जयपुर: राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कथित फर्जीवाड़े के मामलों ने कृषि विभाग की चिंता बढ़ा दी है। प्रारंभिक जांच में कई जिलों में फर्जी दस्तावेज, गलत गिरदावरी रिपोर्ट और दूसरे किसानों की कृषि भूमि के विवरण का इस्तेमाल कर बीमा क्लेम हासिल करने की कोशिश सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कृषि विभाग ने संदिग्ध दावों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। कई मामलों में पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है, जबकि संदिग्ध बैंक खातों में बीमा क्लेम की राशि के भुगतान पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
फर्जी दस्तावेजों से तैयार किए गए बीमा दावे
जांच में सामने आया है कि कुछ मामलों में वास्तविक किसानों के बजाय दूसरे लोगों के नाम दर्ज कर फसल बीमा से जुड़े दावे तैयार किए गए। कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेजों और गलत भूमि रिकॉर्ड के आधार पर बीमा पोर्टल पर जानकारी दर्ज की गई। इसके बाद फसल खराब होने या नुकसान से संबंधित दावे प्रस्तुत किए गए।
कुछ मामलों में एक ही खसरा संख्या या किसी अन्य व्यक्ति की कृषि भूमि का विवरण इस्तेमाल कर एक से अधिक बीमा पॉलिसियां तैयार कराने की बात सामने आई है। इससे विभाग को संदेह हुआ कि योजना के तहत उपलब्ध किसानों और भूमि संबंधी रिकॉर्ड का दुरुपयोग कर सुनियोजित तरीके से गलत क्लेम तैयार किए गए।
विभागीय शिकायतों और प्रारंभिक जांच के आधार पर संबंधित मामलों में पुलिस कार्रवाई शुरू की गई है। जांच एजेंसियां उन बैंक खातों की भी जानकारी जुटा रही हैं, जिनमें कथित तौर पर बीमा क्लेम की राशि पहुंची या पहुंचाने की तैयारी थी। बैंक लेनदेन के जरिए फर्जीवाड़े में शामिल लोगों और कथित लाभार्थियों के बीच संबंधों की पड़ताल की जा रही है।
ई-मित्र संचालक और बिचौलिए भी जांच के दायरे में
जांच का दायरा केवल फर्जी क्लेम लेने वाले कथित लाभार्थियों तक सीमित नहीं है। कृषि विभाग और पुलिस ऐसे ई-मित्र संचालकों, निजी बिचौलियों तथा संबंधित स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की भूमिका भी जांच रहे हैं, जिन पर गलत जानकारी दर्ज कराने या दस्तावेज तैयार कराने में मदद करने का संदेह है।
अधिकारियों ने संबंधित बीमा कंपनियों को ऐसे दावों की पहचान कर भुगतान रोकने के निर्देश दिए हैं, जिनमें रिकॉर्ड या दस्तावेज संदिग्ध पाए गए हैं। जांच में यदि किसी व्यक्ति, एजेंट, संस्था या कर्मचारी की संलिप्तता प्रमाणित होती है तो उसके खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। गलत तरीके से हासिल की गई राशि की वसूली भी की जाएगी।
डिजिटल रिकॉर्ड से होगा भूमि का सत्यापन
फसल बीमा योजना में भविष्य में फर्जीवाड़े की गुंजाइश कम करने के लिए ऑनलाइन सत्यापन व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। कृषि विभाग योजना के ऑनलाइन पोर्टल को राजस्व विभाग के डिजिटाइज्ड भूमि रिकॉर्ड से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य आवेदन के समय किसान, भूमि और फसल से संबंधित विवरण का डिजिटल स्तर पर सत्यापन करना है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसी भूमि के रिकॉर्ड का इस्तेमाल करने से पहले उसका वास्तविक स्वामित्व और संबंधित विवरण जांचे जाने की संभावना है। विभाग का मानना है कि इससे एक ही खसरा संख्या पर कई बीमा दावे तैयार करने और दूसरे किसान की जमीन का विवरण इस्तेमाल करने जैसी अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
दोषियों पर कार्रवाई और राशि वसूली की तैयारी
विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान फर्जीवाड़े में शामिल पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अनियमितताओं में संलिप्त बीमा एजेंटों को ब्लैकलिस्ट करने और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच की कार्रवाई भी की जा सकती है।
फिलहाल पुलिस और विभागीय अधिकारी फर्जी दस्तावेजों, गिरदावरी रिपोर्ट, बीमा पॉलिसियों और बैंक खातों के बीच संबंधों की जांच कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद फर्जी क्लेम के वास्तविक दायरे और सरकारी योजना को हुए वित्तीय नुकसान का आकलन किया जाएगा। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित लोगों से गलत तरीके से हासिल की गई राशि की वसूली के साथ उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी आगे बढ़ाई जाएगी।
