मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत वितरित आभूषणों की गुणवत्ता पर उठे सवाल; नवविवाहित महिलाओं ने नकली धातु से बने मंगलसूत्र देने का आरोप लगाया, जांच के आदेश

₹15 हजार के ‘चांदी के मंगलसूत्र’ कुछ ही हफ्तों में पड़े काले: सामूहिक विवाह योजना में फर्जीवाड़े के आरोप से मचा बवाल

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By Roopa
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रायपुर। छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत आयोजित सामूहिक विवाह समारोह अब गंभीर विवादों के केंद्र में आ गया है। योजना के अंतर्गत नवविवाहित महिलाओं को दिए गए मंगलसूत्रों के कुछ ही सप्ताह में काले पड़ जाने के बाद भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़े और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप तेज हो गए हैं। प्रभावित महिलाओं का दावा है कि उन्हें ₹15 हजार मूल्य के शुद्ध चांदी के मंगलसूत्र दिए जाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन जांच में वे कथित तौर पर सस्ती मिश्रित धातु से बने पाए गए।

मामला 10 फरवरी को आयोजित उस सामूहिक विवाह समारोह से जुड़ा है, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लगभग 180 जोड़ों का विवाह कराया गया था। यह आयोजन जिले के महामाया मंदिर परिसर में हुआ था और इसमें कई जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी रही। विवाह के दौरान नवविवाहित दुल्हनों को विभिन्न उपहारों के साथ मंगलसूत्र भी प्रदान किए गए थे, जिन्हें योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया था।

शुरुआत में सब कुछ सामान्य दिखाई दिया, लेकिन विवाह के कुछ सप्ताह बाद कई महिलाओं ने देखा कि उनके मंगलसूत्रों की चमक तेजी से खत्म हो रही है। धीरे-धीरे आभूषणों का रंग बदलकर काला पड़ने लगा। इससे महिलाओं और उनके परिवारों में चिंता बढ़ गई। कई महिलाओं ने इसे सामान्य धातु प्रतिक्रिया मानकर नजरअंदाज किया, लेकिन जब बड़ी संख्या में एक जैसी शिकायतें सामने आईं तो मामला गंभीर हो गया।

बताया गया कि पांच प्रभावित महिलाओं ने अपने मंगलसूत्र स्थानीय ज्वेलर्स के पास जांच के लिए ले गए। कथित परीक्षण में सामने आया कि जिन आभूषणों को चांदी का बताया गया था, वे वास्तव में तांबा, जस्ता और निकेल जैसी धातुओं के मिश्रण से बने हो सकते हैं। महिलाओं का आरोप है कि उन्हें नकली आभूषण देकर धोखा दिया गया और सरकारी योजना के नाम पर निम्न गुणवत्ता की सामग्री वितरित की गई।

इसके बाद प्रभावित महिलाओं ने महिला एवं बाल विकास विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने काले पड़ चुके मंगलसूत्र सार्वजनिक रूप से दिखाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। महिलाओं का कहना है कि मंगलसूत्र केवल आभूषण नहीं, बल्कि वैवाहिक जीवन और सामाजिक सम्मान का प्रतीक होता है। ऐसे में कथित तौर पर नकली मंगलसूत्र दिए जाना उनकी भावनाओं और विश्वास के साथ खिलवाड़ है।

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प्रभावित महिलाओं में शामिल संजना दयाल ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से बताया था कि प्रत्येक मंगलसूत्र शुद्ध चांदी का है और उसकी कीमत लगभग ₹15 हजार है। उन्होंने कहा कि कुछ ही सप्ताह में उसका रंग पूरी तरह बदल गया, जिससे योजना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

विवाद बढ़ने के साथ ही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। विपक्षी दलों ने मामले को सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार का उदाहरण बताते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका आरोप है कि गरीब परिवारों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं में गुणवत्ता और खरीद प्रक्रिया की उचित निगरानी नहीं की गई।

दूसरी ओर, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वीकार किया कि इस संबंध में शिकायतें उनके संज्ञान में आई हैं। उन्होंने कहा कि आभूषणों की खरीद, गुणवत्ता परीक्षण और वितरण प्रक्रिया की पूरी तरह निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में वितरित सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत निगरानी तंत्र आवश्यक है। खासकर उन योजनाओं में, जिनका सीधा संबंध सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व वाली वस्तुओं से हो, पारदर्शिता और गुणवत्ता नियंत्रण सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

फिलहाल पूरे मामले ने जिले में व्यापक चर्चा छेड़ दी है। प्रभावित परिवार जांच के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं, जबकि प्रशासन पर यह दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह जल्द से जल्द सच्चाई सामने लाए और यदि अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करे।

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