गुवाहाटी: असम के बरपेटा जिले से 25 वर्षीय एक युवक को देशभर में फैले कथित साइबर ठगी नेटवर्क के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है। जांच में इस नेटवर्क से करीब ₹1,173 करोड़ की संदिग्ध साइबर ठगी और 1,042 मामलों का संबंध सामने आने का दावा किया गया है। गुजरात के गांधीनगर स्थित साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CCoE) की टीम ने तकनीकी जांच और तीन दिन तक अंडरकवर निगरानी के बाद आरोपी रफीकुल आलम को गिरफ्तार किया। कार्रवाई के दौरान उसके पास से साइबर अपराध में इस्तेमाल किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक और तकनीकी उपकरण भी बरामद किए गए।
गुजरात पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान अब तक 1,753 बैंक खातों को देशभर में दर्ज 1,042 साइबर अपराध मामलों से जोड़ा गया है। इन मामलों में संदिग्ध ठगी की कुल रकम करीब ₹1,173 करोड़ आंकी गई है। जांच एजेंसियों का मानना है कि नेटवर्क का संचालन कई स्तरों पर किया जा रहा था और बैंक खातों के जरिए ठगी की रकम को अलग-अलग जगहों पर भेजा जाता था।
इस कार्रवाई का सबसे अहम पहलू यह रहा कि कथित नेटवर्क के एक महत्वपूर्ण ऑपरेटर तक पहुंचने के बाद जांचकर्ताओं को 10 ऐसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामलों की जानकारी मिली, जिनमें पीड़ित उस समय भी साइबर अपराधियों के नियंत्रण में थे। ठग उन्हें लगातार फोन या वीडियो कॉल पर रखकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव बना रहे थे।
जानकारी मिलने के बाद CCoE की टीमों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में पीड़ितों के घर पहुंचकर हस्तक्षेप किया और उन्हें ठगी से बचाया। इनमें अहमदाबाद, सूरत और जामनगर के वरिष्ठ नागरिक भी शामिल थे। कुछ पीड़ित कथित तौर पर अपनी सावधि जमा यानी FD तोड़ चुके थे और ठगों की मांग पूरी करने के लिए दुकान या संपत्ति बेचने की तैयारी कर रहे थे।
समय रहते पुलिस की कार्रवाई के कारण इन पीड़ितों को आगे की रकम ट्रांसफर करने से रोका जा सका। गुजरात में कम से कम तीन मामलों में साइबर टीमों के पीड़ितों के घर पहुंचने और तत्काल सहायता तथा काउंसलिंग देने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक, इस हस्तक्षेप से न केवल संभावित आर्थिक नुकसान रोका गया, बल्कि ठगी के दौरान सक्रिय नेटवर्क को भी बाधित किया गया।
तकनीकी जांच के दौरान रफीकुल आलम के कथित संबंध चीन से जुड़े साइबर अपराध नेटवर्क से होने के संकेत भी मिले हैं। जांच में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लेनदेन का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन कड़ियों की पुष्टि के लिए वित्तीय लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत जांच की जा रही है।
गुजरात की टीम ने आरोपी तक पहुंचने के लिए डिजिटल ट्रेल, तकनीकी विश्लेषण और निगरानी का सहारा लिया। बरपेटा में तीन दिन तक अंडरकवर ऑपरेशन चलाने के बाद आरोपी को पकड़ा गया। पुलिस अब उसके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।
‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी का वह तरीका है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI या अन्य सरकारी एजेंसियों के अधिकारी बताकर लोगों पर किसी अपराध में शामिल होने का आरोप लगाते हैं। इसके बाद पीड़ित को वीडियो कॉल या फोन पर लगातार निगरानी में रखने का दबाव बनाया जाता है और जांच या गिरफ्तारी से बचने के नाम पर रकम ट्रांसफर कराई जाती है।
गुजरात पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई में एक आरोपी की गिरफ्तारी के साथ 10 चल रहे डिजिटल अरेस्ट मामलों को वास्तविक समय में रोका गया। पुलिस अब नेटवर्क के बैंक खातों, क्रिप्टो लेनदेन, डिजिटल उपकरणों और संभावित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जांच कर रही है। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
