की जानकारी दे दी गई है।

इस केस के सामने आने के बाद हेल्थ डिपार्टमेंट में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों और कर्मचारियों में यह चर्चा तेज है कि क्या यह मामला किसी बड़े करप्शन नेटवर्क का हिस्सा है। जांच एजेंसी अब यह भी देख रही है कि क्या अन्य कर्मचारी या अधिकारी भी इस सिस्टम में शामिल थे।

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डिपार्टमेंटल सोर्सेज के अनुसार, डॉ. नताशा के खिलाफ पहले भी शिकायतें दर्ज हो चुकी थीं। अलीगढ़ पोस्टिंग के दौरान भी उन पर रिश्वत के आरोप लगे थे और उस समय एक इनक्वायरी कमेटी बनाई गई थी, हालांकि रिपोर्ट पब्लिक नहीं की गई थी।

सरकार ने इस मामले में तुरंत एक्शन लेते हुए उन्हें हटाकर डॉ. मनीषा मित्तल को नया इंचार्ज बना दिया है। डॉ. मनीषा ने शुक्रवार को ही चार्ज संभाल लिया। इससे पहले भी उन्हें इसी तरह की स्थिति में जिम्मेदारी दी जा चुकी है, जब एक अन्य अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद पोस्टिंग खाली हुई थी।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे मामलों में अक्सर मिडिलमैन की भूमिका अहम होती है, जो अधिकारी और आम व्यक्ति के बीच रिश्वत की डील फिक्स करता है। धीरे-धीरे यह सिस्टम एक ऑर्गनाइज्ड करप्शन नेटवर्क में बदल जाता है, जहां ट्रांसफर और पोस्टिंग के रेट फिक्स हो जाते हैं।

फिलहाल जांच एजेंसी इस पूरे मामले की आगे की कड़ियां जोड़ रही है। यह भी जांच हो रही है कि क्या अन्य ट्रांसफर या पोस्टिंग में भी इसी तरह रिश्वत ली गई थी।

इस पूरे केस ने सरकारी दफ्तरों में ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब मांग उठ रही है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग जैसी प्रोसेस को पूरी तरह डिजिटल और ऑटोमेटेड किया जाए, ताकि मैनुअल इंटरफेरेंस खत्म हो सके और करप्शन पर रोक लगाई जा सके।

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