जाली बैंक रसीदों के सहारे हासिल किए गए प्रोजेक्ट; ठेकेदार ब्लैकलिस्ट, सभी गारंटी की जांच के आदेश, डिजिटल सत्यापन अनिवार्य करने की तैयारी

“फर्जी एफडीआर, असली ठेके: आगरा नगर निगम में करोड़ों के टेंडर घोटाले का खुलासा”

Roopa
By Roopa
5 Min Read

आगरा। आगरा नगर निगम में वित्तीय अनियमितता का एक और बड़ा मामला सामने आया है, जहां एक ठेकेदार ने फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (एफडीआर) लगाकर करोड़ों रुपये के सार्वजनिक कार्य हासिल कर लिए। इस खुलासे के बाद नगर निगम प्रशासन में हड़कंप मच गया है और अब पिछले दो वर्षों में जारी सभी बड़े ठेकों की व्यापक जांच शुरू कर दी गई है।

मामला तब उजागर हुआ जब ताजगंज जोन के तहत विभिन्न निविदाओं में भाग लेने वाली एक फर्म द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की नियमित जांच की गई। जांच में पाया गया कि मैसर्स राजेश कंस्ट्रक्शन नामक फर्म ने वित्तीय सुरक्षा के तौर पर जिन एफडीआर को प्रस्तुत किया था, वे संदिग्ध प्रतीत हो रहे थे। इसके बाद इन दस्तावेजों को सत्यापन के लिए संबंधित बैंक शाखा भेजा गया।

बैंक की ओर से मिले जवाब ने पूरे मामले को साफ कर दिया। लिखित पुष्टि में बताया गया कि प्रस्तुत की गई एफडीआर कभी जारी ही नहीं की गई थीं और बैंक के रिकॉर्ड में उनका कोई अस्तित्व नहीं है। यानी ये दस्तावेज पूरी तरह से फर्जी थे।

इस खुलासे के बाद नगर निगम प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित फर्म को ब्लैकलिस्ट कर दिया। साथ ही, पंजीकरण के समय जमा की गई उसकी अन्य सुरक्षा राशियों को जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने इसे सरकारी व्यवस्था के साथ गंभीर धोखाधड़ी करार दिया है।

जांच में यह भी सामने आया कि इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शहर में कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों के ठेके हासिल किए गए थे। इनमें सेवला जाट स्थित आंबेडकर पार्क में बाउंड्री वॉल और पुलिया निर्माण का कार्य शामिल है। इसके अलावा शमसाबाद रोड पर मारुति सिटी रोड से एक आवासीय क्षेत्र तक इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण का ठेका भी इसी फर्म को मिला था। इन सभी परियोजनाओं की लागत करोड़ों रुपये में बताई जा रही है, जिससे इस धोखाधड़ी की गंभीरता और बढ़ जाती है।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

घटना के बाद नगर निगम प्रशासन अब “बैंक-चेकिंग मोड” में आ गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पिछले दो वर्षों में जारी सभी बड़े ठेकों के साथ जमा की गई एफडीआर और बैंक गारंटी का भौतिक सत्यापन किया जाए। आशंका जताई जा रही है कि इस तरह की गड़बड़ी में अन्य छोटी फर्में भी शामिल हो सकती हैं।

यह मामला निविदा प्रक्रिया में मौजूद खामियों को भी उजागर करता है। अधिकारियों का मानना है कि केवल दस्तावेजों के आधार पर सत्यापन करने की प्रक्रिया में कई कमजोरियां हैं, जिनका फायदा उठाकर इस तरह की धोखाधड़ी संभव हो जाती है। अब प्रशासन डिजिटल माध्यम से सत्यापन को अनिवार्य करने की योजना बना रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों को रोका जा सके।

हाल के दिनों में इस तरह की यह दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले मैनपुरी में एक फर्म को फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाने के आरोप में ब्लैकलिस्ट किया गया था। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने सिस्टम की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

नगर निगम ने अपने विधि विभाग को निर्देश दिया है कि इस मामले में ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की संभावनाओं पर विचार किया जाए। प्रशासन का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से भविष्य में ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकेगा और एक सख्त संदेश जाएगा।

इस घटनाक्रम के बाद ठेकेदारों के बीच भी चिंता का माहौल है, क्योंकि अब उनके वित्तीय दस्तावेजों की सख्ती से जांच की जा रही है। वहीं, प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती पारदर्शी और सुरक्षित टेंडर प्रक्रिया सुनिश्चित करना है।

फिलहाल जांच जारी है और यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इस पूरे मामले में अंदरूनी मिलीभगत तो नहीं थी। आने वाले दिनों में जांच के और खुलासे होने की संभावना है। प्रशासन का फोकस फिलहाल नुकसान की भरपाई, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सिस्टम में सुधार लाने पर है, ताकि भविष्य में इस तरह के घोटालों की पुनरावृत्ति न हो सके।

हमसे जुड़ें

Share This Article