नई दिल्ली। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय कथित संगठित सोना तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जांच एजेंसियों ने लगभग ₹25 करोड़ मूल्य का 17 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना जब्त किया है। समन्वित अभियान के दौरान कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें एक महिला भी शामिल है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि तस्करी के लिए अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्ग और भारत-बांग्लादेश सीमा से जुड़े रास्तों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस कार्रवाई को हाल के महीनों में सोना तस्करी के खिलाफ सबसे महत्वपूर्ण अभियानों में से एक माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसियों को खुफिया इनपुट मिले थे कि विदेशी मूल का सोना विभिन्न चैनलों के माध्यम से देश में लाया जा रहा है। इसके बाद पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्र में एक साथ कई स्थानों पर निगरानी और कार्रवाई शुरू की गई। जांचकर्ताओं का मानना है कि तस्कर संगठित तरीके से सोने को भारत में पहुंचाकर घरेलू बाजारों में खपाने का प्रयास कर रहे थे, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो सकता था।
सबसे बड़ी बरामदगी कोलकाता में हुई, जहां अधिकारियों ने सात लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में एक महिला भी शामिल है। जांच में सामने आया कि लगभग 11.6 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना कथित तौर पर थाईलैंड से लाया गया था। अधिकारियों को संदेह है कि तस्करी के इस मॉड्यूल में अंतरराष्ट्रीय यात्रा मार्गों और मानव कैरियर नेटवर्क का उपयोग किया जा रहा था। सोना देश में पहुंचने के बाद इसे विभिन्न चैनलों के माध्यम से आगे भेजे जाने की तैयारी थी।
जांच एजेंसियां अब आरोपियों के यात्रा रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन, मोबाइल संचार और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि गिरफ्तार व्यक्ति केवल वाहक या मध्यस्थ हो सकते हैं और इनके पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है, जो विदेशों से सोना मंगाने, उसे सुरक्षित रूप से पहुंचाने और बाजार में खपाने का काम करता है।
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इसी दिन पूर्वोत्तर भारत के अगरतला क्षेत्र में भी एक अलग अभियान चलाया गया। यहां लगभग 5 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना बरामद किया गया और तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। जांच में आरोप है कि यह खेप भारत-बांग्लादेश सीमा से जुड़े त्रिपुरा सेक्टर के रास्ते देश में लाई जा रही थी। सीमावर्ती इलाकों का उपयोग लंबे समय से विभिन्न प्रकार की तस्करी गतिविधियों के लिए किए जाने की आशंका जताई जाती रही है, जिसके चलते सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बढ़ा रही हैं।
अगरतला में हुई कार्रवाई में रेलवे मार्गों और परिवहन नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों को संदेह है कि सीमा पार आने के बाद सोने को विभिन्न राज्यों तक पहुंचाने के लिए रेल और सड़क मार्ग का इस्तेमाल किया जाता था। यही वजह है कि जांच अब केवल बरामदगी तक सीमित न रहकर पूरे लॉजिस्टिक नेटवर्क की पहचान पर केंद्रित हो गई है।
जांचकर्ता यह भी पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि कोलकाता और अगरतला में पकड़े गए दोनों मॉड्यूल आपस में जुड़े हुए थे या अलग-अलग नेटवर्क के रूप में काम कर रहे थे। बरामद सोने की शुद्धता, स्रोत और अंतिम गंतव्य की पुष्टि के लिए विशेषज्ञ परीक्षण कराए जा रहे हैं। साथ ही वित्तीय लेन-देन की जांच कर उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है जिन्होंने कथित तौर पर इन खेपों को वित्तपोषित किया।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि आधुनिक तस्करी नेटवर्क अब केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर नहीं रहते। उनके अनुसार, ऐसे गिरोह एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, डिजिटल भुगतान प्रणालियों और बहुस्तरीय लॉजिस्टिक चैनलों का इस्तेमाल कर अपने संचालन को छिपाने की कोशिश करते हैं। इसलिए किसी भी बड़े तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए भौतिक साक्ष्यों के साथ-साथ डिजिटल ट्रेल की जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है।
फिलहाल गिरफ्तार सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियां देश तथा विदेश में मौजूद संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। ₹25 करोड़ मूल्य के 17 किलोग्राम सोने की यह बरामदगी एक बार फिर दिखाती है कि संगठित तस्करी नेटवर्क लगातार नए रास्ते और तरीके अपनाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं एजेंसियां भी ऐसे नेटवर्क को तोड़ने के लिए अपनी कार्रवाई तेज कर रही हैं।
