AIIMS Rishikesh की CRE-3 recruitment में biometric verification के दौरान कथित impersonation का मामला सामने आया, जिसमें exam और joining के लिए अलग-अलग व्यक्तियों के शामिल होने का आरोप है।

एम्स भर्ती में बायोमेट्रिक जांच से खुला फर्जीवाड़ा, वायरमैन पद पर दूसरे की जगह नौकरी पाने का आरोप; एक गिरफ्तार, दूसरा फरार

Team The420
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ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में सीआरई-3 भर्ती परीक्षा के दौरान कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। वायरमैन पद पर भर्ती के लिए परीक्षा एक अभ्यर्थी ने दी, जबकि चयन के बाद नौकरी ज्वॉइन करने दूसरा व्यक्ति पहुंच गया। पहचान की जांच के दौरान बायोमेट्रिक सत्यापन में गड़बड़ी सामने आने के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दूसरा फरार है। दोनों पर पहचान संबंधी दस्तावेजों में कथित हेरफेर कर भर्ती प्रक्रिया में धोखाधड़ी करने और नौकरी के जरिए वेतन हासिल करने के आरोप हैं।

कोतवाली पुलिस के मुताबिक, एम्स ऋषिकेश के सहायक प्रशासनिक अधिकारी विक्रम सिंह ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में राजस्थान के दौसा निवासी विकास मीणा और जयपुर निवासी अशोक मीणा को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि दोनों ने पहचान से संबंधित फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता की और इस तरह नौकरी हासिल करने की कोशिश की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

गांधीनगर में परीक्षा, ऋषिकेश में दूसरे ने की ज्वॉइनिंग

मामले में सामने आया है कि एम्स के वायरमैन पद के लिए सीआरई-3 भर्ती परीक्षा गुजरात के गांधीनगर में आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में अशोक मीणा शामिल हुआ था, जबकि चयन प्रक्रिया के बाद एम्स ऋषिकेश में ज्वॉइनिंग के लिए विकास मीणा पहुंचा। यानी परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थी और नियुक्ति के लिए पहुंचे व्यक्ति की पहचान अलग-अलग थी। इसी अंतर ने भर्ती प्रक्रिया में कथित धोखाधड़ी की आशंका पैदा की।

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पुलिस के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया के अंतिम चरण में अभ्यर्थी की पहचान का सत्यापन किया जा रहा था। इसी दौरान अशोक मीणा के पहचान पत्र पर लगी तस्वीर और अन्य पहचान संबंधी विवरणों में अंतर दिखाई दिया। इस विसंगति के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए पूछताछ की गई। जांच के दौरान अशोक मीणा ने परीक्षा में शामिल होने की बात स्वीकार की। इसके बाद अधिकारियों को पूरे मामले में दूसरे व्यक्ति की भूमिका की भी जानकारी मिली।

बायोमेट्रिक सत्यापन ने रोकी कथित फर्जी नियुक्ति

इस मामले में बायोमेट्रिक सत्यापन की भूमिका अहम रही। भर्ती परीक्षा और नियुक्ति से पहले पहचान की पुष्टि करने की व्यवस्था के कारण कथित फर्जीवाड़ा सामने आ सका। यदि सत्यापन के दौरान पहचान संबंधी अंतर पकड़ में नहीं आता, तो गलत पहचान के आधार पर नौकरी हासिल करने का प्रयास सफल हो सकता था। हालांकि, इस मामले में समय रहते गड़बड़ी सामने आने से संबंधित अधिकारियों ने पुलिस को सूचना दी और कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।

एम्स में सी और बी श्रेणी के विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित की जाती है। चयनित अभ्यर्थियों को संबंधित संस्थान में ज्वॉइनिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इन पदों में कार्यालय स्टाफ, नर्सिंग, इलेक्ट्रिकल और अन्य तकनीकी एवं गैर-तकनीकी पद शामिल होते हैं। भर्ती प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों की जांच के साथ पहचान सत्यापन भी महत्वपूर्ण चरण होता है। इस मामले ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि परीक्षा में शामिल होने वाले व्यक्ति और नियुक्ति के लिए उपस्थित अभ्यर्थी की पहचान का मिलान करना कितना जरूरी है।

एक आरोपी गिरफ्तार, दूसरे की तलाश जारी

कोतवाली पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दूसरे की तलाश की जा रही है। फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। जांच में यह भी पता लगाया जाना है कि कथित फर्जीवाड़े में किसकी क्या भूमिका रही, पहचान संबंधी दस्तावेजों में किस तरह की गड़बड़ी की गई और नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान किन चरणों पर यह मामला सामने आया।

शिकायत में नौकरी हासिल करने के साथ वेतन लेने का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस इन आरोपों से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों की जांच कर रही है। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

एम्स ऋषिकेश के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. श्रीलॉय मोहंती ने कहा कि संस्थान की भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी है और इसी वजह से धोखाधड़ी के कथित प्रयास का पता चल सका। संदिग्ध गतिविधि सामने आने के बाद संबंधित लोगों को पुलिस के सुपुर्द किया गया और शिकायत दर्ज कराई गई। उन्होंने बताया कि अब मामले की आगे की जांच पुलिस कर रही है।

इस प्रकरण में बायोमेट्रिक जांच ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान पहचान की पुष्टि की अहमियत को सामने ला दिया है। अब पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होगा कि कथित फर्जीवाड़े की योजना कैसे बनाई गई, दोनों आरोपियों के बीच क्या भूमिका-विभाजन था और नियुक्ति तथा वेतन से जुड़े आरोपों में कितने तथ्य सामने आते हैं।

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