आधार सत्यापन व्यवस्था को दरकिनार कर तैयार किया गया नया नेटवर्क; 11 यात्री पकड़े गए, फर्जी टिकट और एडिट किए गए आधार कार्ड बरामद, कई दलालों की तलाश जारी

रेलवे के तत्काल टिकट सिस्टम में सेंध: मुंबई से बुक, गोरखपुर में प्रिंट, फर्जी पहचान के सहारे यात्रियों को बेचे जा रहे थे टिकट

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By Roopa
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गोरखपुर। रेलवे के तत्काल टिकट सिस्टम में कथित तौर पर सेंध लगाकर यात्रियों को ऊंचे दामों पर टिकट बेचने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। जांच में सामने आया है कि दलाल मुंबई से तत्काल टिकट बुक कर उन्हें डिजिटल माध्यम से गोरखपुर भेजते थे, जहां उन टिकटों का प्रिंट निकालकर उन्हें रेलवे काउंटर से जारी वास्तविक टिकट जैसा स्वरूप दिया जाता था। इसके बाद इन्हें जरूरतमंद यात्रियों को अधिक कीमत पर बेच दिया जाता था।

मामले का खुलासा उस समय हुआ जब गोरखपुर से लोकमान्य तिलक टर्मिनस (एलटीटी) जा रही कुशीनगर एक्सप्रेस में टिकट जांच के दौरान एक संदिग्ध टिकट सामने आया। टिकट पर सामान्य रूप से मौजूद रहने वाला बारकोड नहीं था, जिससे जांच अधिकारियों को संदेह हुआ। गहन जांच और पूछताछ में यह पता चला कि टिकट फर्जी तरीके से तैयार किया गया था और यात्री ने इसे एक दलाल से खरीदने की बात स्वीकार कर ली।

जांच आगे बढ़ने पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को एक बड़े नेटवर्क की जानकारी मिली। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि तत्काल टिकट बुकिंग शुरू होने के दौरान मुंबई के पीआरएस नेटवर्क में कुछ सेकंड पहले टिकट उपलब्ध होने का लाभ उठाया जा रहा था। दलाल मुंबई के विभिन्न आरक्षण केंद्रों से तत्काल टिकट बुक करवाते थे और फिर उनकी डिजिटल प्रतियां अन्य शहरों में सक्रिय एजेंटों को भेज देते थे।

चूंकि तत्काल टिकट यात्रा से लगभग 24 घंटे पहले ही उपलब्ध होते हैं, इसलिए मुंबई से गोरखपुर जैसे दूरस्थ स्थानों तक मूल टिकट को समय पर भौतिक रूप से पहुंचाना संभव नहीं था। इसी चुनौती से बचने के लिए गिरोह ने कथित तौर पर स्कैनिंग और प्रिंटिंग का तरीका अपनाया। टिकट की स्कैन कॉपी भेजकर गोरखपुर में विशेष प्रकार के आरक्षण टिकट कागज पर उसका प्रिंट निकाला जाता था, जिससे वह देखने में पूरी तरह वास्तविक काउंटर टिकट जैसा प्रतीत होता था।

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आरपीएफ की कार्रवाई के दौरान 11 यात्रियों को ऐसे टिकटों पर यात्रा करते हुए पकड़ा गया। इनमें नौ पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं। यह कार्रवाई ट्रेन संख्या 20104 में की गई। जांच के दौरान यात्रियों के पास से फर्जी अथवा एडिट किए गए आधार कार्ड और संदिग्ध रेलवे टिकट भी बरामद हुए।

जब्त किए गए टिकटों का कुल मूल्य ₹12,119 बताया गया है। अधिकारियों के अनुसार, गिरोह कथित रूप से दूसरे लोगों के नाम पर टिकट बुक करता था और फिर फर्जी पहचान दस्तावेज तैयार कर वास्तविक यात्रियों को टिकट उपलब्ध कराता था। इससे रेलवे की पहचान सत्यापन प्रणाली को भी धोखा देने का प्रयास किया जाता था।

मामले में पकड़े गए यात्रियों के खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 142 के तहत कार्रवाई की गई है। वहीं टिकटों की अवैध खरीद-फरोख्त और दलाली से जुड़े आरोपों में दलालों के खिलाफ धारा 143 के तहत छह अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

जांच एजेंसियों ने श्याम उर्फ चिंटू, दिलीप कुमार चौरसिया और राजेश समेत कई संदिग्ध दलालों की तलाश शुरू कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क एक से अधिक शहरों में सक्रिय हो सकता है और इसमें कई एजेंट शामिल हो सकते हैं। इसलिए वित्तीय लेनदेन, मोबाइल संचार, टिकट बुकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक साक्ष्य एक संगठित टिकट दलाली नेटवर्क की ओर संकेत करते हैं, जिसने रेलवे की ऑनलाइन और ऑफलाइन आरक्षण व्यवस्था की कमियों का फायदा उठाकर अवैध कमाई का रास्ता बना लिया था। मामले की विस्तृत जांच जारी है और फरार आरोपियों की तलाश के लिए विभिन्न स्थानों पर दबिश दी जा रही है।

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