वेतन बिल और ट्रेजरी सिस्टम से छेड़छाड़ कर बनाई गई फर्जी बेनिफिशियरी आईडी; रिश्तेदारों के खातों में करोड़ों की ट्रांसफरिंग, 53 खातों में ₹5.50 करोड़ फ्रीज

“डीआईओएस दफ्तर में ‘फर्जी आईडी’ का जाल: चपरासी ने रिश्तों के सहारे रचा करोड़ों का खेल, सात महिलाएं गिरफ्तार”

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By Roopa
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पीलीभीत। शिक्षा विभाग के डीआईओएस कार्यालय से जुड़ा एक बड़ा गबन सामने आया है, जिसमें एक चपरासी ने सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर करोड़ों रुपये की हेराफेरी कर दी। इस मामले में मुख्य आरोपी इल्हाम उर रहमान शम्सी की दो पत्नियों समेत सात महिलाओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। जांच में खुलासा हुआ है कि फर्जी बेनिफिशियरी आईडी बनाकर सरकारी धन को सुनियोजित तरीके से रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में ट्रांसफर किया गया।

मामले की शुरुआत 13 फरवरी 2026 को दर्ज कराई गई शिकायत से हुई, जिसमें बताया गया कि डीआईओएस कार्यालय में तैनात चपरासी इल्हाम उर रहमान शम्सी लंबे समय से वेतन बिल और टोकन जनरेशन जैसे अहम कार्य संभाल रहा था। इसी दौरान उसने ट्रेजरी सिस्टम में तकनीकी खामियों का फायदा उठाते हुए फर्जी लाभार्थी आईडी तैयार कीं और उनके जरिए सरकारी धन को निजी खातों में ट्रांसफर करना शुरू कर दिया।

जांच में सामने आया कि आरोपी ने 12 सितंबर 2024 से लेकर अब तक 98 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए ₹1,01,95,135 की रकम एक खाते में ट्रांसफर की। हालांकि जब जांच का दायरा बढ़ाया गया, तो कुल गबन की रकम और नेटवर्क कहीं ज्यादा बड़ा निकला। पुलिस ने अब तक 53 संदिग्ध बैंक खातों को चिन्हित करते हुए उनमें मौजूद ₹5,50,54,594 की राशि फ्रीज कर दी है, जिससे मामले की गंभीरता और व्यापकता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

पूछताछ और बैंक ट्रांजेक्शन के विश्लेषण में यह भी सामने आया कि आरोपी ने धन को सीधे अपने नाम पर रखने के बजाय रिश्तेदारों और करीबी परिचितों के खातों में ट्रांसफर किया, ताकि संदेह से बचा जा सके। इस नेटवर्क में उसकी पहली पत्नी लुबना के खाते में ₹2.37 करोड़, दूसरी पत्नी अजरा खान के खाते में ₹2.12 करोड़, साली फातिमा नवी के खाते में ₹1.03 करोड़, सलहैज आफिया खान के खाते में ₹80 लाख से अधिक, सास नाहिद के खाते में ₹95 लाख, परिचित परवीन खातून के खाते में ₹48 लाख और आशकारा परवीन के खाते में ₹38 लाख ट्रांसफर किए गए।

पुलिस ने इन सभी खातों की जांच के बाद सात महिलाओं को गिरफ्तार किया है। इनमें लुबना और फातिमा नवी (संभल), परवीन खातून (बिजनौर), आशकारा परवीन (गाजियाबाद), अजरा खान, नाहिद और आफिया खान (बुलंदशहर) शामिल हैं। सभी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।

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जांच एजेंसियों का मानना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जिसमें बैंकिंग और ट्रेजरी प्रक्रियाओं की जानकारी रखने वाले लोग शामिल रहे होंगे। फिलहाल पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं और लोग या विभागीय स्तर पर कोई मिलीभगत तो नहीं थी।

यह मामला सरकारी दफ्तरों में वित्तीय निगरानी और डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रेजरी और वेतन वितरण जैसी संवेदनशील प्रक्रियाओं में मल्टी-लेयर ऑडिट और रियल-टाइम मॉनिटरिंग की कमी ऐसे घोटालों को जन्म देती है।

साइबर और वित्तीय अपराधों पर नजर रखने वाले एक विशेषज्ञ का कहना है कि “इस तरह के मामलों में अपराधी सिस्टम की अंदरूनी प्रक्रियाओं को समझकर ‘सोशल इंजीनियरिंग’ और तकनीकी कमजोरियों का संयुक्त इस्तेमाल करते हैं। फर्जी आईडी बनाना और पैसे को कई खातों में घुमाना, जांच को भटकाने की आम रणनीति होती है।”

फिलहाल पुलिस बाकी संदिग्ध खातों और संभावित आरोपियों की तलाश में जुटी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, शिक्षा विभाग और ट्रेजरी सिस्टम से जुड़े अधिकारियों पर भी आंतरिक जांच का दबाव बढ़ गया है, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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