जयपुर में 90 वर्षीय पूर्व जिला जज को कथित तौर पर फर्जी CBI अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट में रखकर ₹2.50 करोड़ की ठगी की गई।

90 साल के पूर्व जिला जज को 15 दिन ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर ₹2.50 करोड़ की ठगी

Team The420
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जयपुर: राजस्थान के जयपुर में 90 वर्षीय पूर्व जिला जज गणपत सिंह भंडारी को कथित साइबर ठगों ने करीब 15 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर ₹2 करोड़ 50 लाख 51 हजार की ठगी कर ली। आरोपियों ने खुद को केंद्रीय जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर पूर्व जज को मुंबई में सामने आए कथित ₹50 करोड़ के हवाला लेनदेन से जोड़ दिया। उन्हें बताया गया कि उनके SBI खाते में ₹40 लाख की संदिग्ध रकम पहुंची है और यदि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार कर मुंबई ले जाया जाएगा। लगातार वीडियो कॉल के जरिए निगरानी रखने के दौरान आरोपियों ने अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करा ली।

फर्जी CBI अधिकारी ने वीडियो कॉल पर दी धमकी

शिकायत के मुताबिक, 28 जुलाई को पूर्व जज के WhatsApp पर वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाला व्यक्ति पुलिस की वर्दी में दिखाई दे रहा था और उसने खुद को मुंबई से CBI अधिकारी बताया। इसके बाद कथित ठगों ने बातचीत को जांच की कार्रवाई का रूप देते हुए उन्हें बताया कि मुंबई में ₹50 करोड़ के हवाला लेनदेन का पता चला है।

आरोपियों ने दावा किया कि इस मामले से जुड़े लेनदेन में पूर्व जज का बैंक खाता भी सामने आया है और उनके SBI खाते में ₹40 लाख की रकम आई है। इसके बाद उन्हें कथित मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला मामले में फंसने की चेतावनी दी गई। आरोपियों ने गिरफ्तारी और पूछताछ के लिए मुंबई ले जाए जाने का डर दिखाया।

15 दिन तक वीडियो कॉल पर बनाए रखा दबाव

साइबर ठगों ने कथित तौर पर पूर्व जज को लगातार वीडियो कॉल पर उपलब्ध रहने के लिए मजबूर किया। उन्हें यह विश्वास दिलाया गया कि वह जांच के दायरे में हैं और किसी अन्य व्यक्ति को इसकी जानकारी देने पर कार्रवाई की जाएगी। परिवार के सदस्यों को भी मामले में शामिल न करने की धमकी दी गई।

लगातार पुलिस और जांच एजेंसी का नाम लेकर बनाए गए दबाव से पीड़ित कथित तौर पर आरोपियों की बातों में फंस गए। ठगों ने उन्हें अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करने के लिए कहा। पीड़ित के अनुसार, 3 अगस्त से 10 अगस्त के बीच कई लेनदेन किए गए।

एक दिन में ही ट्रांसफर किए ₹50.51 लाख

जांच में सामने आया है कि 3 अगस्त को ही पूर्व जज ने दो अलग-अलग बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर की। एक खाते में ₹22.17 लाख और दूसरे खाते में ₹28.34 लाख भेजे गए। यानी एक ही दिन में कुल ₹50.51 लाख ट्रांसफर किए गए।

इसके बाद भी कथित ठगों की मांग जारी रही और अलग-अलग खातों में रकम भेजने का सिलसिला चलता रहा। कुल मिलाकर पीड़ित से ₹2 करोड़ 50 लाख 51 हजार की रकम ट्रांसफर कराई गई। मामले में पुलिस अब बैंक खातों, लेनदेन और आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों तथा डिजिटल माध्यमों की जांच कर रही है।

साइबर अपराध विशेषज्ञ ने बताया ठगी का तरीका

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर अपराध का ऐसा तरीका है जिसमें ठग पुलिस, CBI, ED या अन्य जांच एजेंसियों के अधिकारी बनकर पीड़ित को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हैं। लगातार वीडियो कॉल, फर्जी दस्तावेज और गिरफ्तारी की धमकी के जरिए पीड़ित को मानसिक दबाव में रखा जाता है और उससे रकम ट्रांसफर कराई जाती है।

उनके अनुसार, किसी भी वास्तविक जांच प्रक्रिया में किसी व्यक्ति को वीडियो कॉल पर घंटों या दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर निजी बैंक खाते से रकम किसी कथित ‘सुरक्षित’ खाते में जमा कराने के निर्देश नहीं दिए जाते। ऐसे मामलों में डर के बजाय तुरंत स्वतंत्र रूप से सत्यापन करना जरूरी है।

अनजान वीडियो कॉल पर रहें सतर्क

साइबर ठगी से बचने के लिए अनजान नंबर से आने वाली वीडियो कॉल पर दिखाई देने वाली पुलिस या जांच एजेंसी की वर्दी पर भरोसा नहीं करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति फोन पर गिरफ्तारी, हवाला, मनी लॉन्ड्रिंग या बैंक खाते में संदिग्ध रकम आने का डर दिखाकर पैसे मांगता है तो तुरंत कॉल काटकर संबंधित एजेंसी के आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करना चाहिए।

किसी भी व्यक्ति को आधार, PAN, बैंक खाते की जानकारी, OTP, UPI PIN या अन्य संवेदनशील जानकारी फोन पर साझा नहीं करनी चाहिए। ठग अक्सर पीड़ित को परिवार और परिचितों से संपर्क न करने के लिए कहते हैं। ऐसी स्थिति में उनकी बात मानने के बजाय तुरंत परिवार को जानकारी देना और पुलिस की सहायता लेना जरूरी है।

वित्तीय साइबर ठगी होने पर पीड़ित को बिना देरी के 1930 पर शिकायत करनी चाहिए। जितनी जल्दी बैंक और पुलिस को सूचना दी जाती है, रकम को रोकने या उसके आगे के ट्रांसफर का पता लगाने की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है। पुलिस अब इस मामले में इस्तेमाल किए गए खातों और कथित डिजिटल नेटवर्क की कड़ियों की जांच कर रही है।

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