अहमदाबाद। साइबर अपराधी अब लोगों को ट्रैफिक चालान और सरकारी नोटिस के नाम पर निशाना बनाकर बड़ी रकम की ठगी को अंजाम दे रहे हैं। गुजरात के अहमदाबाद में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां टोरेंट पावर में कार्यरत एक कर्मचारी व्हाट्सऐप पर मिले कथित आरटीओ ई-चालान के झांसे में आ गया और देखते ही देखते उसके बैंक खाते तथा वित्तीय विवरण का दुरुपयोग कर करीब ₹9.99 लाख की साइबर ठगी कर ली गई। मामले की शिकायत साइबर क्राइम पुलिस में दर्ज कराई गई है और जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, अहमदाबाद के रानीप क्षेत्र निवासी कन्हैयालाल शिवाभाई पटेल एक तकनीशियन के रूप में टोरेंट पावर में कार्यरत हैं। कुछ दिन पहले उन्हें व्हाट्सऐप पर उनके एक रिश्तेदार के माध्यम से “RTO Challan” नाम की एक फाइल प्राप्त हुई। फाइल देखकर उन्हें लगा कि संभवतः उनके वाहन के खिलाफ कोई ट्रैफिक चालान जारी हुआ होगा। इसी जिज्ञासा में उन्होंने फाइल को खोला और उसमें मांगी गई जानकारी के अनुसार अपना नाम और मोबाइल नंबर दर्ज कर दिया।
हालांकि एप या फाइल खोलने के बाद उन्हें कोई चालान संबंधी जानकारी दिखाई नहीं दी। इसे सामान्य तकनीकी समस्या समझकर उन्होंने एप बंद कर दिया और मामले को गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि इसी दौरान साइबर अपराधी उनके मोबाइल और बैंकिंग संबंधी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने में सफल हो चुके हैं।
FutureCrime Summit Invites OSINT and DFIR Startups to Showcase Their Innovations at Bharat Mandapam
दो दिन बाद उनके मोबाइल फोन पर एक ओटीपी प्राप्त हुआ। उस समय वह वाहन चला रहे थे, इसलिए उन्होंने उस संदेश पर ध्यान नहीं दिया। कुछ ही देर बाद उनकी बेटी ने उन्हें बताया कि उनके बैंक खाते से ₹99,987 की निकासी हो चुकी है। अचानक खाते से रकम कटने की सूचना मिलने पर वह हैरान रह गए और तुरंत बैंक से संपर्क किया।
बैंक स्टेटमेंट की जांच करने पर उन्हें पता चला कि उनके खाते से आरटीजीएस के माध्यम से ₹4 लाख का ट्रांजेक्शन किया गया है। इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि साइबर ठगों ने उनके नाम पर ₹9,15,177 का व्यक्तिगत ऋण भी स्वीकृत करा लिया था। उस ऋण राशि में से ₹4,98,765 पहले ही विभिन्न माध्यमों से निकाले जा चुके थे।
जब पूरे लेनदेन का आकलन किया गया तो कुल वित्तीय नुकसान ₹9,98,752 पाया गया। इसके बाद पीड़ित ने तत्काल बैंक अधिकारियों को घटना की जानकारी दी और साइबर क्राइम पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी एप किस स्रोत से भेजा गया था और ठगी की रकम किन खातों में स्थानांतरित की गई।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के महीनों में ई-चालान, बिजली बिल, केवाईसी अपडेट, पार्सल डिलीवरी और सरकारी नोटिस के नाम पर भेजे जाने वाले फर्जी एप और एपीके फाइलों के जरिए ठगी के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। ऐसे एप मोबाइल में इंस्टॉल होते ही डिवाइस की संवेदनशील जानकारी, एसएमएस, ओटीपी और बैंकिंग डेटा तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, साइबर अपराधी अब सोशल इंजीनियरिंग के साथ-साथ मैलिशियस एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं। लोग जब बिना सत्यापन के किसी लिंक, फाइल या एपीके को डाउनलोड करते हैं तो वे अनजाने में अपने मोबाइल और बैंकिंग सिस्टम का नियंत्रण अपराधियों को सौंप देते हैं। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि किसी भी ई-चालान या सरकारी नोटिस की जांच केवल आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत मोबाइल एप के माध्यम से ही करें।
पुलिस ने भी नागरिकों से अपील की है कि व्हाट्सऐप, एसएमएस या सोशल मीडिया के जरिए प्राप्त किसी भी संदिग्ध फाइल, लिंक या एप को डाउनलोड करने से बचें। किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं और संबंधित बैंक को तत्काल सूचित करें, ताकि नुकसान को कम किया जा सके।
