अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद में गरबा आयोजनों के फर्जी पास बेचकर लोगों से करीब ₹8 लाख की ठगी करने के आरोप में क्राइम ब्रांच ने राजस्थान के दो युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर इंस्टाग्राम के जरिए 25 अलग-अलग गरबा आयोजनों के नाम पर 686 नकली पास बेचने और लोगों से ऑनलाइन भुगतान कराने का आरोप है। जांच में सामने आया कि कथित ठगी को अंजाम देने के लिए फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, आकर्षक विज्ञापन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार प्रचार सामग्री का इस्तेमाल किया गया। पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है, ताकि ठगी की पूरी रकम और इसमें शामिल अन्य लोगों का पता लगाया जा सके।
आयोजक के नाम और लोगो का किया इस्तेमाल
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने इंस्टाग्राम पर ‘veer.rajjputt’ नाम से एक अकाउंट बनाया था। इसके साथ ही कथित तौर पर एक फर्जी ईमेल आईडी का इस्तेमाल कर अनंत ब्रह्मांड नाम के गरबा आयोजन की पहचान अपनाई गई। इस आयोजन का संचालन शिकायतकर्ता की कंपनी करती है। आरोप है कि आयोजकों की अनुमति के बिना उनके नाम और लोगो का इस्तेमाल करके गरबा पास बेचने के विज्ञापन जारी किए गए।
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आरोपियों ने वास्तविक कीमत से कम दाम पर पास उपलब्ध कराने का दावा किया, जिससे लोग आकर्षित हुए। विज्ञापनों पर भरोसा करके संपर्क करने वाले लोगों को कथित तौर पर व्हाट्सऐप के जरिए भुगतान करने के लिए कहा जाता था। इसके बाद उन्हें अलग-अलग गरबा आयोजनों के नाम से बुकिंग कन्फर्मेशन भेजे जाते थे, ताकि पास असली दिखाई दें और खरीदारों को किसी तरह का संदेह न हो।
इस मामले में 16 अक्टूबर को भारतीय न्याय संहिता, 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि ठगी की गतिविधियां 19 अगस्त से 14 अक्टूबर के बीच की गईं।
एआई से बनाए प्रचार संदेश और नकली पास
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजस्थान निवासी 21 वर्षीय विरेंद्रसिंह राठौड़ और 22 वर्षीय किशन सिंह राठौड़ के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, विरेंद्रसिंह ने अहमदाबाद स्थित सिल्वर ओक यूनिवर्सिटी से बीबीए की पढ़ाई की है, जबकि किशन सिंह बीएससी स्नातक है। दोनों के बेरोजगार होने की जानकारी भी सामने आई है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपियों ने इंस्टाग्राम पर पेशेवर दिखने वाली प्रोफाइल तैयार की थी। लोगों तक पहुंच बढ़ाने के लिए मेटा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भुगतान आधारित विज्ञापन चलाए गए। इन विज्ञापनों के जरिए उन इलाकों के लोगों को निशाना बनाया गया, जहां गरबा कार्यक्रम आयोजित होने थे। पुलिस के मुताबिक, एक प्रचार पोस्ट को अहमदाबाद में करीब 40 हजार बार देखा गया था।
आरोप है कि आरोपियों ने प्रचार सामग्री तैयार करने के लिए चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया। उन्होंने ऐसे पास डिजाइन किए, जो देखने में वास्तविक टिकटों जैसे लगते थे। इनमें बारकोड और क्यूआर कोड भी शामिल किए गए, ताकि खरीदारों को पास की प्रामाणिकता पर भरोसा हो सके। इस तरीके से सोशल मीडिया पर विज्ञापन देखने वाले लोगों को कथित तौर पर नकली टिकट बेचकर भुगतान प्राप्त किया गया।
व्हाट्सऐप चैट और बैंक खातों की जांच
पुलिस ने बताया कि विज्ञापनों के जरिए संपर्क करने वाले संभावित खरीदारों से आरोपी ‘वीर राजपूत’ नाम से व्हाट्सऐप पर बातचीत करते थे। अलग-अलग गरबा आयोजनों के नाम पर ईमेल आईडी बनाकर ग्राहकों को बुकिंग की पुष्टि भेजी जाती थी। इससे खरीदारों को लगता था कि उनकी टिकट बुकिंग सफलतापूर्वक पूरी हो गई है।
जांच में सामने आया कि भुगतान की रकम आरोपियों में से एक से जुड़े एचडीएफसी बैंक खाते में जमा की गई थी। इसके बाद धनराशि को दूसरे खातों में स्थानांतरित करने या निकालने की आशंका है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कथित ठगी में म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया था या नहीं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ गांधीनगर जिले के सांतেজ थाने में 3 अक्टूबर को भी मामला दर्ज हुआ था। इसके बावजूद वे कथित तौर पर पास बेचने और विज्ञापन चलाने की गतिविधियां जारी रखे हुए थे। जांच से बचने के लिए उनके जोधपुर, बीकानेर और सीकर के बीच आवाजाही करने की जानकारी सामने आई है।
686 पास की बिक्री का हिसाब खंगाल रही पुलिस
साइबर सेल ने अब तक विभिन्न गरबा आयोजनों के नाम पर कथित तौर पर बेचे गए 686 फर्जी पास की पहचान की है। इनसे करीब ₹8 लाख जुटाए जाने का अनुमान है। पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन, इंस्टाग्राम अकाउंट, ईमेल, व्हाट्सऐप बातचीत और बैंक लेनदेन की पड़ताल कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कितने लोगों से रकम ली गई और क्या इस नेटवर्क में अन्य व्यक्ति भी शामिल थे।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि गरबा कार्यक्रमों के पास केवल आयोजकों की आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित संपर्क माध्यमों से ही खरीदें। बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर टिकट देने वाले विज्ञापनों पर भरोसा करने से पहले उनकी पुष्टि करें। यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी हुई है, तो उसे तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है।
