लखनऊ: राजधानी में बाहर से आने वाले लोगों को सस्ते दाम पर कमरा दिलाने के बहाने डेटिंग ऐप के जरिए फंसाकर ब्लैकमेल और वसूली करने वाले कथित गिरोह का बाजारखाला पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह ने रेलवे की परीक्षा देने लखनऊ पहुंचे एक युवक को पहले सस्ते कमरे का झांसा दिया और फिर उसे सुनसान स्थान पर ले जाकर डेटिंग ऐप पर अश्लील सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाकर धमकाया। इसके बाद मारपीट और नशीला पदार्थ पिलाने के आरोपों के बीच उससे पांच बार में कुल ₹90 हजार ऑनलाइन ट्रांसफर कराए गए।
मामला 10 अगस्त की रात का है। मऊ जिले के मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र के सरयां गांव निवासी 29 वर्षीय सुधाकर पाल कैफियत एक्सप्रेस से ऐशबाग रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। अगले दिन 11 अगस्त को उनकी रेलवे की परीक्षा थी। परीक्षा के लिए लखनऊ आए सुधाकर स्टेशन के आसपास ठहरने के लिए कमरे की तलाश कर रहे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात एक युवक से हुई। आरोप है कि युवक ने ग्राइंडर डेटिंग ऐप के माध्यम से सस्ते दाम पर कमरा दिलाने की बात कहकर उन्हें भरोसे में लिया और चारबाग रेलवे स्टेशन आने को कहा।
सुधाकर के चारबाग पहुंचने के बाद कुछ अन्य युवक भी वहां आ गए। आरोप है कि इन लोगों ने कमरे की व्यवस्था कराने के बहाने सुधाकर को एक सुनसान स्थान पर पहुंचाया। वहां कथित आरोपियों ने उन्हें ग्राइंडर ऐप पर अश्लील सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाकर डराना और धमकाना शुरू कर दिया। पीड़ित की शिकायत के मुताबिक, इसके बाद उसके साथ मारपीट की गई और उसे दबाव में लेकर पैसे देने के लिए मजबूर किया गया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने पानी में नशीला पदार्थ मिलाकर सुधाकर को जबरन पिलाया। इसके बाद उसके मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पांच अलग-अलग लेनदेन में कुल ₹90 हजार ऑनलाइन ट्रांसफर कराए गए। रकम हासिल करने के बाद आरोपियों ने उसका मोबाइल फोन भी तोड़ दिया। घटना के बाद जब सुधाकर को होश आया तो उन्होंने किसी तरह मदद हासिल की और बाजारखाला थाने पहुंचकर पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। जांचकर्ताओं ने कथित वसूली से जुड़े बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की जानकारी जुटाई। इसके अलावा संदिग्ध मोबाइल नंबरों की निगरानी और घटनास्थल तथा आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई। इन सुरागों के आधार पर पुलिस ने शनिवार को ऐशबाग रेलवे स्टेशन के पास से आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों में चिनहट के कमता निवासी राज, निखिल रावत, अभिजीत राजपूत, राज राजपूत, मेराज अहमद, आदित्य वर्मा, अधिवक्ता धीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ धीरज सिंह और निसार अहमद शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, मेराज मूल रूप से बहराइच, आदित्य वर्मा गाजियाबाद और धीरेंद्र प्रताप सिंह प्रतापगढ़ का रहने वाला है। जांच में अधिवक्ता धीरेंद्र प्रताप सिंह को कथित गिरोह का सरगना बताया गया है।
पुलिस के मुताबिक, धीरेंद्र के खिलाफ प्रतापगढ़ के पट्टी थाने में मारपीट के तीन मामले पहले से दर्ज हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार आरोपियों ने इसी तरीके से अन्य लोगों को भी निशाना बनाया था या नहीं। जांचकर्ताओं को संदेह है कि गिरोह बाहर से लखनऊ आने वाले ऐसे लोगों की तलाश करता था, जिन्हें कम समय के लिए कमरा चाहिए होता था और जो शहर से अपरिचित होते थे।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बिना नंबर की एक स्कूटी, दो बाइक और वारदात में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन बरामद किया है। बरामद मोबाइल और बैंकिंग लेनदेन की जांच के जरिए पुलिस कथित गिरोह की गतिविधियों और संभावित अन्य पीड़ितों की जानकारी जुटा रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि आरोपियों ने डेटिंग ऐप पर लोगों से संपर्क करने के बाद उनकी निजी जानकारी का इस्तेमाल किस तरह किया।
पुलिस के अनुसार, ऐसे मामलों में डेटिंग और सोशल नेटवर्किंग ऐप का इस्तेमाल करने वालों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। किसी अपरिचित व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में कोई नया ऐप डाउनलोड नहीं करना चाहिए और निजी जानकारी या लाइव लोकेशन साझा करने से बचना चाहिए। पहली मुलाकात हमेशा सार्वजनिक स्थान पर करनी चाहिए और किसी विश्वसनीय व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति निजी बातचीत, तस्वीरों या डेटिंग ऐप की गतिविधियों के नाम पर ब्लैकमेल कर पैसे मांगता है तो घबराकर भुगतान करने के बजाय चैट, प्रोफाइल, मोबाइल नंबर और बैंक लेनदेन से जुड़े साक्ष्य सुरक्षित रखने चाहिए। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और बरामद डिजिटल साक्ष्यों तथा आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
