कानपुर KDA में फर्जी रजिस्ट्री मामलों की जांच कर्मचारियों के बाद अधिकारियों तक पहुंचने की संभावना है।

कानपुर KDA में फर्जी रजिस्ट्री का बड़ा खेल, कर्मचारियों के बाद अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तैयारी

Team The420
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कानपुर: कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) में फर्जी रजिस्ट्री के मामलों की नए सिरे से शुरू हुई जांच अब कर्मचारियों के साथ कई अधिकारियों तक पहुंच सकती है। जांच में फर्जी दस्तावेज, आवंटी की पहचान बदलने और मृत व्यक्ति को रिकॉर्ड में जिंदा दिखाने जैसे मामलों की जानकारी सामने आई है। रतनपुर एक्सटेंशन के एक भूखंड की रजिस्ट्री से जुड़े मामले में फर्जी आवंटी बनकर पहुंची महिला समेत गवाहों और KDA के कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

जोन-दो के मामलों की जांच में सामने आई गड़बड़ी

KDA में फर्जी रजिस्ट्री के मामलों की जांच के दौरान जोन-दो से जुड़े एक प्रकरण में महिला आवंटी की फोटो बदलने का मामला सामने आया। जांच में यह भी पता चला कि एक मृत व्यक्ति को रिकॉर्ड में जिंदा दिखाकर रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की कोशिश की गई थी। इन घटनाओं के सामने आने के बाद रजिस्ट्री प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है।

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प्राधिकरण अब पुराने मामलों की फाइलों की भी दोबारा जांच कर रहा है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि फर्जी रजिस्ट्री केवल कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से हुई या इसमें उच्च स्तर पर भी किसी तरह की भूमिका रही।

रतनपुर एक्सटेंशन में फर्जी आवंटी बनकर पहुंची महिला

रतनपुर एक्सटेंशन के दक्षिण-पूर्वी कोने में स्थित भूखंड संख्या ए-3 का आवंटन रमणी नाम की महिला के पक्ष में किया गया था। भूखंड का बकाया भुगतान और रजिस्ट्री से संबंधित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जब रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ी तो दस्तावेजों और प्रस्तुत व्यक्ति की पहचान की जांच की गई।

जांच के दौरान सामने आया कि खुद को रमणी बताकर रजिस्ट्री कराने पहुंची महिला असली आवंटी नहीं थी। पहचान में अंतर सामने आने के बाद KDA ने तत्काल भूखंड की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी। इसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू की गई और दस्तावेजों की पड़ताल की गई।

छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

इस मामले में फर्जी आवंटी बनी महिला के अलावा गवाह अभिषेक सचान और आनंद कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराया गया है। KDA के कर्मचारी जितेंद्र कुमार, अरविंद गुप्ता और केशव प्रसाद मिश्रा को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस और प्राधिकरण अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि फर्जी पहचान तैयार करने और रजिस्ट्री प्रक्रिया आगे बढ़ाने में किसकी क्या भूमिका थी।

इसी भूखंड के बगल में स्थित दूसरे प्लॉट में भी इसी तरह का फर्जीवाड़ा सामने आया है। इससे जांच एजेंसियों का संदेह और गहरा गया है कि एक ही इलाके में रजिस्ट्री से जुड़े मामलों में व्यवस्थित तरीके से रिकॉर्ड और पहचान में हेरफेर किया गया हो सकता है।

पनकी में 50 फर्जी रजिस्ट्री का रिकॉर्ड

KDA में फर्जी रजिस्ट्री का मामला नया नहीं है। पनकी क्षेत्र में पहले ही करीब 50 फर्जी रजिस्ट्री के मामले पकड़े जा चुके हैं। वर्ष 2008 से लगातार इस तरह के मामले सामने आने की जानकारी दी गई है। अब पुराने और नए मामलों को जोड़कर जांच किए जाने से प्राधिकरण के भीतर लंबे समय से चल रहे कथित फर्जीवाड़े की परतें खुलने की संभावना है।

जांच में यह भी देखा जा रहा है कि फर्जी रजिस्ट्री के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, रिकॉर्ड में किस स्तर पर बदलाव किए गए और संबंधित फाइलों को मंजूरी देने की प्रक्रिया में कौन-कौन अधिकारी या कर्मचारी शामिल थे।

सुजातगंज और इंदिरा नगर में भी कार्रवाई

सुजातगंज में दो भूखंडों की रजिस्ट्री से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले सामने आने के बाद कर्मचारी एजाज अंसारी को कार्यमुक्त किया जा चुका है। इंदिरा नगर के एक फर्जी रजिस्ट्री मामले में कर्मचारी प्रदीप को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। इसी तरह के एक अन्य मामले में KDA के सचिव स्तर के अधिकारी को भी निलंबित किया गया था।

अब नए मामलों की जांच में अधिकारियों की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ भी विभागीय या कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। KDA के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि फर्जी दस्तावेज तैयार होने से लेकर रजिस्ट्री की प्रक्रिया तक किस स्तर पर लापरवाही या कथित मिलीभगत हुई। जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदारी तय होने की उम्मीद है।

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