गुरुग्राम साइबर पुलिस ने ग्राहकों की KYC और लाइव फोटो का कथित दुरुपयोग कर फर्जी SIM जारी करने और उन्हें साइबर ठगों तक पहुंचाने के आरोप में कानपुर निवासी POS एजेंट को गिरफ्तार किया है।

KYC और लाइव फोटो से बनाता था फर्जी SIM, छह महीने में 50 नंबर साइबर ठगों को बेचे; गुरुग्राम पुलिस ने कानपुर से दबोचा

Team The420
5 Min Read

गुरुग्राम। ग्राहकों की KYC और लाइव फोटो का कथित दुरुपयोग कर उनकी जानकारी के बिना अतिरिक्त SIM कार्ड जारी कराने और फिर उन्हें साइबर ठगों को बेचने का मामला सामने आया है। गुरुग्राम साइबर पुलिस ने इस मामले में कानपुर निवासी विनय शर्मा को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी एक टेलीकॉम कंपनी के प्वाइंट ऑफ सेल (POS) एजेंट के तौर पर काम करता था और करीब छह महीने में लगभग 50 फर्जी SIM साइबर अपराधियों को उपलब्ध करा चुका था। पुलिस अब उसके नेटवर्क और अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है।

पुलिस के मुताबिक विनय शर्मा ग्राहकों के SIM जारी कराने के लिए KYC दस्तावेज और लाइव फोटो लेता था। आरोप है कि वह इसी जानकारी का इस्तेमाल कर ग्राहकों की जानकारी के बिना उनके नाम पर अतिरिक्त SIM सक्रिय कर देता था। बाद में इन SIM कार्ड को अपने साथियों के माध्यम से साइबर ठगों तक पहुंचाता था। इसके बदले उसे कमीशन मिलने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि ऐसे SIM का इस्तेमाल साइबर अपराधों में किया जा रहा था।

मामले का खुलासा गुरुग्राम में दर्ज एक साइबर ठगी की जांच के दौरान हुआ। पुलिस के अनुसार 13 फरवरी को एक फैक्ट्री मालिक ने साइबर थाना पश्चिम में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह कुकिंग ऑयल फैक्ट्री चलाता है और मूंगफली खरीदने के लिए एक विक्रेता से संपर्क किया था। बातचीत के बाद उसने 2,000 किलो मूंगफली के लिए ₹1.71 लाख अग्रिम राशि के तौर पर ट्रांसफर कर दिए।

FCRF Launches CP-FRM to Build India’s Next Generation of Fraud Risk Professionals

पैसे मिलने के बाद आरोपी पक्ष कथित तौर पर माल भेजने का भरोसा देता रहा, लेकिन बाद में संपर्क से बाहर हो गया। इसके बाद पीड़ित ने साइबर पुलिस से शिकायत की। जांच के दौरान पुलिस ने उस मोबाइल नंबर की पड़ताल की, जिसका इस्तेमाल कथित ठगी में किया गया था। तकनीकी जांच में सामने आया कि यह नंबर विनय शर्मा के जरिए साइबर ठगों तक पहुंचाया गया था।

पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल नंबर से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के आधार पर बुधवार को विनय शर्मा को कानपुर से गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह करीब छह महीने से इस तरह SIM कार्ड उपलब्ध करा रहा था। पुलिस के अनुसार उसने लगभग 50 फर्जी SIM साइबर ठगों को दिए और इसके बदले करीब ₹1 लाख कमीशन के रूप में हासिल किए।

जांच में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने किन ग्राहकों की KYC का इस्तेमाल किया और उनके नाम पर कितने अतिरिक्त SIM जारी हुए। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन SIM कार्ड का इस्तेमाल किन-किन साइबर अपराधों में किया गया। पुलिस आरोपी के बैंक लेनदेन, मोबाइल रिकॉर्ड, SIM सक्रियण संबंधी विवरण और उसके संपर्क में रहे लोगों की जानकारी भी खंगाल रही है।

इस तरह के मामलों में किसी ग्राहक के पहचान दस्तावेज और मोबाइल कनेक्शन की जानकारी का दुरुपयोग साइबर अपराधियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। ग्राहक को अक्सर तब पता चलता है कि उसके नाम पर अतिरिक्त SIM जारी हुआ है, जब उस नंबर का इस्तेमाल किसी अपराध में होने के बाद जांच शुरू होती है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी अकेले यह काम कर रहा था या उसके पीछे SIM उपलब्ध कराने और साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल करने वाला बड़ा नेटवर्क सक्रिय था।

गुरुग्राम साइबर पुलिस के मुताबिक आरोपी से पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस उसके कथित साथियों की पहचान और उन साइबर अपराधों का पता लगाने में जुटी है, जिनमें उसके जरिए उपलब्ध कराए गए SIM कार्ड इस्तेमाल हुए।

हमसे जुड़ें

Share This Article