अलीगढ़ पुलिस ने नाबालिग बच्चियों की कथित मानव तस्करी करने वाले गिरोह का खुलासा कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

अलीगढ़ में मानव तस्करी का खुलासा, ₹50 हजार से ₹1 लाख में बच्चियों का सौदा; 5 आरोपी गिरफ्तार

Team The420
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अलीगढ़: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में पुलिस ने नाबालिग बच्चियों की कथित मानव तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों के गरीब और आदिवासी परिवारों को निशाना बनाता था। बच्चियों को पढ़ाई, सिलाई-कढ़ाई और बेहतर भविष्य का झांसा देकर उनके परिवारों से संपर्क किया जाता था। इसके बाद उन्हें ट्रेन से अलीगढ़ लाकर कथित तौर पर 50 हजार से ₹1 लाख तक में खरीदारों को सौंप दिया जाता था। गिरोह में शामिल लोग इन बच्चियों को शादी के नाम पर दूसरे लोगों के साथ भेजने का काम करते थे।

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पुलिस की जांच में गिरोह की कथित सरगना 45 वर्षीय बबीता उर्फ चाची का नाम सामने आया है। उसके अलावा सुखराम उर्फ सूखा उर्फ महावीर फौजदार, विनोद, ओमपाल सिंह और बबलू को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया।

16 साल की लड़की की एक कॉल से खुला राज

मामले का खुलासा तब हुआ जब अलीगढ़ में रह रही 16 साल की एक किशोरी ने किसी तरह अपने मोबाइल फोन से पुलिस को सूचना दी। उसने बताया कि उसे शादी के नाम पर अलीगढ़ लाकर बेच दिया गया है और बंधक बनाकर रखा गया है। किशोरी की सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने जांच शुरू की और उसके जरिए गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश की।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गिरोह गरीब परिवारों की बेटियों को अपने जाल में फंसाता था। कथित सरगना बबीता छत्तीसगढ़ के ऐसे इलाकों में जाती थी, जहां परिवार आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे थे। आरोप है कि वह परिजनों को भरोसा दिलाती थी कि उनकी बेटी को शहर ले जाकर पढ़ाया-लिखाया जाएगा, सिलाई-कढ़ाई सिखाई जाएगी और परिवार को हर महीने आर्थिक मदद भी भेजी जाएगी।

ट्रेन से अलीगढ़ लाकर खरीदारों को सौंपने का आरोप

पुलिस के अनुसार, भरोसा जीतने के बाद बच्चियों को छत्तीसगढ़ से ट्रेन के जरिए अलीगढ़ लाया जाता था। यहां उन्हें गौंडा क्षेत्र के सुखराम उर्फ सूखा के कथित नेटवर्क के हवाले किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि सुखराम ने अपनी पहचान बदलकर अलीगढ़ में रहना शुरू कर दिया था।

आरोप है कि इसके बाद बच्चियों के लिए खरीदार तलाशे जाते थे। गिरोह में शामिल लोग उनकी तस्वीरें और जानकारी संभावित खरीदारों तक पहुंचाते थे। सौदा तय होने के बाद रकम लेकर बच्चियों को उनके साथ भेज दिया जाता था।

₹50 हजार से ₹1 लाख तक में होता था सौदा

पुलिस की जांच के मुताबिक, बच्चियों की कीमत उनकी उम्र और परिस्थितियों के आधार पर 50 हजार से ₹1 लाख तक तय की जाती थी। कुछ खरीदार उन्हें पत्नी बनाकर रखने के उद्देश्य से खरीदते थे। एक मामले में सुखराम पर रायपुर रेलवे स्टेशन से एक लड़की को ₹70 हजार में टप्पल के गौंडा निवासी विनोद को बेचने का आरोप है।

इसी तरह ओमपाल सिंह पर करीब पांच महीने पहले बबीता से ₹50 हजार में एक लड़की खरीदने का आरोप है। एक अन्य मामले में बबलू ने ₹80 हजार में एक लड़की खरीदी थी। पुलिस के अनुसार, उसे कुछ दिन रखने के बाद वापस कर दिया गया और इसके बाद दूसरी बच्ची की तस्वीर भेजकर नया सौदा करने की कोशिश की गई।

सौदा होने से पहले बच्ची बरामद

पुलिस ने बताया कि बबीता ने बबलू को दूसरी बच्ची की तस्वीर भेजी थी। हालांकि, नया सौदा पूरा होने से पहले ही पुलिस ने उस बच्ची को बबीता के कब्जे से बरामद कर लिया। इसके बाद जांच में गिरोह के नेटवर्क और उसके कथित खरीदारों की जानकारी सामने आती गई।

पुलिस ने रेस्क्यू की गई बच्चियों को वन स्टॉप सेंटर भेजकर उनका मेडिकल परीक्षण और काउंसलिंग कराई है। मजिस्ट्रेट के समक्ष उनके बयान दर्ज कराए जाएंगे। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के अनुसार उन्हें उनके परिजनों को सौंपने की कार्रवाई की जाएगी।

चैट और रिकॉर्ड मिटाने का भी आरोप

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य फोन पर बातचीत करने के बाद कथित तौर पर चैट और अन्य रिकॉर्ड डिलीट कर देते थे, ताकि पुलिस को पर्याप्त डिजिटल सुराग न मिल सकें। अब पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्कों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह ने अब तक कितनी बच्चियों को निशाना बनाया और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।

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