मानसून पूर्व सफाई कार्यों की निगरानी के लिए लगाए गए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सिस्टम ने उजागर कीं खामियां; तस्वीरों के दोबारा इस्तेमाल, रिकॉर्ड में विसंगतियों और मशीनरी तैनाती में कमी पर हुई कार्रवाई

AI ने खोली नालों की सफाई में गड़बड़ियों की परतें: मुंबई में ठेकेदारों पर ₹9.25 करोड़ का जुर्माना, फोटो और रिकॉर्ड में मिलीं गंभीर अनियमितताएं

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By Roopa
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मुंबई। मुंबई में मानसून पूर्व नालों की सफाई (डिसिल्टिंग) कार्यों की निगरानी के लिए लागू की गई कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित प्रणाली ने कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया है। इन खुलासों के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने संबंधित ठेकेदारों पर कुल ₹9.25 करोड़ से अधिक का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई नालों की सफाई से जुड़े रिकॉर्ड, तस्वीरों, वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों में पाई गई गड़बड़ियों के आधार पर की गई है।

बीएमसी के अनुसार यह जुर्माना विभिन्न प्रकार की अनियमितताओं के लिए लगाया गया है, जिनमें कार्यस्थल की तस्वीरों का बार-बार उपयोग, रिकॉर्ड और वास्तविक कार्य में अंतर, अनिवार्य वीडियो प्रस्तुत न करना, वाहन संबंधी विवरणों में विसंगतियां और सफाई कार्यों से जुड़े दस्तावेजों में कमियां शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम सार्वजनिक धन के उचित उपयोग और मानसून से पहले जल निकासी व्यवस्था को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

महानगरपालिका ने बताया कि कुल ₹9.25 करोड़ के दंड में से लगभग ₹8.99 करोड़ की राशि सीधे AI आधारित निगरानी प्रणाली द्वारा चिन्हित की गई अनियमितताओं के आधार पर लगाई गई। इनमें छोटे नालों से संबंधित मामलों में लगभग ₹6.11 करोड़, बड़े नालों से जुड़े मामलों में ₹1.39 करोड़ तथा मीठी नदी की सफाई कार्यों में पाई गई खामियों के लिए लगभग ₹1.48 करोड़ का दंड शामिल है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक दोषपूर्ण डिसिल्टिंग ट्रिप पर ₹1,000 की दर से लगभग ₹26.46 लाख का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया गया।

अधिकारियों के अनुसार यह पूरी राशि संबंधित ठेकेदारों के लंबित भुगतानों से वसूल की जा रही है। महानगरपालिका का मानना है कि वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना ऐसी परियोजनाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखना कठिन होता है। इसी वजह से दंडात्मक कार्रवाई को सख्ती से लागू किया जा रहा है।

बीएमसी ने पिछले वर्ष नालों और मीठी नदी की सफाई कार्यों की निगरानी के लिए AI आधारित तकनीकी प्रणाली शुरू की थी। यह प्रणाली ठेकेदारों द्वारा अपलोड की गई तस्वीरों, वीडियो फुटेज और सीसीटीवी रिकॉर्डिंग का विश्लेषण करती है। इसके माध्यम से यह जांच की जाती है कि कार्य वास्तव में निर्धारित स्थानों पर और तय मानकों के अनुसार किया गया है या नहीं। तकनीक का उद्देश्य मानवीय निगरानी की सीमाओं को कम करना और डेटा आधारित सत्यापन सुनिश्चित करना है।

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जांच में सामने आया कि कुछ मामलों में एक ही तस्वीरों का अलग-अलग कार्यों के लिए पुनः उपयोग किया गया था। कई स्थानों पर आवश्यक वीडियो उपलब्ध नहीं कराए गए, जबकि कुछ रिकॉर्ड में दर्ज वाहनों और वास्तविक कार्यस्थल के विवरणों में मेल नहीं पाया गया। इसके अलावा ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें निर्धारित फोटो साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे या कार्य प्रगति संबंधी रिकॉर्ड अधूरे पाए गए।

महानगरपालिका ने केवल डिजिटल रिकॉर्ड की अनियमितताओं पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्य निष्पादन से जुड़ी खामियों को भी चिन्हित किया। जांच के दौरान पर्याप्त मशीनरी और श्रमिकों की तैनाती न होना, कर्मचारियों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध न कराना, निकाली गई गाद के उचित निपटान में लापरवाही तथा निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूरा न करना जैसी कमियां भी दर्ज की गईं।

शहरी अवसंरचना विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े शहरों में सार्वजनिक परियोजनाओं की निगरानी के लिए AI का उपयोग जवाबदेही बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। पारंपरिक निरीक्षण प्रणालियों में जहां मानवीय त्रुटि या सीमित संसाधनों की समस्या रहती है, वहीं AI बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण कर संभावित गड़बड़ियों की पहचान अपेक्षाकृत तेजी से कर सकता है।

मुंबई में हर वर्ष मानसून के दौरान जलभराव एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आता है। ऐसे में नालों और जल निकासी तंत्र की समय पर सफाई को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। बीएमसी का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में ठेकेदार निर्धारित मानकों और गुणवत्ता नियमों का पूरी तरह पालन करें।

महानगरपालिका ने चेतावनी दी है कि यदि आगे भी इसी प्रकार की अनियमितताएं सामने आती हैं तो और अधिक कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा ताकि सार्वजनिक परियोजनाओं में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

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