गुरुग्राम: गुरुग्राम पुलिस ने साइबर ठगी के एक मामले में ग्वालियर निवासी 24 वर्षीय पूर्व ऑटो चालक को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान जय वर्मा उर्फ बिट्टू के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, वह कथित तौर पर 5% कमीशन पर साइबर ठगी करने वाले गिरोह के लिए काम करता था और ठगी की रकम को सोने में बदलने में मदद करता था। जिस मामले में उसकी गिरफ्तारी हुई, उसमें एक व्यक्ति के बैंक खाते से कथित तौर पर ₹18.31 लाख की ठगी की गई थी।
पुलिस के अनुसार, ठगी की रकम में से ₹3.31 लाख सीधे एक ज्वेलरी शॉप के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। आरोप है कि जय वर्मा ने साइबर ठगों के निर्देश पर इस रकम से सोना खरीदा और बाद में उसे दूसरे व्यक्ति को बेच दिया। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर गिरोह को बैंक खाते उपलब्ध कराने और साइबर अपराध से हासिल रकम को ठिकाने लगाने में मदद करता था।
मामला 25 जून को सामने आया, जब पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित के मुताबिक, एक व्यक्ति ने खुद को एयरटेल कर्मचारी बताकर उसे फोन किया और सिम कार्ड को ई-सिम में बदलने के लिए राजी किया। प्रक्रिया पूरी होने के कुछ समय बाद ही उसके मोबाइल फोन का नेटवर्क बंद हो गया।
मोबाइल नेटवर्क बंद रहने के दौरान उसके HSBC बैंक खाते से सात अनधिकृत RTGS और NEFT लेनदेन के जरिए ₹18.31 लाख ट्रांसफर कर दिए गए। पीड़ित को जब खाते से रकम निकलने की जानकारी हुई तो उसने पुलिस से संपर्क किया। इसके बाद साइबर क्राइम साउथ थाने में मामला दर्ज किया गया।
जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और बैंकिंग लेनदेन की पूरी कड़ी का विश्लेषण शुरू किया। रकम किन खातों में गई, इसकी पड़ताल के दौरान ₹3.31 लाख एक ज्वेलरी शॉप के बैंक खाते में पहुंचने की जानकारी मिली। इसके बाद जांचकर्ताओं ने इस लेनदेन को जय वर्मा से जोड़ते हुए उसकी भूमिका की पड़ताल की। वह पहले ग्वालियर में ऑटो रिक्शा चलाता था।
बैंक खाते और लेनदेन की कड़ी का पता लगाने के बाद पुलिस ने सोमवार को जय वर्मा को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया कि साइबर ठगी की रकम में से ₹3.31 लाख ज्वेलरी शॉप में भेजे गए थे। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने साइबर ठगों के निर्देश पर ज्वेलरी शॉप से सोना खरीदा और बाद में उसे दूसरे व्यक्ति को बेच दिया।
गुरुग्राम साइबर टीम ने संबंधित बैंक खाते को ट्रेस कर रकम को होल्ड करा दिया। इसके बाद ज्वेलरी शॉप के मालिक ने ग्वालियर में जय वर्मा के खिलाफ अलग से धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर उसे वहां भी गिरफ्तार किया गया।
पुलिस पूछताछ में कथित तौर पर यह भी सामने आया कि जय वर्मा साइबर ठगी के गिरोह के लिए 5% कमीशन पर काम करता था। जांच के अनुसार, उसकी भूमिका केवल बैंक खातों में रकम प्राप्त करने या ट्रांसफर करने तक सीमित नहीं थी। वह कथित तौर पर ठगी की रकम से सोना खरीदता, उसे दूसरे लोगों तक पहुंचाता और अपराध से हासिल रकम को ठिकाने लगाने में गिरोह की मदद करता था।
अब पुलिस पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच कर रही है। जांचकर्ताओं का उद्देश्य यह पता लगाना है कि आरोपी ने कुल कितनी रकम संभाली और उसके संपर्क में गिरोह के कितने सदस्य थे। उसके द्वारा उपलब्ध कराए गए कथित बैंक खातों और उन लोगों की भी जांच की जा रही है, जिन्हें सोना या ठगी की रकम पहुंचाई गई।
आरोपी को चार दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पुलिस उसके मोबाइल फोन, बैंक रिकॉर्ड और साइबर गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ कथित संपर्क की जांच कर रही है। इससे गिरोह के व्यापक नेटवर्क और पैसों के प्रवाह का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
यह मामला दिखाता है कि साइबर ठग ठगी की रकम को सीधे अपने पास रखने के बजाय अलग-अलग बैंक खातों, खरीदारी और बिचौलियों के जरिए आगे बढ़ाते हैं। सोना खरीदकर रकम को परिवर्तित करना भी पैसे की मूल कड़ी छिपाने का एक तरीका हो सकता है। पुलिस अब बाकी रकम का पता लगाने और गिरोह के अन्य संदिग्ध सदस्यों की पहचान करने में जुटी है।
