सरकार ने कंपनी से डीपफेक, एआई कंटेंट और दुष्प्रचार रोकने के लिए एल्गोरिदम में बदलाव का रोडमैप मांगा; मानव निगरानी बढ़ाने और भारतीय भाषाओं के विशेषज्ञों की तैनाती पर भी जोर

मेटा को प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कंटेंट की कानूनी जिम्मेदारी लेनी होगी: केंद्र की दो टूक

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By Roopa
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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा के साथ हाल में हुई बैठकों में कंपनी को स्पष्ट संदेश दिया है कि उसके मंचों पर प्रसारित होने वाले थर्ड-पार्टी कंटेंट की जिम्मेदारी से वह पूरी तरह बच नहीं सकती। सरकार ने तर्क दिया है कि जब किसी प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम और रिकमंडेशन सिस्टम यह तय करता है कि किस यूजर को कौन-सा कंटेंट दिखाया जाए और पेड कंटेंट को भी व्यापक स्तर पर पहुंचाया जाता है, तो प्लेटफॉर्म की भूमिका केवल एक निष्क्रिय मध्यस्थ तक सीमित नहीं रह जाती।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने मेटा के अधिकारियों के सामने कंटेंट मॉडरेशन, एल्गोरिदम, डीपफेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार सामग्री और अवैध कंटेंट को लेकर अपनी चिंताएं रखीं। सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद सामग्री की निगरानी और गैरकानूनी कंटेंट पर कार्रवाई के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।

आईटी एक्ट की धारा 79 का भी दिया हवाला

बैठक के दौरान सरकार की ओर से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत उपलब्ध कानूनी सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया। सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या इंटरमीडियरी को यह सुरक्षा तभी मिल सकती है, जब वह सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत निर्धारित उचित सावधानी और अन्य अनुपालनों का पालन करे।

सरकार का रुख है कि यदि कोई कंपनी निर्धारित नियमों का पालन नहीं करती है तो उसे मिलने वाली कानूनी सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में कंपनी पर सूचना प्रौद्योगिकी कानून और भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, किसी मामले में अंतिम कानूनी जिम्मेदारी तथ्यों और संबंधित कानूनों के आधार पर तय होगी।

डीपफेक और एआई कंटेंट पर सख्ती

सरकार ने मेटा के सामने डीपफेक और एआई से तैयार या बदले गए कंटेंट को लेकर भी चिंता जताई। बिना उचित लेबल के कृत्रिम या हेरफेर किए गए कंटेंट के तेजी से प्रसार को रोकने के लिए प्लेटफॉर्म की मौजूदा व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

सरकार ने मेटा से ऐसे कंटेंट की पहचान और उसे नियंत्रित करने के लिए अपने एल्गोरिदम में आवश्यक बदलाव करने को कहा है। इसके साथ ही कंपनी से इस दिशा में उठाए जाने वाले तकनीकी और प्रशासनिक कदमों का रोडमैप भी साझा करने को कहा गया है।

मानव निगरानी और भारतीय भाषाओं पर जोर

कंटेंट मॉडरेशन में केवल स्वचालित तकनीक पर निर्भरता को लेकर भी सरकार ने सवाल उठाए। सूत्रों के अनुसार, प्लेटफॉर्म को मानवीय निगरानी बढ़ाने और ऐसे कर्मचारियों की पर्याप्त तैनाती करने को कहा गया है, जो भारतीय भाषाओं और स्थानीय संदर्भों को समझते हों।

सरकार का मानना है कि भारतीय भाषाओं में प्रसारित होने वाले भ्रामक, आपत्तिजनक या अवैध कंटेंट की पहचान केवल स्वचालित प्रणालियों के भरोसे छोड़ना पर्याप्त नहीं है। स्थानीय भाषाई और सामाजिक संदर्भों को समझने वाले विशेषज्ञों की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण हो सकती है।

बाल यौन शोषण सामग्री पर तत्काल कार्रवाई

बैठकों में बाल यौन शोषण सामग्री और अन्य गंभीर रूप से हानिकारक कंटेंट से जुड़े मामलों को भी प्रमुखता से उठाया गया। सरकार ने प्लेटफॉर्म से ऐसे कंटेंट की पहचान, रिपोर्टिंग और हटाने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने तथा अधिकृत सरकारी एजेंसियों के अनुरोधों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

इसके अलावा डेटा लोकलाइजेशन से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। सरकार ने मेटा से कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली को मजबूत करने और अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की क्षमता बढ़ाने को कहा है।

अन्य सोशल मीडिया कंपनियों की भी होगी समीक्षा

मेटा के साथ चर्चा के बाद केंद्र सरकार अन्य प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की नीतियों और व्यवस्थाओं की भी समीक्षा करने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, इस संबंध में कानूनी राय भी ली जा सकती है, ताकि प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी और उपलब्ध कानूनी सुरक्षा के दायरे को लेकर स्थिति स्पष्ट की जा सके।

मेटा ने बैठक में हानिकारक और गैरकानूनी कंटेंट की पहचान तथा उसे हटाने के लिए इस्तेमाल की जा रही तकनीक और प्रस्तावित उपायों की जानकारी सरकार के साथ साझा की। दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे जारी रखने पर सहमति बनी है। सूत्रों के अनुसार, अगले सप्ताह इस मुद्दे पर एक और बैठक हो सकती है, जिसमें कंटेंट मॉडरेशन, एल्गोरिदम और कानूनी अनुपालन से जुड़े कदमों की आगे समीक्षा की जाएगी।

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