नई दिल्ली। नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में संचालित दो गुप्त ड्रग्स प्रयोगशालाओं का भंडाफोड़ किया है। इन प्रयोगशालाओं में कथित तौर पर सिंथेटिक नशीले पदार्थों का निर्माण किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। मौके से बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ, रसायन और उनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक उपकरण भी जब्त किए गए। जब्त सामग्री का अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में अनुमानित मूल्य करीब 45 करोड़ रुपये बताया गया है।
एनसीबी ने 16 अक्टूबर को ‘ऑपरेशन क्रिस्टल हंट’ के तहत दोनों गुप्त प्रयोगशालाओं पर छापेमारी की। इस अभियान का उद्देश्य सिंथेटिक ड्रग्स के कथित निर्माण और उनकी अवैध आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई करना था। प्रयोगशालाओं से बरामद पदार्थों की मात्रा और वहां मिले उपकरणों के आधार पर जांच एजेंसी बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों के निर्माण की आशंका की पड़ताल कर रही है।
379.740 किलोग्राम एम्फेटामाइन युक्त पदार्थ जब्त
छापेमारी के दौरान एनसीबी ने 379.740 किलोग्राम एम्फेटामाइन युक्त पदार्थ बरामद किया। इसके अतिरिक्त 10 किलोग्राम स्यूडोएफेड्रिन भी जब्त किया गया। स्यूडोएफेड्रिन का इस्तेमाल कुछ दवाओं के निर्माण और विभिन्न रासायनिक प्रक्रियाओं में किया जाता है।
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अधिकारियों के अनुसार, जब्त कच्चे और अर्ध-निर्मित पदार्थों से लगभग 56 किलोग्राम तैयार क्रिस्टलीय एम्फेटामाइन प्राप्त होने का अनुमान है। इस बरामदगी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि एम्फेटामाइन एक शक्तिशाली उत्तेजक पदार्थ है और इसका अवैध सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे पैदा कर सकता है।
एनसीबी ने नशीले पदार्थों के अलावा उनके कथित निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायन और आधुनिक उपकरण भी जब्त किए हैं। इन सामग्रियों की जांच से प्रयोगशालाओं के संचालन के तरीके, उनकी संभावित उत्पादन क्षमता और नशीले पदार्थों की आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है।
जब्त सामग्री का अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में अनुमानित मूल्य करीब 45 करोड़ रुपये आंका गया है। यह मूल्यांकन अवैध बाजार में संभावित कीमत के आधार पर किया गया है। बरामद पदार्थों की वास्तविक प्रकृति और संरचना की पुष्टि जांच तथा प्रयोगशाला परीक्षणों के आधार पर की जाएगी।
दो मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी से जांच को मिलेगी दिशा
कार्रवाई के दौरान दो मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। जांच एजेंसी अब दोनों प्रयोगशालाओं से जुड़े लोगों, कच्चे माल और रसायनों की आपूर्ति के स्रोतों तथा कथित तौर पर तैयार किए जा रहे नशीले पदार्थों के वितरण नेटवर्क की पड़ताल कर सकती है।
जांच का एक प्रमुख पहलू यह पता लगाना होगा कि प्रयोगशालाओं के लिए रसायन और उपकरण कहां से जुटाए गए थे, तैयार पदार्थों की आपूर्ति किन स्थानों पर की जानी थी और इस गतिविधि में अन्य लोगों या संगठित समूहों की कोई भूमिका थी या नहीं।
हालांकि, कथित नेटवर्क के विस्तार और गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। जांच के दौरान वित्तीय लेनदेन और सिंथेटिक ड्रग्स के संभावित खरीदारों तथा आपूर्तिकर्ताओं से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की जा सकती है।
ग्रेटर नोएडा में हुई इस कार्रवाई ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सिंथेटिक ड्रग्स के कथित निर्माण से जुड़े ठिकानों पर निगरानी के महत्व को रेखांकित किया है। जांच एजेंसी के सामने यह पता लगाने की चुनौती होगी कि दोनों प्रयोगशालाएं किसी बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा थीं या उनका संचालन सीमित स्तर पर किया जा रहा था।
अमित शाह ने कार्रवाई को बताया बड़ी उपलब्धि
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ग्रेटर नोएडा में दो गुप्त ड्रग्स प्रयोगशालाओं के भंडाफोड़ को बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि कार्रवाई में भारी मात्रा में सिंथेटिक नशीले पदार्थों के साथ उनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायन और उपकरण जब्त किए गए हैं।
गृह मंत्री ने इस कार्रवाई को दिसंबर 2029 तक ड्रग कार्टेल नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लक्ष्य के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नशामुक्त भारत मिशन’ के तहत अपनाए गए ‘नारकोटिक्स नियंत्रण विजन दस्तावेज 2026–2029’ के अनुरूप है।
सरकार की घोषित रणनीति में नशीले पदार्थों के निर्माण, तस्करी और वितरण से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया गया है। ग्रेटर नोएडा में दोनों प्रयोगशालाओं का भंडाफोड़ इसी व्यापक अभियान के तहत की गई कार्रवाई के रूप में सामने आया है।
अब आपूर्ति नेटवर्क और अन्य संभावित कड़ियों की जांच
छापेमारी के बाद जांच का अगला चरण जब्त पदार्थों के स्रोतों की पहचान करना, प्रयोगशालाओं के संचालन से जुड़े लोगों का पता लगाना और संभावित खरीदारों तथा आपूर्तिकर्ताओं तक पहुंचना होगा।
जांच एजेंसी यह भी पता लगा सकती है कि रसायन और उपकरण वैध माध्यमों से खरीदे गए थे या नहीं और क्या उनका इस्तेमाल कथित तौर पर अवैध नशीले पदार्थों के निर्माण में किया जा रहा था। कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार पदार्थों के संभावित गंतव्यों का पता लगाने से नेटवर्क की अन्य कड़ियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
दो स्थानों से 379.740 किलोग्राम एम्फेटामाइन युक्त पदार्थ, 10 किलोग्राम स्यूडोएफेड्रिन और निर्माण संबंधी उपकरणों की बरामदगी इस अभियान का प्रमुख परिणाम है। कच्चे और अर्ध-निर्मित पदार्थों से लगभग 56 किलोग्राम क्रिस्टलीय एम्फेटामाइन तैयार होने का अनुमान भी मामले की गंभीरता को रेखांकित करता है।
एनसीबी की यह कार्रवाई देश में अवैध नशीले पदार्थों के निर्माण और तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है। फिलहाल, मामले की जांच जारी है। बरामद साक्ष्यों के विश्लेषण के साथ कथित गतिविधियों, आपूर्ति नेटवर्क और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका से जुड़े और तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
