2022 से 2026 तक के भर्ती रिकॉर्ड की जांच में सामने आए नए मामले; BSF, ITBP, CISF और CRPF से जुड़े उम्मीदवारों के दस्तावेज संदिग्ध, प्रशासन ने भर्ती एजेंसियों को भेजी रिपोर्ट

असम में फर्जी PRC का जाल! 11 और उम्मीदवारों पर नौकरी हथियाने के लिए जाली प्रमाणपत्र इस्तेमाल करने का आरोप

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By Roopa
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जोरहाट: असम के जोरहाट जिले में फर्जी Permanent Resident Certificate (PRC) के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के कथित मामले लगातार सामने आ रहे हैं। जिला प्रशासन ने 2022 से 2026 के बीच हुई भर्तियों के पुराने रिकॉर्ड की जांच के दौरान 11 और ऐसे उम्मीदवारों की पहचान की है, जिन पर असम या जोरहाट का निवासी होने का दावा करने के लिए कथित तौर पर फर्जी PRC या domicile certificate इस्तेमाल करने का आरोप है। इनमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से जुड़े उम्मीदवार भी शामिल हैं। प्रशासन ने सत्यापन से जुड़े दस्तावेज और FIR की प्रतियां संबंधित भर्ती एजेंसियों तथा बटालियनों को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दी हैं।

जोरहाट के Additional Deputy Commissioner पंकज बोरा के मुताबिक, भर्ती रिकॉर्ड की दोबारा जांच में इन 11 उम्मीदवारों के प्रमाणपत्रों में गंभीर विसंगतियां मिलीं। प्रशासन का आरोप है कि ये उम्मीदवार असम के वास्तविक निवासी नहीं थे, लेकिन उन्होंने खुद को जोरहाट या असम का स्थानीय निवासी दर्शाकर उन भर्तियों में आवेदन किया, जहां domicile से जुड़ी पात्रता लागू थी। कुछ उम्मीदवार कथित तौर पर चयनित भी हो चुके हैं।

BSF, ITBP, CISF और CRPF से जुड़े नाम

प्रशासन की जांच में सामने आए 11 नामों में BSF से जुड़े अर्जुन सिनवार, नेत्र पाल, सतीश चंद्र, नरेंद्र कुमार, हरगोबिंद सिंह और दानबीर सिंह शामिल हैं। ITBP से जुड़े अरुण मीणा का नाम सामने आया है। CISF से जुड़े राहुल सिंह, पवन कुमार और अमन कुमार पटेल तथा CRPF से जुड़े गिरीश चंद्र की भी पहचान की गई है।

अधिकारियों के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब भर्ती एजेंसियों ने उम्मीदवारों की ओर से जमा किए गए प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए जिला प्रशासन से संपर्क किया। जांच के दौरान कुछ प्रमाणपत्रों पर दर्ज नंबर ऐसे दस्तावेजों से जुड़े पाए गए, जो संबंधित उम्मीदवारों के domicile certificate नहीं थे। प्रशासन को कुछ मामलों में फर्जी caste certificate के इस्तेमाल की भी जानकारी मिली।

प्रमाणपत्र सत्यापन में खुली पोल

जिला प्रशासन के मुताबिक, दस्तावेजों की जांच के दौरान यह पाया गया कि प्रमाणपत्रों पर दिए गए नंबर और वास्तविक सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद प्रमाणपत्रों के बीच मेल नहीं था। इससे आशंका मजबूत हुई कि भर्ती में इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ या जालसाजी की गई थी।

प्रशासन ने इन मामलों से संबंधित FIR और verification findings की प्रतियां संबंधित भर्ती एजेंसियों और संबंधित बटालियनों को भेज दी हैं। अब भर्ती संस्थाएं इन उम्मीदवारों के चयन, नियुक्ति और दस्तावेजों की वैधता के आधार पर आगे की कार्रवाई तय कर सकती हैं।

अधिकारी ने सरकारी कर्मचारियों की संभावित संलिप्तता पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया। उनका कहना है कि PRC जारी करने की प्रक्रिया में ऑनलाइन सत्यापन की व्यवस्था होने के कारण डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के कर्मचारियों की भूमिका की संभावना फिलहाल स्पष्ट नहीं है। हालांकि, उन्होंने आशंका जताई कि फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने या उनमें बदलाव करने के लिए Artificial Intelligence आधारित टूल और अन्य सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।

जून में भी सामने आया था ऐसा मामला

जोरहाट में सामने आए ताजा मामले को जून 2026 में उजागर हुए एक अन्य फर्जी प्रमाणपत्र मामले से जोड़कर देखा जा रहा है। उस समय छह गैर-असमिया युवकों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की भर्ती में आवेदन करने के लिए कथित तौर पर फर्जी PRC और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल करने का आरोप लगा था। CISF, CRPF और BSF की ओर से दस्तावेज सत्यापन का अनुरोध मिलने के बाद प्रशासन को गड़बड़ी का पता चला था और छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी।

नए मामलों में भी दस्तावेजों का पैटर्न पहले सामने आए मामलों से मिलता-जुलता बताया गया है। इससे अधिकारियों को आशंका है कि यह केवल अलग-अलग उम्मीदवारों की जालसाजी नहीं, बल्कि फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने और भर्ती प्रक्रिया में इस्तेमाल कराने वाला संगठित नेटवर्क हो सकता है।

दूसरे जिलों तक फैला हो सकता है नेटवर्क

जोरहाट प्रशासन का कहना है कि फर्जी PRC और domicile certificate से जुड़े मामले केवल इसी जिले तक सीमित नहीं हैं। संबंधित अधिकारी ने बताया कि सोनितपुर में भी उनके कार्यकाल के दौरान ऐसे मामलों का सामना हुआ था और कार्रवाई की गई थी। इससे असम के अन्य जिलों में भी इसी तरह की जालसाजी की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।

सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि गैर-स्थानीय उम्मीदवार फर्जी दस्तावेजों के आधार पर domicile आधारित भर्ती में चयन हासिल करते हैं, तो इससे उन स्थानीय युवाओं के अवसर प्रभावित हो सकते हैं जो वास्तव में पात्र हैं। प्रशासन अब भर्ती से जुड़े प्रमाणपत्रों की जांच जारी रखे हुए है। पुराने रिकॉर्ड और नए सत्यापन की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर और उम्मीदवारों, फर्जी दस्तावेजों तथा संभावित नेटवर्क से जुड़े नए मामलों का खुलासा होने की संभावना है।

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