टेलीग्राम पर आए आकर्षक ऑफर से शुरू हुआ दो महीने का साइबर जाल; छोटे-छोटे टास्क और शुरुआती भुगतान से जीता भरोसा, फिर 33 ट्रांजैक्शनों में निकल गए ₹2.72 करोड़

₹500 की पहली कमाई बनी ₹2.72 करोड़ की चपत: Google Review ‘वर्क फ्रॉम होम’ टास्क के जाल में फंसा टैक्स कंसल्टेंट

Roopa
By Roopa
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पुणे। घर बैठे आसान कमाई का सपना दिखाने वाले एक ऑनलाइन टास्क फ्रॉड ने पुणे के 51 वर्षीय टैक्स कंसल्टेंट को ₹2.72 करोड़ का भारी नुकसान पहुंचा दिया। साइबर ठगों ने “Google Review Work From Home” योजना के नाम पर पहले पीड़ित का भरोसा जीता, फिर उसे कथित निवेश और अधिक कमाई के लालच में लगातार रकम जमा कराने के लिए प्रेरित किया। करीब दो महीने तक चले इस सुनियोजित साइबर जाल में पीड़ित ने 33 अलग-अलग लेनदेन किए और अंततः करोड़ों रुपये गंवा बैठा।

मामले की शिकायत के बाद शहर के साइबर क्राइम थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। जांच में सामने आया है कि ठगों ने सोशल इंजीनियरिंग, फर्जी ऑनलाइन टास्क और कथित रिवॉर्ड सिस्टम का इस्तेमाल कर पीड़ित को अपने जाल में फंसाया।

जानकारी के अनुसार, पुणे के बिबवेवाड़ी क्षेत्र में रहने वाले टैक्स कंसल्टेंट को कुछ समय पहले टेलीग्राम पर एक महिला की प्रोफाइल से संदेश प्राप्त हुआ। संदेश में “वर्क फ्रॉम होम” योजना का प्रचार किया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि प्रतिभागियों को प्रत्येक टास्क पूरा करने पर ₹100 या उससे अधिक का भुगतान मिलेगा। अतिरिक्त आय की संभावना देखकर पीड़ित ने संपर्क किया और योजना में रुचि दिखाई।

इसके बाद उसे शुरुआती परीक्षण कार्य दिए गए। ठगों ने उसे विभिन्न व्यवसायों और स्थानों के लिए Google पर रिव्यू पोस्ट करने को कहा। पीड़ित ने पांच रिव्यू पोस्ट कर उनके स्क्रीनशॉट साझा किए। कुछ ही समय बाद उसके बैंक खाते में ₹500 जमा कर दिए गए। यह छोटी रकम वास्तव में विश्वास कायम करने की रणनीति का हिस्सा थी, जिसने पीड़ित को यह यकीन दिला दिया कि योजना वास्तविक है और इससे कमाई संभव है।

शुरुआती सफलता के बाद उसे एक बड़े टेलीग्राम समूह और कई कथित समन्वयकों से जोड़ा गया। यहां उसे बताया गया कि अधिक कमाई के लिए “प्रीमियम टास्क” पूरे करने होंगे। इन टास्कों में पहले कुछ राशि जमा करनी होती थी, जिसके बदले कहीं अधिक रिटर्न मिलने का दावा किया जाता था। शुरुआत में कुछ लेनदेन पर कथित लाभ दिखाकर उसका भरोसा और मजबूत किया गया।

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धीरे-धीरे ठगों ने निवेश की राशि बढ़ानी शुरू कर दी। हर चरण में पीड़ित को बताया गया कि अगला टास्क पूरा करने या पहले से जमा रकम निकालने के लिए अतिरिक्त भुगतान करना आवश्यक है। कभी टैक्स, कभी प्रोसेसिंग फीस, कभी सिस्टम अपग्रेड और कभी खाता सत्यापन के नाम पर उससे लगातार धनराशि जमा कराई गई। जब तक उसे धोखाधड़ी का संदेह हुआ, तब तक वह विभिन्न बैंक खातों में कुल ₹2.72 करोड़ स्थानांतरित कर चुका था।

जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के मामलों में इस्तेमाल किए जाने वाले बैंक खाते अक्सर “म्यूल अकाउंट” होते हैं, जिन्हें अपराधी गिरोह धन को तेजी से इधर-उधर करने के लिए उपयोग करते हैं। इससे रकम की ट्रैकिंग और रिकवरी दोनों चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, टास्क-आधारित ऑनलाइन फ्रॉड वर्तमान समय में सबसे तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों में शामिल हैं। उनका कहना है कि साइबर अपराधी पहले छोटी रकम देकर भरोसा जीतते हैं और फिर सोशल इंजीनियरिंग के जरिए पीड़ित को बड़े निवेश के लिए प्रेरित करते हैं। एक बार व्यक्ति मानसिक रूप से लाभ की उम्मीद से जुड़ जाता है, तो वह नुकसान की भरपाई के लिए और अधिक धन लगाता जाता है, जिसका फायदा अपराधी उठाते हैं।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी ऑनलाइन नौकरी, रिव्यू टास्क, लाइक-शेयर अभियान या निवेश योजना में शामिल होने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से जांच करना जरूरी है। टेलीग्राम, व्हाट्सऐप या सोशल मीडिया पर भेजे गए आकर्षक ऑफर, गारंटीड रिटर्न और तत्काल कमाई के दावे अक्सर धोखाधड़ी के संकेत होते हैं।

मामले की जांच जारी है और साइबर टीम संबंधित बैंक खातों, डिजिटल ट्रेल तथा संदिग्ध ऑनलाइन प्रोफाइल की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के कहने पर धनराशि ट्रांसफर करने से पहले पूरी सावधानी बरतें और संदेह होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

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